अजब-गजब है आम का पेड़, 365 दिन देता हरे-हरे फल

Vinod Nigam

Publish: Sep, 16 2018 11:08:32 AM (IST)

Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। शहर के लोकोशेड स्थित एक आम का पेड़ लोगों के लिए कौतूहल बना हुआ है। इसमें बारिश के मौसम में हरे-हरे आम के फल टहनियों में लटक रहे हैं। जिन्हें यहां के लोग सुबह के वक्त तोड़कर खाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह पेड़ पूरे साल आम के फलों से लदा रहता है। पर यह खाने में बहुत खट्टा होता है। लोको शेड कर्मचारी बृजेश शुक्ला ने बताया कि पंद्रह साल पहले एक कर्मचारी ने इसे यहां पर रोपा था। मोहल्लेवालों ने देख-रेख कर इसे तैयार किया। आठ साल का उम्र में इसमें आम के बौड़ आने लगे, लेकिन फल नहीं लगते थे। पर तीन साल पहले एकाएक यह पेड़ आम के फल से पट गया और तब से यह सिलसिला जारी है।

आम का पेड़ बना कौतूहल
शहर व आसपास के क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में दशहरी आम की मांग अधिक रहती है। पड़ोसी जनपदों में सैकड़ों बाग हैं, जिनमें दशहरी आम की पैदावार अधिक होती है। इसके अलावा तोतापरी, चौसा और मलिहाबादी आम की भी अधिक मांग रहती है। बारिश शुरू होते ही आम का फल बाजार से गायब हो जाता है लेकिन सितंबर महीने में पेड़ पर आम का फल देखकर लोगों में कौतूहल बना है। वैसे तो आम का मौसम मार्च से जुलाई के बीच का होता है मगर सितंबर में अगर कोई आम का पेड़ फल से लद जाए जाए तो क्या कहेंगे? इन दिनों रेलवे इलेक्ट्रिक लोको शेड में भीड़ लग रही है। लोको शेड में फलों से लदा आम का पेड़ चर्चा का विषय बना हुआ है। लोको शेड कर्मचारी बृजेश शुक्ला कहते हैं कि करीब पंदह साल पहले एक कर्मचारी ने इस पेड़ को लगाया था। तीन साल पहले तक आम का पेड़ सिर्फ शोपीस बना रहता था। इसमें आम के फल नहीं लगते थे। पर तीन साल पहले अगस्त माह में पेड़ में बौड़ लगी और फिर 365 दिन इसमें फल लगने शुरू हो गए।

बहुत खट्टा है आम का फल
लेको शेड कर्मचारी सुरेश चंद्र ने बताया कि आम का वजन काफी है और खाने में बहुत खट्टा है। सुरश कहते हैं कि दो माह के बाद आम पेड़ में पक जाते हैं और फिर भी यह बहुत खट्टा रहता है। वहीं एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि वैसे इसे हिन्दी भाषा में भदैला अबाम का कहा जाता है। इसके पेड़ बहुत कम संख्या में भारत में पाए जाते हैं। क्योंकि अगर समय से बारिश नहीं हुई तो यह पेड़ सूख जाता है। भदैला आम खाने में इस्तेमाल नहीं होता। क्योंकि खट्टा होने के साथ-साथ हल्का कड़ुआ भी होता है। कर्मचरी सुरेश कहते हैं कि हमलोग आम के फल को तोड़कर चटनी बनाकर खाने में इस्तेमाल करते हैं। साथ ही इसकी देखभाल पूरा मोहल्ला करता है।

जलवायू परिवर्तन के चलते बेमौसम फल
चंद्रशेखर आजाद विवि के हार्टीकल्चर विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर विवेक त्रिपाठी कहते हैं कि कुछ पेड़ों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते बेमौसम फल आते हैं। इस मौसम में पैदा होने वाला आम बेहद खट्टा होता है। फल को मीठा बनाने के लिए 4 किलो गोबर की खाद, आधा किलो पोटाश, 200 ग्राम डीएपी, 50 ग्राम बोरेक्स मिलाकर पेड़ की जड़ में डालना पड़ता है। इस आम के पेड़ों की संख्या यूपी में बहुत कम है। अगर किसान इस आम के पेड़ को लगाएं और इसे तैयार करें तो आने-वाले दिनों में लोगों को पूरे आठ माह खाने को मिल सकता है। इसका रोपण करनें के लिए किसान जुलाई माह में पेड़ को लेकर जमीन पर रोपे और ठीक तरह से देखभाल करे तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

 

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned