इस महिला नेता ने राज बब्बर पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- मुझसे की गई ऐसी मांग कि...

कांग्रेस के तीन बार की पार्षद ने खोला बड़ा राज...

कानपुर. कल तक जो साथ-साथ थे, वही आज निगम चुनाव के मैदान में एक-दूसरे के विरोधी हो गए हैं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर चुनावी अखाड़े में अपनों को पटखनी देने के लिए उतर चुके हैं। इसी कड़ी में वार्ड सूटरगंज से कांग्रेस से तीन बार की पार्षद रही नीलम चौरसिया टिकट नहीं मिलने के चलते निर्दलीय पर्चा भर कर चुनाव मैदान में कांग्रेसियों की नींद-हराम किए हैं। नीलिमा ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने हमें पार्षदी का टिकट देने का आश्वासन देकर चुनाव की तैयारी में जुट जाने को कहा था। लेकिन जिन्हें उन्होंने पार्टी का सिंबल देने की जिम्मेदारी दी, उन्हीं ने डेढ़ से लेकर दो लाख में टिकट बेचा। नीलिमा ने बताया कि कांग्रेस नेताओं ने 110 वार्डों के टिकट बेचे हैं, जिसकी जानकारी पार्टी हाईकामन के पास भी है, बावजूद इन पर कार्रवाई नहीं हुई।


टिकट के लिए डेढ़ से दो लाख की डिमांड

नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस ने नामांकन से कुछ घंटे पहले टिकटों का वितरण किया। 2017 के चुनाव में पार्टी ने कई पुराने पार्षदों की जगह नए चेहरों को पंजा थमा दिया। इसी वजह से यहां परेशानी कुछ ज्यादा लग रही है। पार्टी ने डेढ़ दर्जन टिकट तो ऐन वक्त पर बदले हैं। जिनके टिकट बदले गए उन्हें पहले उम्मीदवार घोषित किया जा चुका था। ये लोग अपने-अपने वार्ड में प्रचार भी शुरू कर चुके थे। अचानक, पार्टी ने फैसला सुनाया और इन्हें मैदान से हटने को कहा। इस पर कुछ तो मान गए, जो नहीं माने वे मैदान में हैं। जो मैदान से हटे हैं, उनका संकट यह है कि कल तक क्षेत्र में खुद के लिए वोट मांग रहे थे, अब किसी दूसरे के लिए वोट मांगने कैसे जाएं? लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता हैं,सो मजबूरी है। सूटरगंज से तीन बार से लगातार पार्षद का चुनाव जीतती आ रहीं कांग्रेसी नीलम चौरसिया को जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने विरोधी स्वर अख्तियार कर निर्दलीय मैदान में उतर चुकी हैं।


चापलूसों के चलते हारी कांग्रेस

नीलम चौरसिया ने कहा कि हमने पार्षदी के लिए आवेदन किया था। पार्टी के पदाधिकारियों ने टिकट वितरण से पहले जनता से जुड़े पार्षदों से पैसे की डिमांड की, जिसे हमने देने से मना कर दिया। नीलिमा ने बताया कि एक कांग्रेय के नेता ने हमें मैसेज भिजवाया और टिकट के बदले डेढ़ से दो लाख रूपए की व्यवस्था करने को कहा। पर इतनी बड़ी रकम हमारे पास नहीं थी। कांग्रेस के नेताओं ने पैसे नहीं मिलने के चलते एक नए कैंडीडेट को टिकट दे दिया। नीलम ने बताया कि टिकट कटने के बाद भाजपा की तरफ से हमें टिकट का ऑफर दिया था, जिसे हमने ठुकरा दिया। नीलिमा कहती हैं कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह टिकट का वितरण रहा। चापलूसों ने पार्टी हाईकमान को गुमराह कर अपने करीबियों को टिकट दिलवा दिया, जिसके चलते कांग्रेस यूपी में सात सीटों में सिमट गई।


कांग्रेस के अंदर है सबसे ज्यादा बगावत

टिकट न मिलने की नाराजगी, गुस्सा और बगावत, सबसे ज्यादा कांग्रेस में देखने को मिली है। यहां 110 वार्डों में से दो दर्जन से ज्यादा वार्डां में कांग्रेसियों ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। पार्टी का टिकट मिलने की उम्मीद में नामांकन फार्म भरा। टिकट नहीं मिला तो गुस्से में नाम वापस नहीं लिया और निर्दलीय उम्मीदवार हो गए। मकसद, अपनों के लिए मुसीबत खड़ी करना, नतीजा जो भी हो। कुछ चुनाव मैदान में भले ही नहीं उतरे हों, लेकिन पार्टी नेताओं पर खुलकर बयानी हमला बोल रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ तो इससे भी आगे बढ़कर पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान ही कर चुके हैं। पार्टी नेतृत्व फिलहाल चुप्पी साधे देख रहा है।

नितिन श्रीवास्तव
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