चश्मा पहचानेगा चेहरा और याद रखेगा नाम, आएगा दृष्टिहीनों के काम

दस्ताने खुद देख लेंगे जरूरी चीजें और फिर करेंगे अपना काम
आईआईटी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक से किया तैयार

कानपुर। अब नेत्रहीनों का जीवन और भी आसान होगा। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने उनके लिए ऐसा चश्मा और दस्ताने तैयार किए हैं जो उनकी दिनचर्या को बेहतर बना देंगे और अंधता उनके जीवन में अब रोड़ा नहीं बनेगी। नेत्रहीनों की अंधकारमय दुनिया में आईआईटी का चश्मा व ग्लव्स नई रोशनी भरेगा। इस चश्मे व ग्लव्स के प्रयोग से नेत्रहीन को आसपास रखने सामान और लोगों के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। इस चश्मा व ग्लव्स को आईआईटी के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग के जरिए तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों की टीम ने 31 दिसंबर 2019 को पेटेंट करा लिया है। जल्द यह चश्मा व ग्लव्स नेत्रहीनों के लिए बाजार में भी उपलब्ध होगा।

चेहरा और नाम याद रखेगा चश्मा
यह चश्मा ऐसा है कि इसके सामने अगर एक बार कोई व्यक्ति आकर अपना नाम बता देता है तो उसका चेहरा और नाम सेव हो जाएगा और वह दोबारा कभी भी सामने आएगा, नेत्रहीन को पता चल जाएगा। इतना ही नहीं अगर वह व्यक्ति दाढ़ी बढ़ाकर आए या बाल लंबे करके, फिर भी चश्मा उसे पहचानने में भूल नहीं करेगा और सही नाम ही बताएगा।

हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल
चश्मा वर्चुअल फोटोग्राफ बनाता है और ग्लव्स वाइब्रेशन और सेंसर के जरिए जानकारी देता है। चश्मे में मेमोरी भी लगी है, जो हर चेहरे का अपने डाटा में सुरक्षित रखे रहता है। आईआईटी कानपुर के डॉ. सिद्धार्थ पण्डा व विश्वराज श्रीवास्तव ने लंबे शोध के बाद अत्याधुनिक चश्मा व ग्लव्स बनाया है। डॉ. पण्डा के अनुसार नेत्रहीन सहारा लेकर चलते हैं तो उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जैसे ट्रेन में नेत्रहीन की सीट तो रिजर्व होती है लेकिन वह कैसे पहचाने कि बर्थ कहां है? सामने से कौन आ रहा है? ऐसी कई परेशानियों से उन्हें रूबरू होना पड़ता है। इन सभी का इलाज ये ग्लव्स व चश्मा हैं।

Show More
आलोक पाण्डेय
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned