मंत्री स्मृति ईरानी के चलते हुए गरीब, रोटी लेकर सड़क पर उतरे मजदूर

वेतन नहीं मिलने के चलते लाल इमली मिल के सैकड़ों मजदूर और कर्मचारी हाथ में रोटी लेकर सड़क पर उतरे, मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ बोला हमला कर दिया बड़ा ऐलान।

By: Vinod Nigam

Updated: 19 Jan 2019, 08:08 PM IST

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। कानपुर। लाल इमली के मजदूरों ने शनिवार को अर्धनग्न होकर हाथ में रोटी लेकर सड़क पर उतर आए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मजदूरों का पिछले कअर् माह से वेतन नहीं दिया गया, जिसके चलते परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। बदहाली से आजिज होकर अभी तक एक दर्जन मजदूर व कर्मचारियों ने आत्महत्या भी कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। इंटक नेता आशीष पाण्डेय ने बताया कि जब से कपड़ा मंत्री के पद पर स्मृति ईरानी बैठी हैं तब से हमारे दिन बहुत खराब हो गए हैं। यदि समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो मजदूर दिल्ली की तरफ कूंच कर स्मृति ईरानी के घर का घेराव करेंगे।

दिल्ली जाकर करेंगे घेराव
वेतन ना मिलने पर भूखमरी की कगार पर पहुच चुके लाल इमली के मजदूर व कर्मचारियो ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिये एक अर्द्धनग्न होकर हाथों मे रोटी ले कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। लाल इमली के लेबर गेट मे इण्टक कर्मचारियां के तात्वावधान मे हुये इस प्रदर्शन मे सैकड़ां मजदूरों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर इंटक नेता आशीष पाण्डेय ने बताया कि वेतन ना मिलने से मजदूर व कर्मचारी दो वक्त का भोजन नहीं कर पा रहे हैं। फीस ना जमा होने से हमारे बच्चों को स्कूलों से निकाल दिया गया है। अब तक कई कर्मचारी व मजदूरों की मौत भी हो चुकी है। कुछ के पास तो इलाज तक के पैसे नही है। ऐसे मे कर्मचारी सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए सड़क पर उतरें हैं। अगर कर्मचारियो की समस्याओं का निवारण ना हुआ तो सब दिल्ली मे कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के घर के बाहर घेराव करेंगे।

मंत्री स्मृति के चलते तालाबंदी
कर्मचारियों ने हाथों में रोटी और स्लोगन लिखे बोर्ड लेकर प्रदर्शन किया। इस पर लिखा था मंत्री स्मृति इरानी के चलते हमलोग भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। उन्होंने मिल को बंद कराने का आदेश दे दिया है। देश की बागडोर संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल इमली को चालू कराए जाने की बात कही थी। पूर्व कपड़ामंत्री कानपुर आए थे और मिल का शुरू कराने के लिए प्लॉन भी बनाया था। पर जिस दिन से स्मृति इर्रानी को इस मंत्रायल का कामकाज सौंपा गया, वैसे ही उन्होंने कानपुर की सभी मिलों को एक-एक कर बंद कर रही थीं। इंटक नेता ने कहा कि पहले कर्मचारी व मजदूरों को वेतन देंने के साथ अन्य सुविधा दें, फिर तालेबंदी पर अमल करें।

1876 में रखी गई थी नींव
1876 में पांच अंग्रेजों जॉर्ज ऐलेन, वीई कूपर, गैविन एस जोन्स, डॉक्टर कोंडोन और बिवैन पेटमैन ने मिलकर कानपुर की सिविल लाइंस में एक छोटी-सी मिल की स्थापना की थी। ये मिल ब्रिटिश सेना के सिपाहियों के लिए कंबल बनाने का काम करती थी। इसका नाम कानपुर वुलेन मिल्स रखा गया था। इसके बाद परिसर में इमली का पेड़ होने की वजह से ये लाल इमली के नाम से मशहूर हुआ। धीरे-धीरे यहां गरीबों के लिए सस्ते ऊनी कंबल और शॉल बनने लगे। इस मिल में साल 1910 में आग लग गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे यहां का उद्योग और कर्मचारी कम होते चले गए। यूपीए सरकार के दौरान पूर्व सांसद श्रीप्रकाश जायसवाल ने इसे चालू कराए जाने के लिए धन आंवटित कराया। 2014 तक यहां पर कार्य होता था, लेकिन 2017 के बाद लाल इमली पूरी तरह से बंद कर दी गई।

 

Smriti Irani
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