रात बारह बजे चौक में कांग्रेसियों ने फहराया तिरंगा, मां भारती के जयकारे से गूंज उठा पूरा इलाका

Vinod Nigam | Publish: Aug, 15 2018 07:41:26 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India


सबसे पहले कानपुर में फहराया गया था तिरंगा, देररात कांग्रेस नगर अध्यक्ष ने ध्वाजारोहड कर रातभर चला कवि सम्मेलन

कानपुर। आज से 71 साल पहले अंग्रेजों से देश को आजादी मिली थी। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू लालकिले से झंडा रोहण कर देश की जनता को संदेश देने के लिए पूरी रात जगे थे, लेकिन क्रांतिकारियों के गढ़ कानपुर के मेस्टन रोड पर 15 अगस्त की रात 12 बजे यहां पर झंडारोहण कर दिया किया और तब से चली आ रही परम्परा आज भी कायम है। कांग्रेस के सैकडों कार्यकर्ता मेस्टन रोड में जुटे और नगर अध्यक्ष हरिप्रकाश अग्निहोत्री ने झंडारोहण कर तिरंगे को सलामी। रात में ही भारत माता के जयकारों से पूरा इलाका सराबोर हो गया।

इस लिए फहरा दिया तिरंगा
आजादी से पूर्व कानपुर ही संयुक्त प्रान्त का ऐसा शहर था जहां पर क्रांतिकारी व नेता अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रणनीति बनाते थे। आजादी के बाद भी कानपुर देश में अपनी अलग छाप छोड़ने में सफल रहा। इतिहासकार मनोज कपूर बताते हैं कि चूंकि 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वाधीनता दिवस होता है इसलिए तय यह हुआ था कि हिन्दुस्तान का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाएगा। तब वर्तमान मे जो राष्ट्रपति भवन है तब उसे वायसराय पैलेस कहा जाता था, वहां रात बारह बजे नामित प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू झंडा फहराएंगे। इधर कानपुर में लोगों में जोश था। जबर्दस्त तैयारियां थी पर 14 अगस्त का दिन रोडा बन रहा था। बाद में स्थानीय नेताओं ने तय किया कि वे भी नेहरू जी के साथ रात बारह बजे झंडा फहराएंगे। इस तरह कानपुर देश का पहला शहर बना जिसने सबसे पहले आजादी का जश्न मनाया। उन्होंने बताया कि आजादी का जश्न मनाने के लिए चांदी के तोरणद्वार बनाए गए थे और जेवरातों से उसकी लड़ियां बनाई गई थी।

गोलियों के बीच झंडारोहण
बुजुर्ग कांग्रेसी हरिशरण श्रीवास्तव ने बताया कि उस दिन का ध्यान करें तो सब कुछ एक सिनेमा के सीन की तरह आंखो के सांमने से गुजर जाता है। उस समय मैं पंदह साल का था अपने पिताजी के साथ वह सारा मंजर देखा था। बताया कि मेस्टन रोड के बीच वाला मंदिर के गुम्बद के ऊपर उस दिन झंडा फहराया गया था। अब तो नीचे चौराहे पर झंडा रोहण किया जाता है। तब के शहर अध्यक्ष बाबू शिवनारायण टंडन ने झंडा रोहण किया था। ठीक रात के बारह बजे गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच बेखौफ तिरंगा फहराया गया था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता तब के चैक वार्ड अध्यक्ष काशीनाथ गुप्ता ने की थी। कार्यक्रम में डॉ जवाहरलाल रोहतगी, हमीद खां, प्यारे लाल अग्रवाल, नारायण प्रसाद अरोडा, तारा अग्रवाल, देवीसहाय बाजपेयी समेत सैकडों की तादात में कनपुरिये एकत्र थे। श्रीवास्तव ने बताया कि झण्डारोहण के बाद रात भर मेस्टन रोड पर कवि सम्मेलन चला था। जिसके बाद प्रभात फेरियां निकलनी शुरू हो गई। उस रात कानपुर में कोई नहीं सोया था। उन्होंने बताया कि तब कानपुर की कुल आबादी चार लाख की थी

आजादी बलिदान से मिली
मेस्टन रोड पर रात बारह बजे नगर अध्यक्ष हरिप्रकाश अग्निहोत्री के तिरंगा फहराए जाने के बद गीत संगीत के बीच कवियों ने आजादी से ओतप्रोत कविताओं को पढ़कर उपस्थित लोगों के जोश को दूना कर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि आजादी बहुत बलिदानों के बाद मिली थी। प्रत्येक व्यक्ति को इसका मूल्य समझना होगा। पूर्व मंत्री ने बताया कि उनकी उम्र उस वक्त दो य तीन साल की थी। जब पिता जी हमें गोद में लेकर मेस्टन रोड पहुंचे। यहां कांग्रेसियों ने तिरंगा फहराया। इसके बाद लगातार यह परम्परा चली आ रही है। जब हम कांग्रेस के नगर अध्यक्ष बनें तो झंडारोहण का हमें भी मौका मिला। पूर्व मंत्री ने कहा हजारों माताओं ने अपने बेटों को आजादी दिलाने के लिए हंसते-हंसते कुर्बान कर दिया। इसे हम सबको बनाए रखना है।

नहीं सोया था कानपुर
आजादी के दौरान शहर का दायरा चुन्नीगंज से कैंट तक सीमित था। आबादी भी करीब चार लाख थी। कांग्रेस के बड़े नेताओं और व्यापारियों ने एक दिन पहले जश्न मनाने का फैसला लिया था। तिरंगा फहराने के लिए मेस्टन रोड मंदिर को चुना गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकरदत्त मिश्र बताते हैं कि तब उनकी उम्र महज 13 वर्ष थी। उस जश्न की यादें आज भी उनके दिल में जिंदा हैं। उस वक्त बिजली नहीं थी लेकिन रोशनी की कोई कमी नहीं थी। रात 12 बजे शहर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष शिवनारायण टंडन ने झंडारोहण किया। इसके बाद तिरंगे को सलामी देने के लिए क्रांतिकारियों की बंदूके गरज उठीं। वह बताते हैं कि उस जैसा दूसरा जश्न आज तक नहीं देखा। इस कार्यक्रम का आयोजन चौक सर्राफा वार्ड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष काशी नारायण गुप्त ने किया था।

मुख्यमंत्री भी हुए थे शामिल
शंकरदत्त मिश्र बताते कि 15 अगस्त 1947 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिस रूट से जुलूस निकाला था, आज भी वह क्रम जारी है। जुलूस फूलबाग में सभा में बदल जाता है। सभा को संबोधित करने के लिए मनोनीत मुख्यमंत्री पं. गोविंद वल्लभ पंत आए थे। जनसभा में मुख्यमंत्रियों के आने का क्रम 1967 में टूटा जब तत्कालीन मुख्यमंत्री चरन सिंह नहीं आ पाए। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद, एनडी तिवारी, सीबी गुप्ता, वीपी सिंह, श्रीपति मिश्र शामिल हुए। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री बताते हैं, प्रदेश में गैर कांग्रेसी सरकार आने के बाद प्रदेश अध्यक्षों के आने का क्रम आज भी जारी है।

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