आदर्श शिक्षक के रूप में बने हैं लोगों के लिए नजीर, करतें है आज भी इतने बड़े बड़े काम, जानकर रह जाएंगे हैरान

Arvind Kumar Verma | Publish: Sep, 04 2018 05:18:47 PM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 12:45:33 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

जिले में परिषदीय विध्यालय में तैनात शिक्षक नवीन दीक्षित शिक्षक के साथ पर्यावरण मित्र की भूमिका निभा रहे हैं, जिनके द्वारा पर्यावरन के लिये कई सराहनीय कार्य करने पर कई सम्मानों सेसम्मानित किये गये।

कानपुर देहात-अगर आदर्श शिक्षकों की बात की जाए तो कानपुर देहात में एक ऐसे आदर्श शिक्षक हैं, जो आज लोगों के लिए नजीर बने हैं। मई 2003 में परिषदीय विद्यालय में शिक्षक पद पर तैनात हुए शिक्षक नवीन दीक्षित को आज कई प्रदेशों में लोग पर्यावरण मित्र के रूप में जानते हैं। पर्यावरण मित्र से विख्यात हुए नवीन जी की बड़ी रोचक दास्तान है। दरअसल जहां आज लोग जीवनदायी पर्यावरण को धीरे धीरे भूलते जा रहे हैं। वहीं वे स्कूल में बच्चों को शिक्षण कार्य देने के बाद समूचे दिन पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए नए नए तरीके अपनाते हैं और उसे उपयोग करते हैं। यहां तक कि पर्यावरण के लिए कानपुर देहात सहित महाराष्ट्र में भी रैलियां निकालकर लोगों को जागरूक किया। आज भी स्कूल के बाद इस कार्य में मशगूल होकर दोहरी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। शिक्षक के रूप में आज नवीन जी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

 

संघर्षों में किये उन्होंने ये काम

नवीन जी अपने बेटे व बेटी को ही इसी कार्य की प्रेरणा देते हुये उन्हे सेवा के लिये प्रेरित करते है। साल 2000 में बीटीसी करने के बाद 5 मई 2003 को वह सरकारी शिक्षक के रूप मे नियुक्त हुये। फिर तो पैसे आने का रास्ता बनने पर उन्होंने पर्यावरण को साफ स्वच्छ रखने का प्रण कर लिया। उन्होंने बताया कि झींझक ब्लाक के कुंतलिया स्कूल मे शिक्षक उन्हे छोटी-छोटी क्यारियों मे पौधारोपण करना सिखाते थे। वहीं घर मे मां केला, आम, बरगद, कचनार, अंजीर आदि के पौधे मुझसे मंगाकर लगवाती थी। मां की वह प्रेरणा उनका लक्ष्य बन गया और मां उनकी मार्गदर्शक। फिर 1996 मे कैंसर की बीमारी मां का देहांत हो गया। जिसके बाद उन्होने उनके सपने को अपना उद्देश्य बना लिया। इसके बाद अपनी पॉकेट मनी से कुछ पैसे बचाकर पौधे खरीदना और अपने घर के आस-पास पौधे लगाना उनके स्वभाव मे शामिल हो गया। आज मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित महाराष्ट्र आदि में कई गणमान्यों से पुरस्कार पाने के बाद कई प्रदेश के लोग इस पर्यावरण मित्र का लोहा मानता है।

 

इन सेवाओं से मिलता है जीने का लक्ष्य

शिक्षक बनने के बाद वह स्कूल मे बच्चो को पौधे के लिये गड्ढे खोदना, बरसात मे बीज बांटना फिर बच्चो के घर जाकर गड्ढे की नाप व पौधे लगाना सिखाना, सुरक्षा हेतु बाढ लगाना आदि सिखाने लगे। गर्मियों मे अपने बेटे व बेटी के साथ रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर यात्रियों को पानी पिलाकर बच्चो को सेवा भाव सिखाने लगे। सर्दी में नंगे पांव दिखने वाले गरीब बच्चो को वेतन से मिलने वाले पैसे से उन्हे चप्पले खरीदकर देते है। स्कूल के अतिरिक्त छुट्टी के दिन किसी भी गांव को चिन्हित कर उसमे सफाई गोष्ठी कर उन्हे जानकारी देते है। पशु पक्षियों की सेवा करना वे अपना धर्म मानते हैं। ये सभी कार्य उनकी दिनचर्या में सम्मिलित है।

 

डा. अब्दुल कलाम की प्रेरणा से आया नया मोड़

पर्यावरण ब्रांड अम्बेसडर की दौड मे खडे हुये डॉ. अब्दुल कलाम व अमिताभ बच्चन में डा अब्दुल कलाम को चुना गया था। जिसके बाद उनके सौभाग्य से पर्यावरण मित्र विद्यालयों का चयन हुआ था। उसी दौरान शिक्षक के रूप मे सिठमरा विद्यालय मे तैनाती मिलने के बाद विद्यालय मे 133 बच्चो के रूप मे अनुसूचित व मुस्लिम बालिकाओं की संख्या मानक के अनुरूप सही पाये जाने पर पर्यावरण मित्र के रूप मे उनका चयन किया गया। तब उनको जल, ऊर्जा, हरियाली, अपशिष्ट प्रबंधन व जैव विविधता पर काम करने का निर्देश मिला। जिसके बाद वह सप्ताह मे दो दिन अपने स्कूल के पहले या बाद मे जाकर प्रार्थना के समय पर्यावरण की जानकारी देने लगे।

 

इन सम्मानों से नवाजे गए ये शिक्षक

अपने कार्याे के प्रति सजग व तल्लीन रहने वाले नवीन दीक्षित को पहला पुरस्कार कानपुर देहात के जिलाधिकारी विजयेंद्र पांडियन ने प्रशस्ति पत्र के रूप मे दिया था। जिस पर नवीन दीक्षित ने जिलाधिकारी महोदय को अंजीर का पौधा भेंट किया। इसके बाद करीब 4 माह पूर्व मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामनरेश जी ने शिक्षक रत्न पुरस्कार से उन्हे नवाजा। 10 माह पहले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक जी ने पर्यावरण संरक्षक के रूप मे उन्हे पुरस्कार से सम्मानित किया था। फिर आईजी जकी अहमद, पुलिस अधीक्षक कानपुर देहात पुष्पांजलि माथुर व अपर पुलिस अधीक्षक ऋषिपाल यादव जी ने उन्हे सम्मानित कर उनका हौंसला बढाया। 2017 में लखनऊ मे राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन बनाया गया। रिसोर्स परसन का प्रमाण पत्र बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. दिनेश शर्मा ने उन्हे देकर जिम्मेदारी सौंपी। आज वो अपनी हर कामयाबी को मां का आशीर्वाद मानते हैं।

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