विकास दूबे केस में यूपी पुलिस की रडार पर अपने ही 200 पुलिसवाले

-चौबेपुर थाने में 10 नए सिपाहियों की तैनाती

By: Mahendra Pratap

Published: 07 Jul 2020, 05:55 PM IST

लखनऊ. कानपुर एनकाउंटर में चौबेपुर थाना संदेह घेरे में आ चुका है। जांच में पुलिस महकमे के भीतर छिपे विभीषणों की संख्या बढ़ती जा रही है। शक के दायरे में चौबेपुर, बिल्हौर, ककवन, और शिवराजपुर थाने के करीब 200 पुलिसकर्मी हैं। जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विकास दूबे से फायदा लेकर उसकी कहीं न कहीं मदद करते आए हैं। इन में वह सभी पुलिसकर्मी शामिल है जो कभी न कभी चौबेपुर थाने में तैनात रहे हैं। एसएसपी ने सोमवार आधी रात को एक आदेश जारी कर कानपुर पुलिस लाईन से 10 पुलिसकर्मियों को चौबेपुर थाने स्थानान्तरित किया है। एसटीएफ टीम विकास दुबे के लिए मुखबिरी करने के शक के दायरे में आए चौबेपुर थाने के पुलिस कर्मियों से पूछताछ कर रही है। साथ ही पूछताछ में कुछ क्लू निकलना चाहती है जिससे विकास दूबे की गिरफ्तारी हो सके।

कानपुर आईजी मोहित अग्रवाल ने कहाकि चौबेपुर थाना संदेह के घेरे में है, अब जांच पड़ताल में पता चल रहा है कि पुलिस महकमे के भीतर छिपे विकास दुबे के मददगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इनमें से तमाम पुलिसकर्मी विकास दुबे के मददगार रहे थे। उसके लिए गुर्गों की तरह काम करते थे। पुलिस एसटीएफ की टीमें एक-एक बिंदुओं पर काम कर रही है।

बहरहाल, कानपुर कांड की मजिस्ट्रेट जांच भी शुरू हो गई है। एडीएम ने दस्तावेज, एफआईआर कॉपी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि मांगे हैं। मामले में बयान दर्ज किए गए हैं। मौके के परीक्षण के साथ ही जेसीबी चालक और बिजली काटे जाने के बिंदुओं की जांच होगी। जांच मजिस्ट्रेट एडीएम भू/राजश्व प्रमोद शंकर शुक्ला को बनाया गया है।

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