फसल खुद बताएगी उसे सिंंचाई की जरूरत है या नहीं, आईआईटी की नई तकनीक

तापमान के आधार पर पता चलेगा सिंचाई का सही समय
बेमतलब सिंचाई की नहीं जरूरत, पानी की होगी बचत

कानपुर। जिस तरह प्यास लगने पर इंसान को पानी की जरूरत होती है, वही हाल फसलों का होता है। बिना मतलब पानी पीना किसी काम का नहीं। इसी तरह बिना जरूरत सिंचाई के पानी की बर्बादी होती है और फसल का विकास भी अवरुद्ध होता है। मगर किसानों को यह नहीं पता होता कि सिंचाई का सही समय क्या है, मगर आईआईटी ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है कि जिससे फसल खुद पानी मांगेगी और तभी आपको सिंचाई का समय पता चलेगा।

तापमान के आधार पर तय होता समय
आईआईटी के अर्थ साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. राजीव सिन्हा के मुताबिक खेतों में पानी की जरूरत फसल के तापमान के आधार पर तय होती है। तापमान दो तरह का माना जाता है, पहला हवा का और दूसरा फसल का। अगर फसल में आद्र्रता अधिक है तो उसे उस समय पानी की जरूरत नहीं होती है। पर किसानों को इसकी जानकारी नहीं होती और वे एक निश्चित अंतराल के बीच फसल की जरूरत जाने बिना ही सिंचाई करते हैं।

ज्यादा सिंचाई से होता नुकसान
वैज्ञानिकों के मुताबिक देश में ८० फीसदी पानी का उपयोग फसल की सिंचाई पर किया जाता है, जबकि इतनी ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं है। ऐसे में अगर किसान सिंचाई करता रहेगा तो उससे फसल की पैदावार कम होती है। इसके अलावा मिट्टी में भी जरूरत से ज्यादा नमी हो जाती है।

एक साल तक चला शोध
फसलों पर होने वाली ओवर सिंचाई और पानी की बर्बादी को रोकने के लिए यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ लिसेस्टर के वैज्ञानिकों के साथ करीब एक साल पहले शोध शुरू किया गया। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने मिट्टी का तापमान, आर्द्रता समेत जरूरी जानकारियां जुटाईं। यूके के वैज्ञानिकों ने स्पेस टेक्नोलॉजी के जरिए डाटा जुटाया। इस डाटा से एक मैप बनाया गया। इसके अनुसार खेती करने से पानी की ज्यादा बचत होगी।

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आलोक पाण्डेय Desk/Reporting
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