जूनियर डॉक्टरों के गुस्से को कंट्रोल करेगा मेडिकल कॉलेज, तैयार हुआ प्लान

खेलकूद और गीत-संगीत के जरिए मानसिक तनाव दूर करने की कोशिश

मनोरोग काउंसलरों की मदद से लिया जाएगा जीएचक्यू-१२ टेस्ट

कानपुर। अक्सर हैलट में जूनियर डॉक्टरों की मरीजों और तीमारदारों से मारपीट की खबरें सामने आती रही हैं। इस पर कंट्रोल करने के लिए मेडिकल कॉलेज नई योजना पर काम कर रहा है। ताकि जूनियर डॉक्टरों के गुस्से को कंट्रोल किया जा सके। इसके लिए एक खास तरह का टेस्ट और दिनचर्या का शेड्यूल तैयार किया गया है। टेस्ट के बाद जो रिपोर्ट सामने आएगी उसी के आधार पर जूनियर डॉक्टर की दिनचर्या और ड्यूटी में बदलाव किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में अलग तरह के आयोजन भी शुरू कराए जाएंगे।

क्या है मारपीट की वजह
दरअसल संसाधनों का अभाव और स्टाफ की कमी के बावजूद हैलट पर मरीजों का दबाव सबसे ज्यादा रहता है। हैलट में कानपुर शहर के अलावा आसपास के कई जिलों से मरीज आते रहते हैं। एक जूनियर डॉक्टर पर ड्यूटी के घंटे से ज्यादा काम करने का दबाव रहता है। मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि जूनियर डॉक्टर को कई बार खाने-पीने तक की फुर्सत नहीं मिलती और इसकी वजह से उसमें तनाव और गुस्सा भर जाता है। फिर यही गुस्सा मरीजों और तीमारदारों पर फूटता है। कई बार मरीजों का दबाव कम होने के बावजूद जूनियर डॉक्टरों में झल्लाहट नजर आती है।

हाईटेक परीक्षा से परखेंगे स्थिति
जूनियर डॉक्टरों की मानसिक स्थिति का आंकलन करने के लिए उनका हाईटेक जीएचक्यू-१२ टेस्ट लिया जाएगा। इस टेस्ट में जनरल हेल्थ क्विशचन रहेंगे। इस टेस्ट की रिपोर्ट के आधार जूनियर डॉक्टरों की मानसिक हालत का पता लगाया जाएगा। किसी मनोरोग से ग्रसित होने के लक्षण तो नहीं मिल रहे हैं? ऐसे छात्रों को मनोरोग विशेषज्ञों, काउंसलरों की मदद से ठीक किया जाएगा, साथ ही जो दवा देने के उपयुक्त पाए जाएंगे उन्हें दवा भी शुरू की जाएगी। जीएचक्यू-12 टेस्ट पूरी तरह गोपनीय रहेगा।

२१ बिंदुओं पर होगा सुधार
तनाव को दूर करने के लिए 21 बिंदुओं पर काम किया जाएगा। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर का कहना है कि रिपोर्ट में संस्तुतियां भी हैं और उसे कैसे लागू करना है? इस बारे में भी बताया गया है। डॉ. गणेश शंकर के मुताबिक मेडिकल कॉलेज में खेल और दूसरी साहित्यक सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ाने की शिद्दत के साथ जरूरत है। संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए। इसके लिए विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षक हों। खेल में छात्रों की भागीदारी बढ़े और इसके लिए कॉलेज स्तर से सुविधा मिले। इसके साथ ही कल्चरल प्रभारी भी नियुक्त हों और छात्र छात्राओं को सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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आलोक पाण्डेय Desk/Reporting
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