मुख्यमंत्री जी डॉक्टर्स की देखें करतूत, हैलट के बाहर दर्द से कराह रहा गरीब

Vinod Nigam | Publish: Sep, 08 2018 02:16:12 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

चार दिन से वार्ड के बाहर दर्द से कराह रहा मरीज, धरती के भगवानों का नहीं पसीजा दिल

कानपुर। उत्तर प्रदेश के सीएम की कुर्सी पर बैठने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कई एतिहासिक फैसले लिए और उनकों अमल में लाने के लिए अलाधिकारियों को आदेश दिए। शुरूआत के तीन माह तक प्रदेश के अधिकारी, कर्मचारी व डॉक्टर्स आजपब्लिक की समस्याओं को सुना और निराकरण किया। लेकिन चौथा माह आते ही वो पूराने ढर्रे पर लौट गए। सरकारी दिवारों में पान की छीटे फिर से दिखले लगे तो डॉक्टर्स भी अस्पतालों के बजाए अपने घरों में मरीजों को देखने लगे। कुछ ऐसा ही एक मामला हैलट अस्पताल में सामने आया। यहां एक गरीब जो मानसिक रोग से ग्रसित है, उसका इलाज करने के बजाए डॉक्टर्स ने पीट कर वार्ड के बाहर फिंकवा दिया। पिछले चार दिनों से गरीब वार्ड के बाहर दर्द से कराह रहा है और आने-जाने वाले से दवा कराए जाने की फरियाद कर रहा है, पर कोई भी व्यक्ति आगे नहीं आया।

लोगों ने कराया था भर्ती
पांच दिन पहले एक लावारिस इंसान को लोगों ने इलाज के लिए हैलट अस्पताल लेकर आए। पहले डॉक्टर्स ने उसे एडमिट करने से इंकार कर दिया। लोगों ने विरोध करने के साथ डीएम से शिकायत की धमकी दी तो डॉक्टर्स उसे वार्ड संख्या चार में एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। लोगों के जाने के बाद उसी रात को डॉक्टर्स ने वार्ड ब्वाय के जरिए गरीब को वार्ड से बाहर फिंकवा दिया। चार दिनों से गरीब दर्द से करार रहा है और हर जाने-जाने वाले से इलाज के लिए फरियाद कर रहा है। हैलट के बाहर दुकान चलाने वाले राजीव बताते हैं कि शुक्रवार को हमने जुनियर डॉक्टर्स से गरीब के बारे में बताया और इलाज किए जाने की मांग की, पर उन्होंने हमें डांट डपक कर भगा दिया।

लावारिस है पीड़ित
पीड़ित लावारिस है और उसे पांच दिन पहले पकनी मंदिर परिसर से लोग लेकर हैलट आए थे। राजीव बताते हैं कि बीमार व्यक्ति अपना नाव कल्लू बताता है और वो फीवर से ग्रसित है। अगर उसका इलाज नहीं हुआ तो उसकी जान जा सकती है। राजीव बताते हैं कि हैलट में इलाज के लिए आने वाले लोग उसे खाने के लिए कुछ दे देते हैं, जिसके कारण उसकी सासें चल रही हैं। राजीव ने बताया कि मरीज की हालत दिन प्रतिदिन गम्भीर होती जा रही है लेकिन अस्पताल कर्मियों की लापरवाही जारी है। बदबू और गंदगी के बीच फर्श पर पड़ा मरीज अस्पताल में मरीजों के साथ होने वाली दुर्दशा की कहानी बयां करने के लिए काफी है लेकिन मानवीय संवेदना को तार तार करने वाले अस्पताल के डॉक्टर्स व कर्मी अपने रवैये से बाज नही आ रहे है।

बेपटरी हुई जन आयोग्य योजना
प्रधानमंत्री जन आयोग्य योजना को उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर से शुरू कर दिया गया है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कुछ दिन पहले यह जानकारी देते हुए बताया था कि योजना के लागू होने से प्रदेश के लगभग 1.18 करोड परिवारों को सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों में भर्ती होकर 5 लाख रुपये तक की सेकेंडरी और र्टिशयरी जैसे हृदयाघात और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज की सुविधा का लाभ मिलेगा। मंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत कुल 1350 बीमारियों के इलाज को शामिल किया गया है । पूर्व से चली आ रही बीमारियों का भी उपचार इसमें सम्मिलित होगा। सिंह ने बताया कि इलाज के दौरान दवा, जांच मसलन एक्सरे, अल्ट्रासाउण्ड, एमआरआई आदि मुफ्त किया जाएगा। मंत्री के आदेश के बाद भी हैलट में इस योजना का पालन नहीं किया जा रहा है। लोगों ने बताया कि निशुल्क इलाज तो दूर की बात, यहां के डॉक्टर्स मरीजों को एडमिट करने से कतराते हैं।

क्या बोले जिम्मेदार
मामले पर जब सीएमएस आरसी गुप्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि मेरी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं हैं। यहां लावारिसों का इलाज किया जाता है। बावजूद आपने बताया है तो मैं इसकी जांच करवाता हूं। वहीं भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने इस प्रकरण पर अफसोस जताते हुए कहा कि हैलट और उर्सला कानपुर के बड़े अस्पताल हैं। यहां सैकड़ों मरीजों का इलाज किया जाता है। पर पिछले कुछ सालों से यहां के डॉम्टर्स गैरजिम्मेदार हो गए हैं। इस मामले की जानकारी मैं खुद प्रिंसिपल से लूंगा और सीएम योगी आदित्यनाथ व स्वास्थ मंत्री सिद्धार्थ सिंह से मिलकर शिकायत करूंगा।

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