इस तरह कमलरानी ने गृहणी से राजनीति का तय किया सफर, बीजेपी पार्टी में रही अहम भूमिका

2017 में बीजेपी की पुना लहर आई और पार्टी से टिकट लेकर कमलरानी पहली बार घाटमपुर से विधायक बनीं।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 02 Aug 2020, 12:42 PM IST

कानपुर देहात-राजनैतिक क्षेत्र में अपनी अलग छाप बनाने वाली कमलरानी वरुण वर्तमान में घाटमपुर से बीजेपी विधायक थीं। यूपी सरकार ने उनको प्राविधिक शिक्षा मंत्री बनाया। विगत दिनों कोरोना चपेट में आने पर उनका इलाज लखनऊ के एसजीपीजीआई में चल रहा था। उनका जन्म 3 मई 1958 को लखनऊ में हुआ था। आरएसएस के स्वयंसेवक एवं एलआईसी के प्रशासनिक अधिकारी किशनलाल वरुण से उनकी शादी हुई थी। शादी होकर कानपुर पहुंची कमलरानी ने राजनैतिक क्षेत्र में पहला कदम रखा। यहां उन्होंने चुनाव के दौरान चुनाव बूथ पर पर्ची काटकर शुरुवात की। शिक्षा को लेकर उनके पति ने प्रोत्साहित किया तो उन्होंने परास्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद एक सेवा केंद्र में गरीब महिलाओं को सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण देने लगी। लोगों की सेवा करने में उनकी तन्मयता थी।

राजनैतिक सफर की शुरुवात उन्होंने भाजपा पार्टी से उस समय की थी। जब 1989 के चुनाव में भाजपा द्वारा कानपुर के द्वारिकापुरी से पार्षद का टिकट दिया गया था। चुनाव जीतने के बाद उनके उत्साह व कार्यों को लेकर वो दोबारा द्वारिकापुरी से चुनाव जीत लिया। उनकी इस शुरुवात ने उन्हें राजनीति में राह दिखा दी। जिस पर भाजपा हाईकमान ने 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें घाटमपुर सुरक्षित संसदीय सीट से टिकट देकर आजमाया। चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल कर सांसद बनीं। उनकी लोकप्रियता व लगन को देख यहां की जनता ने उन्हें दोबारा 1998 ताज पहनाया। मगर 1999 के लोकसभा चुनाव में बसपा से मैदान में आए प्यारेलाल संखवार ने उन्हें हरा दिया और 585 वोटों से जीत हासिल की।

कानपुर देहात में नवसृजित रसूलाबाद विधानसभा की सुरक्षित सीट पर 2012 में पार्टी ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन वह जीत नहीं सकी। घमासान हुए चुनाव में सपा के शिवकुमार बेरिया ने जीत दर्ज की थी। बीएसपी की निर्मला संखवार दूसरे एवं बीजेपी की कमल रानी तीसरे स्थान पर रही थीं। वहीं 2015 में पति की मृत्यु के बाद भी पार्टी के लिए अहम भूमिका रही। इसके बाद 2017 में बीजेपी की पुना लहर आई और पार्टी से टिकट लेकर कमलरानी पहली बार घाटमपुर से विधायक बनीं। वहीं पार्टी के लिए तत्परता के चलते यूपी सरकार ने प्राविधिक शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी।

Arvind Kumar Verma
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