फफकती आंखों से भाई का दर्द फूट पड़ा, युवाओं से नही रहा गया, तो फिर तिरंगा लेकर

जब गहरी नींद ने सोए बेटे का शव सामने आया तो पिता का धैर्य जवाब दे गया और वे फूट फूटकर रोने लगे।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 19 May 2019, 05:43 PM IST

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर देहात-अपने लाल को देखने की ललक सभी जेहन में थी लेकिन आतंकियों के प्रति आक्रोश भी भड़क रहा था। हांथो में तिरंगा लेकर रास्ते मे पार्थिव शव का इंतजार कर रहे युवा पाकिस्तान मुर्दाबाद एवं शहीद रोहित यादव अमर रहे से समूचा डेरापुर गूंज रहा था। दो दिनों से अपने धैर्य को नियंत्रित कर पिता गंगा सिंह लोगों से बेटे की शौर्य को बयां कर रहे थे लेकिन जब गहरी नींद ने सोए बेटे का शव सामने आया तो उनका धैर्य जवाब दे गया और वे फूट फूटकर रोने लगे। उधर छोटा भाई सुमित नगर में उमड़ा जनसैलाब देख रहा था। दरअसल रोहित सुमित को बहुत प्यार करता था। माता पिता की देखभाल के लिए उसके कंधों पर जिम्मेदारी दे रखी थी। जब भी रोहित फोन करते थे तो छोटे भाई सुमित से पिता और माँ के हालचाल पूंछते हुए उनका ख्याल रखने की बात कहते थे।

 

आज भाई का शव देख वह भावविभोर हो गया और कंधों पर सिर रखकर बिलख पड़ा। इधर अंतिम विदाई पर चिता को मुखाग्नि देने की बारी थी। सुमित का दर्द छलक उठा कि आखिर वह उस भाई को कैसे मुखाग्नि दी, जिस भाई के साथ खेलकूद कर इतना बड़ा हुआ। सुमित के ये बोल सुन लोगों की आंखे फिर डबडबा गईं। इसके बाद हिम्मत बांधकर मुखाग्नि देने के लिए चचेरे भाई यशवीर ने कलेजा मजबूत किया। सच तो ये है कि तीन माह ही गुजरे थे जब ऐसा ही जनसैलाब डेरापुर के रैगांव में उस समय उमड़ा था। जब सीआरपीएफ जवान श्यामबाबू की शहादत पर उनका पार्थिव शव गांव आया था। एक बार फिर देश के लाल की जान जाने के बाद लोग बोल उठे की आखिर कब तक इन शहीदों के मेले यहां लगते रहेंगे।

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