आस्था पर भी कोरोना का पहरा, मंदिरों के बाद अब मस्जिदों में नियम भी बदले

टोपी ना लगाएं और घर से वुजू करके आएं नमाजी
बच्चों को मस्जिदों में आने से रोकें, दी गई सलाह

कानपुर। कोरोना वायरस का असर हर ओर दिख रहा है। अस्पतालों में ही भीड़ दिख रही है और वह भी मरीजों की, बाकी सब जगह सन्नाटा है। चाहे बाजार हो, बस, ट्रेन या फिर कोई शॉपिंग मॉल, कहीं पर भी भीड़ नहीं दिख रही है। अब कोरोना का असर आस्था पर भी दिख रहा है। मंदिरों में पहले ही बचाव के नियम लागू किए जा चुके थे और अब मस्जिदों में भी नमाज के नियमों में बदलाव किया गया है। मुस्लिम धर्म गुरुओं ने नमाज को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए हैं।

टोपी लगाने से बचें
मदरसा जामिया अशरफुल मदारिस, गद्दियाना में ऑल इंडिया गरीब नवाज काउंसलि के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए हमें चाहिए कि मस्जिदों की टोपी लगाने से बचें और मस्जिदों की तौलिया का प्रयोग न करें। नाबालिग बच्चों को मस्जिदों में न ले जाएं। बाजारों में भीड़ न लगाएं। दुकानों को जल्द बंद कर दें। सफाई का भरपूर एहतिमाम करें। आखिर में भारत समेत पूरी दुनिया से कोरोना के खात्मे की दुआ की गयी। यहां मोहम्मद शाह आज़म बरकाती, मोहम्मद रफीक मुंशी, हाफिज अब्दुर्रहीम बहराइची और अकील हसन बव्वन आदि मौजूद थे।

घर से वुजू करके आएं
यह भी कहा गया कि घरों से वुजू करके आएं। हाथ धोने के लिए हैंडवॉश या साबुन रख सकते हैं। हिफाजत के लिए जो भी सही तरीके अपना सकते हैं उसे अपनाएं। जिन्हें खांसी या जुकाम हो वह सफों (पंक्तियों) में किनारे खड़े हों। जुमे का खुत्बा छोटा करें आसरा के नाजिम-ए-आला मास्टर मोहम्मद शाहिद बरकाती ने कहा कि जुमे की नमाज में इमाम खुत्बा (नमाज से पूर्व पढ़ा जाने वाला आदेश) छोटा दें। हिफाज़त की दुआ मांगी तंजीम बरेलवी उलमा-ए-अहले सुन्नत के सदर हाफिज़ और क़ारी सैय्यद मोहम्मद फ़ैसल जाफऱी ने जाजमऊ स्थित हजऱत मख्दूम शाह आला और हजऱत क़ाज़ी सिराजुद्दीन उर्फ दादा मियां की दरगाह पर हाजिरी देकर कोरोना से हिफाजत की दुआ की।

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आलोक पाण्डेय
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