पानी से भी ब्लास्ट कर बड़ी तबाही मचा सकते हैं हैकर

पानी से भी ब्लास्ट कर बड़ी तबाही मचा सकते हैं हैकर

Alok Pandey | Publish: Apr, 17 2019 12:46:13 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 12:46:14 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

साइबर अटैक से बचने के लिए कंट्रोलिंग सिस्टम को सेफ कर रहे आईआईटी के वैज्ञानिक,
न्यूक्लियर प्लांट, पॉवर प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को खतरा, सुधारी जा रही कमियां

कानपुर। जी हां, साइबर अटैक का खतरा ऐसा है कि हैकर अगर कामयाब रहे तो पानी से भी विस्फोट कर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा न्यूक्लियर प्लांट और पॉवर प्लांट के हैक होने से भयंकर तबाही मचाई जा सकती है। इससे बचने के लिए आईआईटी के वैज्ञानिक कंट्रोलिंग सिस्टम को इस तरह सेफ करने में जुटे हैं, ताकि किसी भी कंप्यूटराइज्ड प्लांट को हैक न किया जा सके।

साइबर अटैक का खतरा
दुश्मन देश अब सीधा हमला न कर साइबर अटैक कर सकते हैं। इसके लिए उनके निशाने पर देश के कंप्यूटराइज्ड प्लांट हैं। जिनमें सबसे खतरनाक है न्यूक्लियर प्लांट। अगर इसे हैक कर लिया गया तो उसका संचालन दूसरे के हाथ में चला जाएगा और दुश्मन कहीं से भी बैठकर परमाणु विस्फोट कर नागासाकी और हिरोशिमा जैसी तबाही मचा सकते हैं।

पॉवर और वाटर प्लांट भी असुरक्षित
पॉवर प्लांट को हैक कर दुश्मन देश की सारी मशीनरी को ठप कर बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, इससे लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित होगी। यूक्रेन में जून २०१७ में इसी तरह का साइबर हमला हुआ था। जबकि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को हैक कर दुश्मन पानी को शुद्ध बनाने वाले केमिकल को कम या ज्यादा कर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है, इसके अलावा पानी सप्लाई रोककर बड़ा ब्लास्ट भी कर सकते हैं।

कंट्रोलिंग सिस्टम की कमियां तलाश रहे
आईआईटी के वैज्ञानिक संस्थान में बनी अत्याधुनिक सीथ्रीआई लैब में यह तरीका खोज रहे हैं कि कैसे कंट्रोलिंग सिस्टम को इतना मजबूत किया जाए कि कोई हैकर उसे तोड़ न सके। इसके अलावा इसकी कमियों को भी तलाश कर उनमें सुधार किया जा रहा है। जहां-जहां चूक मिल रही है उन प्लांट पर कमियां दुरुस्त कराई जा चुकी हैं। आईआईटी के कम्प्यूटर साइंस विभाग के हेड डॉ. संदीप शुक्ला ने बताया कि सभी प्लांट्स में प्रयोग होने वाली मशीनरी दूसरे देशों से आ रही है, इसलिए साइबर अटैक का खतरा ज्यादा है। हम इसकी सुरक्षा मजबूत कर रहे हैं।

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