अभी भी अधर में लटका है कानपुर मेट्रो का सपना

मंडलायुक्त मोहम्द इफ्तखारुद्दीन ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि प्रोजेक्ट में 80 प्रतिशत से अधिक सरकारी जमीन का उपयोग किया जायेगा और 600 भवनों का अधिग्रहण किया जाना है

By: Hariom Dwivedi

Published: 30 Apr 2016, 11:29 PM IST

कानपुर. कानपुर में सरकार के मेट्रो का वादा पूरा होता नहीं दिख रहा है। समाजवादी पार्टी की महत्वाकांक्षी योजना में कोई न कोई अड़चन लगी हुई है। 13,721 करोड़ रुपए की मेट्रो परिजोयना को ऋण देने पर यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और जापान इंटरनेशनल कॉरपोरशन राजी तो होगये हैं लेकिन जापान इंटरनेशनल कॉरपोरशन ने ऋण देने के लिए कई शर्ते लगायी हैं।

प्रमुख शर्त है कि परिजोयना में लगने वाले उपकरणों में से 30 प्रतिशत उपकरण जापानी कंपनियों से खरीदने की बाध्यता रखी गई है। यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक की तरफ से अभी भी कोई पूरा खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि, बैंक द्वारा ऋण वितरण के चार साल बाद से रकम की अदायगी शुरू होगी और पूरी रकम 16 सालों में अदा करना होगा। बैंक ने अभी सभी शर्तों का खुलासा नहीं किया है, जिससे मेट्रो परियोजना का कानपुर में शुरू होना अभी अधर में लटका हुआ है।

मंडलायुक्त बोले
कानपुर के मंडलायुक्त मोहम्द इफ्तखारुद्दीन ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि प्रोजेक्ट में 80 प्रतिशत से अधिक सरकारी जमीन का उपयोग किया जायेगा और 600 भवनों का अधिग्रहण किया जाना है।

मेट्रो के लिए अभी करना होगा इंतजार!
सरकार ने कानपुर मेट्रो परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपए का बजट भी दिया है, लेकिन सरकारी हीलाहवाली और नौकरशाही के चलते धरातल पर कोई भी काम पूरा नहीं किया जा सका है, जिससे प्रोजेक्ट के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हुई है। इस योजना का समय से शुरू होना काफी मुश्किल नजर आ रहा हैं। यहां तक कि जब तक बैंकों की ऋण देने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक इस परियोजना के परवान चढ़ने में शहर के लोगों को अगली सरकार का इंतजार करना पड़ सकता हैं।

यही नहीं अभी तक कानपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, जिसमें केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने भी अभी तक इस परियोजना को अपनी मंजूरी नहीं दी हैं। अधिकारियों का कहना हैं कि दिल्ली में 2 मई को होने वाली मंत्रालय की बैठक में इस परियोजना को हरी झंडी मिल सकती है। 

दो भागों में बंटी है कानपुर मेट्रो
कानपुर में मेट्रो को दो भागों में बांटा गया है, जिसकी लम्बाई 23.7 और 9 किलोमीटर की गई है। इसमें कुल 31 स्टेशनों को बनाए जाने का प्रावधान हैं, जिनमें 12 स्टेशन भूमिगत रहेंगे।
Hariom Dwivedi
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