दूसरे जिलों के मरीजों की भीड़ से हैलट के डॉक्टर हुए परेशान

सामान्य मरीज भी जिला अस्पताल छोड़ हैलट में बढ़ा रहे भीड़
चार साल में दो गुना हुई मरीजों की संख्या, ५० फीसदी बाहरी

कानपुर। सामान्य बीमारी जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी से लेकर डेंगू मलेरिया और पीलिया के रोगियों के लिए हर जिले के अस्पताल में सुविधाएं और दवाएं हैं, फिर भी वहां से मरीजों को हैलट रेफर कर दिया जाता है, जिससे हैलट की सेवाएं लडख़ड़ाने लगी हैं। हालत यह है कि डॉक्टरों के पास फुर्सत ही नहीं मिल रही है। यहां संसाधन भी कम पडऩे लगे हैं।

प्राइवेट अस्पतालों से भी आ रहे मरीज
पड़ोसी जिलों के प्राइवेट अस्पतालों से आने वाले मरीज बेहद गम्भीर हालत में आ रहे हैं। उन मरीजों को संभाल पाना मुश्किल हो रहा है। हैलट के अधिकारियों के मुताबिक बीते पांच वर्षों में आस-पास जिलों से आने वाले मरीजों की संख्या में तीन गुना इजाफा हो रहा है। भर्ती मरीजों में 60 फीसदी से अधिक मरीज बाहरी जिलों के हैं। इनमें प्रदेश के पूर्वी जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज आ रहे।

सामान्य मरीज भी आ रहे
डॉक्टरों का कहना है कि जटिल बीमारियों के मरीज आएं तो कोई बात नहीं है। गम्भीर मरीजों के लिए इलाज की सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं हैं। मगर सामान्य मरीजों से अनावश्यक भीड़ हो रही। ऐसी बीमारियों से पीडि़त मरीजों को भर्ती करना पड़ता है जिनका इलाज जिला अस्पताल में भी संभव है। डेंगू, मलेरिया, पीलिया और हार्निया जैसे ऑपरेशन के लिए भी जिला अस्पतालों से रेफर किया जा रहा है।

एंबुलेंस सेवाओं से बढ़ी भीड़
वर्ष 2014 में एम्बुलेंस सेवाएं शुरू होने से भीड़ बढ़ गई। शहर से ही हर महीने 1100 से अधिक मरीज हैलट इमरजेंसी में भर्ती कराए जा रहे हैं। कन्नौज, फतेहपुर, फर्रुखाबाद, उन्नाव, जालौन से भी एम्बुलेंस से मरीज आ रहे हैं। अस्पताल के एक वरिष्ठ प्रोफेसर का कहना है कि बर्न मरीजों, बच्चों को भर्ती करके इलाज करने की व्यवस्था, आईसीयू और डयलिसिस की सुविधा किसी सरकारी जिला अस्पताल में नहीं है।

ट्रामा के बेतहाशा मरीज बढ़े
सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे ट्रामा मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है। न्यूरोसर्जरी, आर्थोपेडिक सर्जरी और सर्जरी विभाग में ऐसे मरीजों से वार्ड फुल रहते हैं। पड़ोसी जिलों के अधिकतर घायल हैलट ही पहुंच रहे। और किसी सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं है। हैलट के प्रमुख अधीक्षक प्रो. आर के मौर्या का कहना है कि मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशियलिटी रेफरल सेंटर है। बाहरी जिलों से आने वाले मरीज अगर सामान्य भी हैं तो उन्हें भर्ती करना पड़ता है क्योंकि उनके पास कोई दूसरा उपाय नहीं होता। घायलों से इमरजेंसी फुल रहती है।

आलोक पाण्डेय
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