फाइबर के सामान को और मजबूत बनाएगी गंगा किनारे की घास

फाइबर के सामान को और मजबूत बनाएगी गंगा किनारे की घास

Alok Pandey | Updated: 26 Jul 2019, 12:31:02 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

हाथी घास बने से हवाई जहाज व हेलीकॉप्टर के डैश बोर्ड होंगे ज्यादा मजबूत
मजबूती के साथ-साथ कीमतें भी होंगी कम, सीएसए ने खोजी नई तकनीक

कानपुर। अब कार और हेलीकॉप्टर में यूज होने वाला फाइबर का सामान ज्यादा मजबूत और सस्ता भी होगा। गंगा किनारे उगने वाली हाथी घास से अब फाइबर का सामान बनेगा, जिसमें इस घास के रेशे का इस्तेमाल किया जा सकेगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने इस घास से रेशे निकालने में सफलता हासिल की है। यह रेशे फाइबर में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

बेहतर होगी फाइबर की क्वालिटी
गंगा किनारे होने वाली हाथी घास (टाइफा) का इस्तेमाल हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर में लगने वाले डैश बोर्ड आदि में इसके रेशे का इस्तेमाल किया जा सकेगा। कार के डैश बोर्ड, पार्टिकल बोर्ड, गाड़ी की बॉडी के लिए भी यह कारगर सिद्ध होगा। इसका प्रयोग करने से न सिर्फ मजबूती आएगी बल्कि यह काफी सस्ता भी होगा। इंग्लैंड के लीड्स में प्रस्तुत किए गए रिसर्च पेपर को वैज्ञानिकों ने काफी सराहा है। इसे जल्द की अन्तरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।

स्पंजी होती है हाथी घास
चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक रितु पांडेय ने बताया कि हाथीघास थोड़ा स्पंजी है, जिसमें पानी अवशोषित करने की क्षमता ज्यादा है। इसके अलग अलग-हिस्से में नमी की मात्रा अलग मिल रही है, ऐसे मे फाइबर की क्वालिटी काफी बेहतर मिल रही है। इसका कलेक्शन गंगा किनारे वाले गांवों से किया है। शोधकर्ता रितु पांडेय के मुताबिक कई संस्थानों में ट्रायल हुआ है, जो सफल रहा। हालांकि हाथीघास से फाइबर निकालने की साइंटिफिक तकनीक पर अधिक काम नहीं हुआ है।

ज्यादा टिकाऊ होगा सामान
डॉ. रितु पांडेय ने बताया कि शोध में पाया गया कि हाथी घास को प्राकृतिक फाइबर के तौर पर अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे निकाला गया फाइबर अभी तक प्राकृतिक स्रोतों से पाए गए फाइबर से अधिक मजबूत व टिकाऊ है। इसके इस्तेमाल के बाद वह वस्तु टूट नहीं सकती है। इस फाइबर को थर्मोसेट/थर्मोप्लास्टिक या अन्य बायोडिग्रेडेबिल पॉलिमर के साथ शामिल करके उपयोग किया जा सकता है। प्रक्रिया काफी आसान है।

यूरोपीय देशों में होता इस्तेमाल
प्लास्टिक के सामान में हाथी घास से निकाले फाइबर का इस्तेमाल एक्सट्रूजन तकनीक से हो सकेगा। इस तकनीक के जरिए प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल हो रहे केमिकल के साथ फाइबर को मिक्स कर दिया जाएगा, ऐसे में प्लास्टिक की लाइफ और बढ़ जाएगी। इस तकनीक का इस्तेमाल अभी यूरोप के देशों में चल रहा है। इस घास की खेती करने की जरूरत नहीं है। गंगा किनारे हाथीघास हर सीजन में उपलब्ध होती है। आमतौर पर यह बर्बाद हो जाती है। ऐसे में अगर इसका प्रयोग ही कर लिया जाएगा तो बड़ी बात होगी। यह आसानी से मिल भी सकती है। इस पर आधारित इंडस्ट्री वर्ष भर चलेगी।

 

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