मुसीबत बनी वरदान: बेसहारा को खाना खिलाने वाले हाथों ने जीवन भर का दिया सहारा

खुद अपने हाथों से खाना बनाकर ले जाता था युवती को खिलाने
माता-पिता की मौत के बाद भाई-भाभी ने निकाल दिया था घर से

कानपुर। कोरोना काल में लॉकडाउन कई लोगों की जिंदगी बदल गया। किसी की नौकरी गई तो किसी का रोजगार ठप हुआ। कई मजदूरों पर तो ऐसा कहर टूटा की जिंदगी ही साथ छोड़ गई। जबकि ठीक इसके विपरीत एक युवती की जिंदगी भी लॉकडाउन ने संवार दी। लॉकडाउन में समाजसेवियों के दिए निवाले से पेट भरकर गुजारा करने वाली युवती को खाना खिलाने वाले हाथों ने ही जीवन भर का सहारा दे दिया। भिखारियों के बीच में बैठकर खाना मांगने वाली इस युवती को शायद पता भी नहीं था कि यह मुसीबत उसके लिए वरदान बनकर आयी है।

भाई-भाभी ने निकाल दिया था घर से
नीलम नाम की इस युवती पर लॉकडाउन से पहले ही मुसीबतों का पहाड़ टूट चुका था। उसके माता-पिता की मौत के बाद उसके भाई और भाभी उसे बोझ समझने लगे। ज्यादा दिन वे नीलम को बर्दाश्त नहीं कर पाए और लॉकडाउन में मुश्किल पड़ी तो घर से निकाल दिया। जिसके बाद नीलम समाजसेवियों के हाथों मिलने वाले खाने से गुजारा कर रही थी। बस यही वह समय था जब उसकी जिंदगी में बड़ा परिवर्तन आया।

खाना खिलाने वाले को आया प्यार
लॉकडाउन में बेसहारा गरीबों को खाना बांटने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और प्रॉपर्टी डीलर लालता प्रसाद के साथ उनका ड्राइवर अनिल भी हाथ बंटाता था। वह लंच पैकेट बंाटने के लिए साथ ही जाता था। इसी दौरान अनिल की नजर मेडिकल कॉलेज के पास भिखारियों के बीच में बैठी नीलम पर पड़ी। पहली ही नजर में अनिल को नीलम पसंद आ गई। फिर क्या था अनिल रोज वहीं पर भिखारियों में खाना बांटने जाने लगा, लेकिन उसकी नजर सिर्फ नीलम को ही ढूंढती थी। नीलम को अनिल दूसरों से ज्यादा खाना देता था और उससे बात भी करता था। देखते ही देखते दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला चल पड़ा।

मालिक ने दिया सहारा
अनिल अपने मालिक लालता प्रसाद से रोज मेडिकल कॉलेज के पास खाना बांटने की बात खुद कहता था। पहले तो लालता प्रसाद को सामान्य लगा, पर एक बार उन्होंने अनिल को नीलम से बात करते देखा तो मामला समझ में आ गया। उन्होंने अनिल से जब पूछा तो उसके मन की बात पता चली। इसके बाद लालता प्रसाद ने नीलम को दोनों टाइम खाना पहुंचाने के लिए कहा।

घर वालों ने बनाया मजाक
अनिल के घर में पूरा परिवार है। अनिल रोज रात अपने घर में नीलम के लिए खुद खाना बनाकर उसे पुल के नीचे देने जाता था। परिवार वालों को अनिल पर गुस्सा भी आया और उन्होंने कहा कि इतना ही रिश्ता है तो शादी करके ले आओ। अनिल को पहले यह मजाक लगा। फिर उसने मालिक से अपनी इच्छा जाहिर की। मालिक लालता ने अनिल के परिवार में बात कर उन लोगों को समझाया। उसके बाद अनिल के पिता ने नीलम से जाकर बात की और फिर दोनों की शादी करा दी गई। इस शादी से नीलम खुश है पर उसने शायद यह सपने में भी नहीं सोचा होगा कि लॉकडाउन की यह मुसीबत उसके लिए वरदान बन जाएगी।

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आलोक पाण्डेय Desk/Reporting
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