यहां राशन के लिए भटक रहे ग्रामीण, फिर भी जिम्मेदारों को नही परवाह

कोटेदार की हठधर्मिता से परिवारों को उनको मिलने वाला राशन नही मिल पा रहा है।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 19 Jan 2019, 11:47 PM IST

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर देहात-उत्तर प्रदेश में आम जनमानस की समस्याओ को लेकर नित्य नई-नई योजनाओ की शुरुआत सरकार द्वारा की जाती है, लेकिन इन योजनाओं की यदि जमीनी हकीकत परखी जाये तो दंग रह जाएंगे। दरअसल प्रदेश में कोटेदार द्वारा राशन की गड़बड़ी की लगातार खबरें मिल रही हैं। कानपुर देहात के जिस ब्लाक के गांव की तरफ आप रुख करें, सिर्फ है तौबा मची है। बता दे कि मैथा ब्लाक के साहनीखेड़ा गाँव एक अकेला गाँव नही है, जिसमें ये समस्या देखी गई है। गरीबो को मिलने वाला सरकारी राशन इस गांव की प्राथमिक समस्या है। तो कहीं कोटेदार की हठधर्मिता से परिवारों को उनको मिलने वाला राशन नही मिल पा रहा है। इसकी शिकायत इस गांव के लोग जिले के आलाधिकारियो से अनगिनत बार कर चुके है, लेकिन इस जनपद के अधिकारियो के हाल ये है कि उस गाँव में जाना ही नही चाहते हैं और कार्यालय के गर्म ब्लोवर में ही बैठकर सारी समस्याओं को सुलझाना चाहते हैं।

 

पूरा मामला जनपद के मैथा ब्लाक के गाँव साहनी खेड़ा का है, जहां कोटेदार की दबंगई के चलते गाँव के लोगों ने गांव से लेकर जनपद के जिलाधिकारी कार्यालय तक अपनी समस्या को लेकर फिर एक बार गुहार लगाई है। दरअसल इन लोगों का कहना है कि हम लोग जब इस कोटेदार के यहां राशन लेने जाते हैं तो ये अंगूठा न मैच करने की वजह से राशन नही देता है। तब इस पर बहस शुरू हो जाती और इसी दौरान इस कोटेदार के लोग बंदूक के दम पर मारपीट पर आमादा हो जाते हैं। जिसमें हाल ही मे पुलिस को भी आकर बीच बचाव करना पड़ा था। तब जाकर मामला शांत हुआ था।

 

उस समय से ये परिवार लगातार अपनी समस्या की गुहार अपने जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से कर रहे हैं, वही गाँव के लोग कहते हैं कि आखिर ऐसी सरकारों के क्या मायने, जो गरीबों की समस्या का निदान नही कर सकती है। चुनाव आते हैं, बड़ी बड़ी योजनाओ के पिटारे जनसभाओं के माध्यम से जनता के सामने रखी जाती है, लेकिन गाँव की भोली भाली जनता से वोट लेने के बाद ये नेता कभी गाँव को देखते भी नही हैं। आखिर इनकी समस्या का निदान किस तरह से हो सकता है। ये आज भी बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

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