कानपुर बताएगा कि जीएसटी में कैसे वसूला जाएगा कर, बांटा जाएगा काम

कर निर्धारण के साथ-साथ वसूली और नीलामी की तय होगी ड्यूटी
४४ साल पुराने मैनुअल के आधार पर हो रहा काम, अब होगा बदलाव

कानपुर। प्रदेश में कर निर्धारण की प्रक्रिया में तो बार-बार बदलाव हुआ लेकिन उसकी कार्ययोजना अभी भी पुरानी है। पहले अलग-अलग टैक्स वसूली होती थी, फिर वैट में बदलाव हुआ और अब जीएसटी के तहत कर लिया जाता है। लेकिन काम का तरीका वही पुराना है। ४४ साल पहले जिस तरह से टैक्स निर्धारण और वसूली होती थी आज भी वही तरीका है, जिस कारण कार्य वितरण काफी अनियमित होता गया। जिससे अब विभागीय कार्य सही गति से नहीं चल पा रहा है। इस कारण अब जीएसटी के तहत कर वसूली की प्रक्रिया निर्धारित करने की जिम्मेदारी कानपुर को सौंपी गई है।

गठित की गई समिति
एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन जोन वन अशफाक अहमद की अध्यक्षता में मैनुअल तैयार करने के लिए समिति गठित की गई है। इसकी कानपुर में पहली बैठक हो चुकी है। समिति तय करेगी कि इन कार्यों के लिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की क्या जिम्मेदारी होगी। कर निर्धारण और उसके बाद उसका संग्रह, वसूली और जरूरत पडऩे पर नीलामी की प्रक्रिया कानपुर में तय की जाएगी। इससे पहले संग्रह मैनुअल 1976 में बिक्री कर के दौरान तैयार किया गया था। अब 44 वर्ष बाद संग्रह मैनुअल बन रहा है।

फिर से तय होगी जिम्मेदारी
जीएसटी के तहत एक्ट तो बनाया गया है, लेकिन किस अधिकारी और कर्मचारी को कर निर्धारण, संग्रह, वसूली और नीलामी के दौरान अपने पद के हिसाब से क्या कार्य करने हैं, यह राज्य कर विभाग में 44 वर्ष पुराने मैनुअल से तय हो रहा है। हालांकि नियम व पद नाम में बहुत परिवर्तन हो चुका है। अब जीएसटी में संग्रह मैनुअल तैयार करने की शुरुआत कर दी गई है। प्रदेश में किस तरह से अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होंगी, इसके लिए एडीशनल कमिश्नर की समिति में चार सदस्य भी हैं।

समिति में कानपुर के तीन सदस्य
कानपुर में हुई पहली बैठक में अधिकारियों ने इस मैनुअल को बनाने पर चर्चा की। इसमें साफ किया गया कि जो कारोबारी वैट से माइग्रेट कर जीएसटी में आए हैं, उनकी वैट, प्रवेश कर, केंद्रीय बिक्री कर की कोई देयता निकलती है तो उसकी वसूली की जाएगी। हर बिंदु पर मानीटरिंग कौन करेगा, इसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। समिति में कानपुर से संयुक्त आयुक्त केएम मिश्रा, उपायुक्त हरि मिश्रा, डीपी सिंह को शामिल किया गया है। पूरी समिति में कानपुर से बाहर के सिर्फ एक सदस्य मुजफ्फरनगर के संयुक्त आयुक्त राकेश यादव हैं।

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आलोक पाण्डेय
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