कानपुर बाल संरक्षण गृह में 57 लड़कियां कोरोना पाजिटिव : प्रशासन के बयान पर सवाल, पहले से गर्भवती थीं लड़कियां तो अब तक क्या हुई कार्रवाई

-राज्य महिला आयोग ने कहा-मामले को तोड़-मरोड़कर न करें पेश
-दो बच्चियां पहले से थीं प्रेग्नेंट थीं, आगरा, कन्नौज में दर्ज है एफआइआर
-राजनीतिक दलों ने पूछा, बाकी पांच लड़कियों के गुनाहगार कौन

By: Mahendra Pratap

Updated: 22 Jun 2020, 01:42 PM IST

पत्रिका लाइव
कानपुर. कानपुर के बाल संरक्षण गृह में कोरोना संक्रमण की चपेट में आईं 57 लड़कियों से 7 के गर्भवती होने के मामले को लेकर यूपी में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया है कि शेल्टर होम में आने से पहले दो लड़कियां गर्भवती थीं। इस बयान पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि लड़कियां पहले से ही गर्भवती थीं तब पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की। साथ ही पांच लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने वाले कौन हैं। क्योंकि प्रशासन के पास सिर्फ दो लड़कियों के ही पहले से गर्भवती होने का रिकार्ड है। पांच लड़कियां कैसे गर्भवती हुईं, इस पर अधिकारियों की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

कानपुर के जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेवराम तिवारी ने स्वीकार किया है कि संरक्षण गृह की कुल 57 बालिकाएं कोरोना संक्रमित हैं। इनमें 7 गर्भवती हैं। जिनमें से 5 कोरोना संक्रमित हैं। यह 5 लड़कियां आगरा, एटा, कन्नौज, फिऱोज़ाबाद और कानपुर नगर की बाल कल्याण समिति के जरिए कानपुर पहुंची थीं। इनमें से आगरा और कनौज से आने वाली लड़कियां यौन शोषण का शिकार हुई थीं और संरक्षण गृह पहुंचने से पहले गर्भवती थीं। बहरहाल, पॉजि़टिव पायी गयीं लड़कियों को आइसोलेशन सेंटर भेज दिया गया है। संरक्षण गृह का एक कर्मचारी भी कोविड-19 पॉजिटिव है। प्रोबेशन अधिकारी अजित कुमार का कहना है कि बालगृह में 170 बलिकाएं और 59 महिलाएं रहती हैं। अब संवासिनी गृह को सील करा दिया गया है। यहां किसी को आने-जाने नहीं दिया जा रहा।

लड़कियों के उम्र निर्धारण के लिए जांच होगी :- इस बीच एसएसपी दिनेश कुमार पी ने कहा है कि 3 और 12 दिसम्बर 2019 में दो युवतियां संवासिनी गृह में दाखिल हुईं थीं। ये आगरा और कन्नौज में अपराध का शिकार हुई थीं। दोनों मामलों में एफआईआर है। आरोपितों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। इन लड़कियों की उम्र 17 साल बताई गयी है। प्रशासन का कहना है लड़कियों के उम्र निर्धारण की फिर से जांच होगी।

राजनीतिक बयानबाजी तेज :- लड़कियों के कोरोना संक्रमित और कुछ के गर्भवती होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलके में हड़कंप मचा है। राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के मूड में हैं।

मामला गंभीर, योगी प्रशासन मौन: संजय सिंह

आप सासंद संजय सिंह से सरकार को घेरते हुए कहा है कि योगी के बेशर्म प्रशासन की दलील सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। प्रशासन कह रहा है बाल गृह में गर्भवती लड़कियां दूसरे जिलों से आईं थीं। 7 नाबालिग बच्चियों का रेप हुआ उन मामलों में क्या कार्रवाई हुई। कानपुर की यह घटना यूपी के बाल संरक्षण गृह में घिनौने अपराधों का सच उजागर करती हैं। लड़कियां गर्भवती पाईं गईं। ऐसे गंभीर मामले में योगी प्रशासन ख़ामोश है।

सरकार जांच बिठाए: अखिलेश

वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि सरकारी बाल संरक्षण गृह की ख़बर से जनता में आक्रोश है। कुछ नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने का गंभीर खुलासा हुआ है। इनमें 57 कोरोना से व एक एड्स पीडि़त हैं, इनका तत्काल इलाज हो। सरकार शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफतुरंत जांच बैठाई जाए।

प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने फेसबुक पर लिखा है- कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह में 57 बच्चियों को कोरोना की जांच होने के बाद हैरान करने वाला तथ्य सामने आया है। 2 बच्चियां गर्भवती हैं। एक को एड्स है। मुजफ्फरपुर के बालिका गृह का पूरा किस्सा देश के सामने है। देवरिया से ऐसा मामला सामने आ चुका है। पुन: इस तरह की घटना बताती है कि जांच के नाम पर सब कुछ दबा दिया जाता है। सरकारी बाल संरक्षण गृहों में बहुत ही अमानवीय घटनाएं घट रही हैं।

मामले की तुरंत जांच हो:जनवादी महिला समिति

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली तथा जिलाध्यक्ष नीलम तिवारी ने एसएसपी से मुलाकात कर संवासिनी गृह प्रकरण में जांच कराए जाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि बदइंतजामी से नाबालिग संवासिनी कोरोना संक्रमित हुई हैं।

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