निलंबित डीपीआरओ के मामले में खुलकर आए नए खुलासे, जानकर रह जाएंगे दंग

फिलहाल ऊपर से लेकर नीचे तक वसूली के खेल में लगे गिरोह की सभी सदस्यों की भूमिका तय थी।

By: Arvind Kumar Verma

Updated: 24 Jul 2020, 11:58 PM IST

कानपुर देहात-जनपद में जिला पंचायती राज कार्यालय में पूरी योजना के तहत अपने कचारियों के साथ मिलकर पूरा खेल किया जाता था। डीपीआरओ ने अपने मनमुताबिक स्थान पर कर्मचारी तैनात करवाए थे। ताकि समय परसही ढंग से बिना किसी रुकावट के वसूली की जा सके। फिलहाल ऊपर से लेकर नीचे तक वसूली के खेल में लगे गिरोह की सभी सदस्यों की भूमिका तय थी। किस तरह पैसा और किससे वसूलना है, इसके लिए पूरी योजना बनाई जाती थी। फिर चाहे बाहर हो या घर योजनाबद्ध तरीके से वसूली की जाती थी। मगर घड़ा भर चुका था। वसूली से त्रस्त लोगों ने आवाज उठाई तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। तब जाकर डीपीआरओ शिवशंकर सिंह समेत चार निलंबित होने के बाद भंडाफोड़ हो गया।

मामले को लेकर जब जांच हुई तो विभागीय जांच में वसूली से जुड़े तमाम राज अधिकारियों के सामने खुलकर आ गए। जांच में पता चला कि शिवशंकर सिंह ने सबसे पहले उन कर्मचारियों को मनचाही जगह तैनात किया जो उनके लिए वसूली कर सकें। यहां तक कि दो वर्ष पूर्व ही कार्यालय बाबू रामसजीवन मौर्य को विशेष पटल पर नियुक्ति दी। क्योंकि यहीं से विकास कार्य और धनराशि से जुड़े कागजात जाते थे। योजना के तहत कागजों में हेरफेर या कुछ फॉल्ट मिलता तो तुरंत रामसजीवन डीपीआरओ को बताता और वहां वह निरीक्षण करने पहुंच जाते थे।

इसके बाद ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र कुमार और सफाई कर्मी यजुर्वेद्र कार्रवाई का भय दिखाकर शिकार पर दबाव बनाते थे। इससे सही व्यक्ति भी दहशत में आकर इनके जाल में फंसकर रुपए देने को राजी हो जाता था। गांवों में हो रहे काम के वीडियो बनाए जाते थे, ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव से कहा जाता था कि कुछ न कुछ तो कामों में कमी निकाली ही जाएगी। धमकी से डरकर जब वे बचने को गुहार लगाते तो उसे रुपये देने को आवास पर बुलाया जाता था। वसूली के मिले रुपये में सभी का हिस्सा होता था। यहां तक कि डीपीआरओ ने खुद को बचाने के लिए सफाई कर्मियों से शपथ पात्र दिलाए कि डीपीआरओ कभी उन पर किसी अनावश्यक कार्य के लिए दबाव नहीं बनाते हैं।

Arvind Kumar Verma
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