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Kanpur Raid: ...और अब Piyush Jain को बचाने की कोशिश, GST टीम ने अभी तक कोर्ट में पेश नहीं किया कोई ब्योरा

Kanpur Raid: क्या Piyush Jain का केस अनजाने में कमजोर हुआ या जानबूझकर कमजोर किया गया है? सवाल ये भी है कि कोई है जो पीयूष जैन को बचा रहा है। कालेधन असली मालिक कही कोई और तो नहीं? दरअसल पीयूष जैन से पूछताछ के लिए रिमांड नहीं मिली जिसकी वजह ये बताई जा रही है कि जीएसटी टीम कोर्ट के सामने सीजर मेमो पेश ही नहीं कर पायी।

कानपुर

Published: December 29, 2021 04:51:11 pm

Kanpur Raid: कानपुर. माल और सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने कहा है कि कानपुर के इत्र व्यापारी पीयूष जैन के परिसरों पर 22 दिसंबर को शुरू हुई छापेमारी आखिरकार खत्म हो गई है। इस पूरी छापेमारी में डीजीजीआई को कुल 196 करोड़ रुपए कैश, 23 किलो सोना और 600 किलो चंदन का तेल बरामद हुआ है। आपको बता दें कि 196 करोड़ कैश में कानपुर से मिला 177 करोड़ और कन्नौज से मिला 19 करोड़ रुपये दोनों शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पीयूष जैन ने कबूल किया है कि यह कैश बिना टैक्स चुकाए सामानों की बिक्री से जमा की गई थी। डीजीजीआई ने 200 से अधिक फर्जी बिल भी बरामद किया है।
Kanpur Raid Piyush Jain
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वहीं पीयूष जैन के कानपुर स्थित आवास से बरामद 177 करोड़ से ज्यादा की नकदी को डीजीजीआई ने अहमदाबाद टर्नओवर की रकम माना है। इस बात की पुष्टि डीजीजीआई की ओर से कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के आधार पर हुई है। बताया जा रहा है कि अब इसके चलते पीयूष जैन का केस काफी कमजोर हो गया है। अब पीयूष जैन को सिर्फ पेनाल्टी की रकम देनी होगी और फिर उसे जमानत मिल जाएगी। टैक्स पेनाल्टी और ब्याज मिलाकर ये रकम 52 करोड़ के आसपास है। यानि कि 52 करोड़ देकर पीयूष जैन को उसका बाकी बचा पूरा पैसा वापस हो जाएगा। दूसरी तरफ टर्नओवर की रकम मान लिए जाने की वजह से अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट भी अब पीयूष जैन से काली कमाई को लेकर कोई पूछताछ नहीं कर सकता है।
लेकिन सवाल अब ये उठ रहा है कि क्या पीयूष जैन का केस अनजाने में कमजोर हुआ या जानबूझकर कमजोर किया गया है? सवाल ये भी है कि कोई है जो पीयूष जैन को बचा रहा है। कालेधन असली मालिक कही कोई और तो नहीं? दरअसल पीयूष जैन से पूछताछ के लिए रिमांड नहीं मिली जिसकी वजह ये बताई जा रही है कि जीएसटी टीम कोर्ट के सामने सीजर मेमो पेश ही नहीं कर पायी। वहीं डीजीजीआई की टीम ने कैश की बरामदगी को एविडेंस एक्ट के तौर दिखाया ना कि जीएसटी के तहत। इसी तरह पीयूष जैन से न तो इतने बड़े कैश के स्रोत के बारे में पूछताछ की गयी और साथ ही दस्तावेजों में पैसों के स्रोत का भी कोई ज़िक्र नहीं किया गया।
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...तो क्या गलत जैन के यहां पड़ गया छापा

वहीं पीयूष जैन के मामले में नया मोड़ उस वक्त आ गया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कह दिया कि , ‘वो छापा मारना चाहते थे इत्र वाले के यहां, उसका नाम था पुष्‍पराज जैन। इनका नाम था पीयूष जैन। लगता है डिजिटल इंडिया की गलती हो गई। पुष्‍पराज जैन की जगह पीयूष जैन आ गए।’ दरअसल अखिलेश यादव के मुताबिक जीएसटी डिपार्टमेंट को पुष्‍पराज जैन के यहां छापा मारना था, जो कि इत्र कारोबारी हैं, लेकिन दोनों के नाम में जैन होने के चलते पीयूष जैन के यहां छापा मार दिया। अखिलेश यादव के मुताबिक, पीयूष जैन बीजेपी का ही आदमी है।

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