पाकिस्तान को कश्मीरियों ने सुनाई खरी-खरी, पीएम मोदी दिलवाएंगे वादी को गोली से आजादी

जब लोग हमसे हमारा निवास स्थान पूछते हैं तो हमें खुद को बतौर कश्मीरी बताने पर डर लगता है...

कानपुर. शहर के मोतीझाल परिसर में उत्तर प्रदेश खादी ग्रामो़द्योग की तरफ से खादी वस्त्रों की एक बड़ी प्रदर्शनी लगाई गई। यहां देश के सभी राज्यों व शहरों से दुकानदार अपनी दुकानें लगाकर खुद के तैयार प्रोडक्ट कम कीमत पर लोगों को बेच रहे हैं। कश्मीर के गुलमर्ग से आए एक दर्जन कश्मीरी दुकानदार कानपुरियों के बर्ताव से खासे गदगद हैं। रईस खान कहते हैं के वह दूसरी पीढ़ी से हैं, जो सर्दी से आवाम को बचाने के लिए गर्म कपड़े लेकर कानपुर आए हैं। रईस ने बताया कि वादी के लोग अमन-चैन के साथ रहना चाहते हैं, पर पाकिस्तान हमें सुकून से रहने नहीं दे रहा। नापाक लोग वादी में नफरत बोकर आंतक फैला रहे हैं। पीएम मोदी से बहुत उम्मीद है कि वह हमारी वादी को गोली से आजादी दिलवाएंगे। रईस कहते हैं कि पीएम मोदी और वहां की सरकार ने शुरूआत कर दी है और आने वाले दिन जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए अच्छे होंगे।

 

एक दर्जन कश्मीरी पहुंचे मोतीझील

उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से मोतीझील में खादी वस्त्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसका विधिवत शुभारंभ बुधवार को हो गया। इस प्रदर्शनी के गेट पर अहमदाबाद से आया एक आधुनिक चरखा लगाया गया है, जिसमें पांच प्रकार के सूत कातने की व्यवस्था है। गेट पर ही बाबू कुटी भी बनाई गई है। साथ ही देश के कई शहरों से दुकानदार अपने साथ लोगों की घर-गृहस्थी का खुद की तैयार किया हुआ समान लेकर आए हैं। इस प्रदर्शनी में कश्मीर के कई शहरों से युवा दुकानदार गर्म पकड़ों के साथ ही मेवे की बिक्री कर रहे हैं। पुलवामा जिले के गुलमर्ग के रहने रईस अपने एक दर्जन साथियों के साथ कानुपर पहुंचे। प्रर्दशनी में ग्राहकों की संख्या देखकर वह खासे खुश नजर आए। रईस ने बताया के वह पिछले पांच साल से सर्दी के मौसम में कानपुर आते हैं तो कश्मीरी गर्म कपड़े यहां के लोगों को बेचकर जाते हैं। रईस कहते हैं कि इस शहर के लोग बहुत दिलवाले हैं और कभी हमें बतौर कश्मीरी होने का फर्क महसूस नहीं होने देते। वादी में फैले आंतक पर रईस कहते हैं कि चंद लोग हैं जो पाकिस्तान के बहकावे में आकर बंदूक उठा रहे हैं। हमें अपने पीएम नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि वह इस बीमारी का इलाज कर देंगे।


जब आंतकियों ने पिता पर दागी थीं गोलियां

पुलवामा से आए रज्जाक कहते हैं कि उनके पिता ग्रामोद्योग के तहत खादी का प्रचार-प्रचार वादी में कर रहे थे। पिता का यह काम आतंकियों को नहीं भाया। उन्होंने पिता को डराया और धमकाया पर वो नहीं माने। दो साल पहले पांच दहशतगर्द रात में घर के अंदर दाखिल हुए और सो रहे पिता को जगाकर उन्हें गोलियों से भून दिया। पिता की मौत के बाद हमारे खाने के लाले पड़ गए। आर्मी और पुलिस-प्रशासन ने मदद की और फिर हमने अपने पिता के काम को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। रज्जाक गर्म कपड़े कानपुर के साथ ही दिल्ली सहित अन्य शहरों में ले जाकर बेचते हैं। रज्जाक ने बताया कि वह पहले भी कानपुर आया और लोगों का प्यार देखकर मुझे हिन्दुस्तान की असल तस्वीर का एहसास हुआ। रज्जाक कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर की सरकार और पीएम मोदी वादी से आतंक को आज नहीं तो कल जरूर खत्म कर देंगे। वहां भी बहार आएगी, कानपुर के लोग भी हमारे शहर आकर वादियों का मजा लेंगे।


उनके चलते उठानी पड़ती है जिल्लत

रईस बताते हैं कि ट्रेन या बस पर सफर करने के वक्त उसमें सवार यात्री जब हमसे बातचीत कर हमारा निवास स्थान पूछता है तो हमें बतौर कश्मीरी कहने पर डर लगता है। लोग हमें गलत नजर से देखने लगते हैं। आतंकियों के चलते हमें भी कभी-कभी जिल्लत उठानी पड़ती है। कई शहरों में हमारी तलाशी और दस्तावेज देखे जाते हैं। अगर वादी में गोली की जगह बोली आ जाए तो कश्मीर बहुत तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ सकता है। कहते हैं, कुछ लोग वहां नफरत फैला रहे हैं, लेकिन उनसे कई गुना कश्मीरी अपने आप को आम हिन्दुस्तानी मानता है। मोदी सरकार आने के बाद कश्मीर में रोजगार के साधन बढ़े हैं। बड़ी संख्या में कश्मीरी युवा फौज में जा रहे हैं तो कुछ खादी के जरिए अपनी रोटी-रोजी चला रहे हैं। रईस ने बताया कि प्रदर्शनी में हमलोग कश्मीर की हस्तशिल्प सूती, ऊनी, पश्मीना शाल के अलावा स्वेटर लेकर आए हैं। साथ की कश्मीरी मेवा से लोगों का मुंह मीठा कर रहे हैं।

नितिन श्रीवास्तव
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