कानपुर से लखनऊ के बीच ५० की जगह १६० किमी की रफ्तार में दौड़ेंगी ट्रेनें

हाईस्पीड ट्रैक तैयार करने को 1300 करोड़ का बना इस्टीमेट
फिजिबिलिटी जांच पूरी, जुलाई से काम शुरू करने की तैयारी

कानपुर। शहर से लखनऊ तक की रेलयात्रा करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब यह दूरी कम समय में तय होगी। रेल मंत्रालय के एक्शन प्लान-100 में लखनऊ से कानपुर के बीच हाईस्पीड ट्रैक बिछाने का जो प्रस्ताव बनाया था उसकी फिजिबिलिटी जांच पूरी हो गई है और अगले साल जुलाई से इसका काम शुरू करने की तैयारी है। यह काम पूरा होने से कानपुर-लखनऊ रूट पर ट्रेनों का आवागमन भी समय से हो सकेगा।

बेहद खस्ताहाल है ट्रैक
लखनऊ से कानपुर रूट की हालत काफी खराब है। इस रूट मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर और मेमू को मिलाकर 92 ट्रेनें दौड़ती हैं। लखनऊ कानपुर के बीच सुपरफास्ट ट्रेनों की औसत गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा ही है। सबसे कम 1:10 घंटा तेजस और 1:13 घंटा शताब्दी एक्सप्रेस ही लेती है। इसी साल अगस्त में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने एक्शन प्लान-100 बनाया था, जिसके तहत दिल्ली-हावड़ा सहित देश के चुनिंदा रूटों को 160 किमी प्रति घंटे की ट्रेनों की स्पीड के लिए हाईस्पीड ट्रैक बनाने का प्रावधान किया गया। सीआरबी ने कानपुर से लखनऊ का हिस्सा भी एक्शन प्लान में शामिल किया। जिससे भविष्य में लखनऊ से दिल्ली तक 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेनें दौड़ सकें।

हावड़ा नेटवर्क से जुड़ेगा रूट
रेलवे ने कानपुर-लखनऊ रूट को दिल्ली से हावड़ा तक हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोडऩे की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत लखनऊ से कानपुर तक की 74 किमी. के हाईस्पीड ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग की जाएगी। सभी रेलवे क्रासिंग बंद होंगे। इसकी जगह 40 पुल बनाए जाएंगे, जिसमें करीब 27 सीमित ऊंचाई वाले अंडरपास होंगे। लखनऊ डीआरएम संजय त्रिपाठी के मुताबिक हाईस्पीड ट्रैक बनाने की प्रारंभिक रिपोर्ट के साथ इस्टीमेट रेल मंत्रालय को भेज दिया है। बजट आवंटन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से इस काम को पूरा किया जाएगा।

१३०० करोड़ होंगे खर्च
हाई स्पीड ट्रैक तैयार करने पर कुल 1300 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेल मंत्रलय के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को बजट आवंटन का 1300 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक फरवरी में पेश होने वाले आम बजट के दौरान ङ्क्षपक बुक में इस प्रोजेक्ट को शामिल किया जा सकता है। पहले चरण का करीब 300 करोड़ रुपये रेलवे देगा। रेलवे करीब 350 करोड़ रुपये अंडरपास व ओवरब्रिज बनाने पर खर्च करेगा, जबकि शेष एक हजार करोड़ से एडवांस सिग्नल सिस्टम लगेंगे।

आलोक पाण्डेय
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