बोले मुलायम के शिक्षक मित्र- 'पहली बार रोए नेता जी'

बोले मुलायम के शिक्षक मित्र- 'पहली बार रोए नेता जी'
kanpur

Nitin Srivastva | Updated: 24 Oct 2016, 01:03:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

मुलायम सिंह यादव और बंसगोपाल वर्मा की दोस्ती 40 साल पुरानी है।

कानपुर. सपा के घर की कलह से जहां दल के कार्यकर्ता परेशान हैं तो वहीं नेता जी के मित्र भी हलकान हैं। जहानाबाद से सपा के विधायक मदनगोपाल वर्मा के गांव निवासी बंसगोपाल वर्मा ने फोन पर बताया कि रविवार की रात नेता जी से बात हुई थी, जहां वह घर की कलह के चलते पहली बार रोए। इन सबके बावजूद वह हार मानने वाले पहलवान नहीं है, सारे मामले निपटा लेंगे। मैं उनसे लखनऊ में दो माह पहले मिला था, जहां मैने नेता जी से कहा था कि अखिलेश से सीएम पद लेकर खुद यूपी की कमान संभालें, नहीं तो सपा का आने वाले चुनाव में बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। नेता जी ने हमारी इस बात पर विचार करने की बात कही थी। बंसगोपाल वर्मा के मुताबिक इस झगड़े की मुख्य वजह रामगोपाल और उनका परिवार है जो नेता जी को पहली बार हर मामले पर हराने में जुटा है। सपा के लिए नेता जी के साथ शिवपाल ने भी खून पसीना बहाया है। रामगोपाल यादव को बिना परिश्रम के सब कुछ नेता जी ने दिया, लेकिन इन्होंने उनके बेटे को हाईजैक कर दल को तोड़ने के का काम किया है। वर्मा ने बताया कि रामगोपाल की बीजेपी अध्यक्ष से मिली भगत है और वह उन्हीं के कहने पर दल को दो भाग में करने के लिए लगे हैं। मैंने नेता जी के इस विभीषण से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। 

एक ही स्कूल में दोनों थे तैनात
मुलायम सिंह यादव और बंसगोपाल वर्मा की दोस्ती 40 साल पुरानी है। दोनों एक ही स्कूल में शिक्षक के पद पर तैनात थे। दोनों की दोस्ती ऐसी थी कि बंसगोपाल की पत्नी को देखने के लिए मुलायम सिंह आए थे, तो नेता जी की शादी वर्मा ने कराई थी। वर्मा ने बताया कि नेता जी जब शिक्षक थे तब भी वह छात्रों के साथ जमकर मेहनत करते थे। जब वह राजनीति में गए तो हमने भी अपना ट्रांसफर अपने गृह जनपद करवा लिया। लोहिया के आंदोलन में हम भी नेता जी के साथ रहे। नेता जी ऐसे इंसान हैं कि वह अपने पुराने मित्रों और कार्यकर्ताओं को कभी दरकिनार नहीं करते और जब भी मिलते हैं तो उसी पुराने अंदाज में मिलते हैं। लेकिन आज मेरा दोस्त अंदर से टूट चुका है और उन्हें दूसरों ने नहीं बल्कि अपने खून ने दुख दिया है। बंसगोपाल ने बताया कि रविवार की रात मेरी बात नेता जी से हुई थी, जहां उन्होंने कहा कि सोमवार को सबकुछ ठीक हो जाएगा।

पहलवान दोस्त को कोई नहीं हरा सकता
बंसगोपाल ने बताया कि मुलायम सिंह एक शिक्षक के साथ माहिर पहलवान थे। साथ ही एक अच्छे राजनेता हैं। वर्मा ने कहा कि आज सारे मर्ज का इलाज नेता जी कर देंगे। मैने नेता जी से साफ तौर पर कह दिया है कि अखिलेश को सीएम पद से तो वहीं शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष से हटाकर खुद सारी जिम्मेदारी उठाएं। जिस पर नेता जी ने कहा था कि हां अब ऐसा कुछ करना ही पढ़ेगा नहीं तो घर के साथ सपा के कार्यकर्ता भी दूसरे दलों में जा सकते हैं।

शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म
समाजवादी पार्टी के विवाद पर सोमवार को कानपुर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। गली-चौराहे, नुक्कड़ों और चाय के अड्डों पर सपा की ही बातें होती रहीं। मुस्लिम बहुल इलाकों में भी यही हाल रहा। मुस्लिम मतदाता भी मुलायम और अखिलेश पक्ष में बंटा हुआ है। युवा अखिलेश यादव के विकास के कामों की वजह से उनकी तारीफ कर रहे हैं तो बाकी मुसलमानों का कहना है कि उन्होंने पिछले चुनाव में मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर वोट दिया था। अखिलेश के नाम का तो चुनाव के पहले गुमान तक न था।

अखिलेश को नहीं मुलायम सिंह को दिया वोट
मुस्लिम बहुल इलाकों के लगभग चाय के हर होटल, चौराहे, नुक्कड़ों से लेकर शिक्षकों, डॉक्टरों और बुद्धिजीवियों के बीच इसी बात की चर्चा रही। मूवमेंट फॉर मुस्लिम इंपॉवरमेंट के महासचिव डॉ. इशरत सिद्दीकी का कहना है कि सपा को वोट तो मुसलमानों का ही चाहिए लेकिन अखिलेश ने मुस्लिमों के लिए जो काम किया, उससे पढ़ा लिखा वर्ग संतुष्ट नहीं है। इसके अलावा प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हत्याकांड, मुजफ्फरनगर दंगे आदि में सपा सरकार की नाकामी से मुसलमान नाराज हैं। मुसलमान सपा को इसलिए वोट देता है कि वह मुलायम सिंह यादव को जानता है और बाबरी मस्जिद कांड के बाद वे
मुसलमानों के हीरो बने थे।

सपा के अलावा अन्य विकल्प
दादामियां खानकाह के नायब सज्जादानशीन सैयद अबुल बरकात नजमी ने कहा कि मुसलमान जज्बातों में बहकर वोट करता है। अगर बात अखिलेश और मुलायम के बीच हुई और मुलायम ने जज्बाती तकरीर कर बाबरी मुद्दा उठाया तो जाहिर है कि मुस्लिम मुलायम को ही चुनेंगे। हालांकि इस बार मुसलमानों के सामने सपा के अलावा बसपा भी विकल्प है और कांग्रेस व ओवैसी भी उनको रिझाने की कोशिश कर रहे हैं।
Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned