कमाई के लालच में आयुष्मान रोगियों को भी नहीं छोड़ते डॉक्टर

सर्जिकल सामान खरीदने में खर्च हुए २० हजार
शिकायत मिलने पर शासन ने शुरू कराई जांच

कानपुर। आयुष्मान रोगी को बाहर से दवा मंगाने पर मजबूर किए जाने का मामला शासन तक पहुंच गया। जिसके बाद शासन ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए इसकी जांच शुरू करा दी है। जांच शुरू होने पर इस तरह के कई और मामले सामने आ रहे हैं। जिसके चलते कई डॉक्टरों पर कार्रवाई की तलावार लटक रही है। हालांकि अस्पताल प्रशासन इस मामले को सिरे से नकार रहा है।

२० हजार का सर्जिकल सामान मंगाया
आयुष्मान कार्ड धारक वेदप्रकाश का हैलट में इलाज चल रहा था। यहां पर डॉक्टरों ने उससे पर्चे पर बाहर से दवा और सर्जिकल सामान मंगवाया। जिसमें दो दिन में उसके २० हजार रुपए खर्च हो गए। जिसकी उसने आयुष्मान काउंटर पर इसकी शिकायत की।

कमीशन के लालच में नहीं मानते डॉक्टर
अस्पताल के अधिकारी मानते हैं कि कमीशन के लालच में डॉक्टर मनमानी कर रहे हैं। वे मरीजों को उन्हीं कंपनी की दवाएं और सर्जिकल सामान लिखते हैं जहां से उनका कमीशन तय होता है, इसके अलावा कई मेडिकल स्टोर्स भी डॉक्टरों को दवा की खरीदारी पर कमीशन देते हैं। इसी वजह से डॉक्टर आयुष्मान रोगियों को भी इसके लिए मजबूर करते हैं।

आयुष्मान रोगियों का गलत ब्योरा भेजा
अस्पताल में ३३७ आयुष्मान रोगियों को लेकर जांच चल रही है। बताया जाता है कि अस्पताल से आयुष्मान रोगियों के बारे में जो रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी उसमें गड़बड़ी थी। इसी वजह से आयुष्मान रोगियों के लिए आने वाला बजट रोक दिया गया। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला का कहना है कि डाटा फीडिंग में कुछ गड़बड़ी थी जिसे सही कराया गया है।

आठ बजे से पहले मंगा लें सामान
हैलट के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने कहा है कि सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रात आठ बजे से पहले ही दवाएं और सर्जिकल सामान मंगवा लें, ताकि मरीजों को बाहर दवा खरीदने न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि आयुष्मान मरीजों बाहर से कोई भी दवा और सर्जिकल सामान खरीदने की जरूरत नहीं है।

 

आलोक पाण्डेय
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