छात्र के हाथ में प्लेट बनी बाधा, नीट परीक्षा में बैठने से रोका गया

हादसे के दौरान टूट गया था दाहिना हाथ, प्लेट देख स्कूल प्रशासन ने परीक्षा में बैठने पर लगाई रोक

By: Vinod Nigam

Published: 07 May 2018, 12:48 PM IST

कानपुर। नीट परीक्षा के लिए पिछले एक वर्ष से मेहनत कर रहा था। कोचिंग के साथ ही घर में 15 से 16 घंटे पढ़ाई क रवह डॉक्टर बनने के सपने देख रहा था। लेकिन अगस्त 2017 में सड़क हादसे में उसका दाहिना हाथ टूटने के बाद अस्पताल में एडमिट करवाया गया था। वहां भी इलाज के दौरान छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखा। डॉक्टरों ने हाथ का ऑपरेशन कर प्लेट डाल दीं और उसे घर भेज दिया। 6 मई 2018 को वह नीट का एग्जाम देने के लिए गुरूनानक मॉडन स्कूल बिठूर गया तो तो परीक्षा व्यवस्थापकों ने उसे परीक्षा में बैठने रोक दिया। स्कूल के गेट के बाहर वह रोता रहा पर उन्हें तरस नहीं आई। परीक्षा करा रहे डॉक्टर विवेक अवस्थी और डॉक्टर विपुल ने छात्र के पिता से मेडिकल सर्टिफिकेट की मांग कर दी। एक घंटे के बाद जब सर्टिफिकेट लेकर छात्र के पिता पहुंचे तब कहीं जाकर उसे परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया।
क्या था पूरा मामला
कल्याणपुर निवासी शिशिर श्रीवास्तव का सानिध्य जो मीट परीक्षा देने के लिए रविवार को बिठूर स्थित गुरूनाक कॉलेज पहुंचा। स्कूल गेट पर तैनात डॉक्टर विवेक अवस्थी और डॉक्टर विपुल ने उसकी जांच पड़ताल की तो हाथ में प्लेट देख उन्होंने छात्र को परीक्षा देने से रोक दिया। जिस पर सानिध्य के पिता ने कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि प्लेट के चलते हम इसे परीक्षा में बैठने नहींं दे सकते। यह मीट एग्जाम के रूल के विरूद है। इस दौरान छात्र ने डॉक्टर विवके अवस्थी के पैर पकड़ कर रोने और लगा, पर उन्हें तरस नहीं आया। करीब आधे घंटे तक दोनों प्रोफेसरों और छात्र के पिता के बीच बहस होती रही, पर वह नियम बताकर उन्हें गेट से बाहर कर मेडिकल सार्टिफिकेट लेकर आने को कहा।
बेहोश हो गया छात्र
परीक्षा देने से रोके जाने से छात्र बेहोश हो गया तो दोनों प्रोफेसरों ने सुरक्षाकर्मियों के जरिए उसे उठवा कर बाहर फिंकवा दिया। यह देख कुछ लोगों ने विरोध और हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिसबल के जरिए प्रोफेसरों ने उन्हें खदेड़वा दिया। मजबूर पिता अपने बेटे को गोद में लेकर मेडिकल स्टोर पहुंचा और उसे दवा दी। जब उसे होश आया और वह परीक्षा देने की जिद पर अड़ गया। परीक्षा देने आए कुछ अन्य छात्रों के पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं होने के चलते उन्हें भी परीक्षा में बैठने नहीं दिया। वह पीड़ित छात्र के साथ स्कूल के गेट के बाहर बैठ गए। मामला बड़ता देख प्रोफेसर विवुल बाहर आए और छात्र के पिता से कहा कि आप मेडिकल सार्टिफिकेट लेकर आइए और बेटे को परीक्षा में बैठाइए।
डॉक्टर के पास जाकर लाए सार्टिफिकेट
प्रोफेसर विपुल के कहने पर छात्र के पिता भाग कर स्वरूप नगर आए और जिस डॉक्टर ने ऑपरेशन कर प्लेट डाली थी उससे सार्टिफिकेट बनवाया और वहां से भागकर स्कूल पहुंचे। मेडिकल सार्टिफिकेट देख कर छात्र को परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। इस दौरान छात्र का करीब दो घंटे का समय बर्बाद हो गया। छात्र के पिता ने बताया कि परीक्षा के नाम पर स्कूल प्रबंधक ने जिस तरह से उनके बेटे को परीक्षा देने से रोका उससे वह काफी आहत हैं। वकीलों से कानून की जानकारी लेने के बाद स्कूल प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई करूंगा। अगर बेटी परीक्षा में फेल हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। मैंने दोनों प्रोफेसरों से कहा कि बेटे को एग्जाम में बैठने दीजिए, मैं मेडिकल सार्टिफिकेट लेकर आ रहा हूं पर वह नहीं मानें।
पीएम और सीएम से करूंगा शिकायत
छात्र के पिता ने बताया कि सोमवार को देश के प्रधानमंत्री, शिक्षामंत्री और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर स्कूल प्रबंधक के खिलाफ शिकायत कर पूरे प्रकरण की जांच की मांग करूंगा। बेटे के हाथ में प्लेट पड़ी होने के चलते उसको दो घंटे तक परीक्षा में बैठने से रेका गया, जो नियम के विरूद्ध है। मीट सहित अन्य परीक्षा के नियमों के मुताबिक यदि कोई छात्र परीक्षा देने से पूर्व हादसे का शिकार हो जाए तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति है, बावजूद गुरूनानक स्कूल ने अपनी अनमानी की। इसके चलते बेटा डिप्रेशन का शिकार हो गया। अगर वह परीक्षा में फेल होता है तो इसके जिम्मेदार स्कूल प्रशासन होगा।

pm modi
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