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घर का सपना महंगा, अब निर्माण लागत में देना होगा ज्यादा टैक्स

श्रम विभाग ने पीडब्ल्यूडी की लागत दरों को आधार बनाया, घोषित लागत पर भरोसा नहीं 12200 प्रति वर्गमीटर के हिसाब से देना होगा निर्माण लागत का एक फीसदी लेबर सेस

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Department of Labor, Cess, New Standard

घर का सपना महंगा, अब निर्माण लागत में देना होगा ज्यादा टैक्स

कानपुर। शहर में घर बनाना अब और महंगा होगा। अभी तक भवन स्वामी की घोषित लागत पर ही सेस का निर्धारण होता था, पर अब पीडब्ल्यूडी के तय रेट के आधार पर भवन निर्माण की लागत तय होगी। स्टैंडर्ड निर्माण लागत तय हो जाने से घर एक फीसदी सेस देना ही होगा। भले ही आपने अपनी मेहनत से घर बनाया हो। इतना ही नहीं सेस जमाकर घर बना चुके लोगों का भी फिर से नए दरों के हिसाब से मूल्यांकन होगा। ऐसे लोगों से जमा की जा चुकी रकम काटकर बकाया वसूला जाएगा।

श्रम विभाग ने तय किया नया मानक
श्रम विभाग और सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने निर्माणाधीन भवनों, बन चुकी बिल्डिंगों पर पीडब्ल्यूडी की निर्माण लागत सेस की दरें तय करेगा। अभी तक भवन स्वामी के दावे को सही मानकर 10 लाख से अधिक निर्माण लागत पर 1 फीसदी सेस लिया जाता रहा लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। न्यूनतम 82 वर्ग मीटर भूखंड में बने भवन सेस की जद में आएंगे। पहले निर्माण में दस लाख रुपए तक खर्च पर ही सेस लगता था। यदि निर्माण लागत इससे कम है तो सेस से छूट थी। भवन स्वामियों को हर फ्लोर के लिए सेस अलग-अलग देना होगा। यदि पहले फ्लोर का सेस दे चुके हैं और दूसरी मंजिल बना रहे हैं तो उसका सेस अलग से जमा करना होगा। ग्राउंड फ्लोर के रेट ज्यादा होंगे और इससे ऊपर की मंजिल के रेट कम होंगे।

पुराने भवन स्वामियों को फिर देना होगा सेस
वर्ष 2009 के बाद सेस जमा कर घर बना चुके लोगों को भी पीडब्ल्यूडी की दर के हिसाब से सेस देना होगा। श्रम विभाग ऐसे भवन स्वामियों की स्क्रूटनी कर सेस निर्धारित कर रहा है। भवन स्वामियों को नोटिसें जारी की जा रही है। यह बताया जा रहा है कि पहले घोषित निर्माण लागत पर सेस लिया गया था और अब पीडब्ल्यूडी के रेट पर सेस निर्धारित किया गया है। सेस के रूप में बकाया इतनी रकम जमा करें। इसमें किसी भी तरह की छूट का कोई प्रावधान नहीं है।

अवैध माने जाने वाले इलाकों से भी होगी वसूली
केडीए भले ही निजी और सोसाइटी के इलाकों को अवैध मानते हुए इनका नक्शा पास नहीं करता है, पर इन भूखंडों पर हुए निर्माण पर भी सेस देना होगा। श्रम विभाग के अफसरों की दलील है कि निर्माण तो हुआ है। श्रमिक लगें हैं तो सेस देना ही होगा। साथ ही अब 82 वर्ग मीटर से यदि ज्यादा निर्माण है तो पीडब्ल्यू के तय रेट 12200 वर्ग मीटर के हिसाब से सेस वसूला जाएगा। यदि किसी ने एक फ्लोर का सेस जमा कर दिया है और बीच में दूसरा फ्लोर बना लिया है तो उस फ्लोर का भी सेस देना होगा। साथ ही पहले बन चुके भवनों की निर्माण लागत का पीडब्ल्यूडी के रेट से निर्धारण होगा।

ग्रामीण इलाकों से भी होगी वसूली
श्रम सेस शहर के लोगों से ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों के भवनों से भी वसूला जाएगा। रेट तय हो जाने से कोई भी सेस का आंकलन आसानी कर सकेगा। अभी तक भवन स्वामी के घोषित निर्माण लागत पर ही सेस तय होता था। उदाहरण के लिए 100 वर्गमीटर के ग्राउंड फ्लोर के मकान की निर्माण लागत पीडब्ल्यूडी के रेट के हिसाब से 1220000 रुपए होती है। इस पर एक फीसदी 12200 रुपए देना होगा। अभी नए भवन के नक्शे श्रम सेस जमा करने पर ही मंजूर होते हैं। केडीए, आवास विकास नक्शा स्वीकृत करते वक्त ही प्रोजेक्ट लागत के हिसाब से भवन स्वामी, बिल्डर का सेस तय कर देता है। श्रम सेस जमा करने के बाद नक्शा स्वीकृत किया जाता है। वसूली गई रकम श्रम विभाग को ट्रांसफर कर दी जाती है। निजी और सोसाइटी इलाकों के भवनों नक्शा कोई सरकारी एजेंसी पास नहीं करती है लिहाजा श्रम विभाग अनुमान के आधार पर सेस तय करता रहा है।