एलएमएल सहित नौ कंपनियों में निवेशकों के 350 करोड़ रुपए डूबे

एलएमएल सहित नौ कंपनियों में निवेशकों के 350 करोड़ रुपए डूबे

Alok Pandey | Updated: 12 Oct 2019, 11:33:52 AM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने सूची से बाहर किया, अब शेयरों की खरीद-फरोख्त नहीं होगी

कानपुर। मंदी के माहौल में निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने लोहिया मशीन्स लिमिटेड के साथ ही लैंको इंफ्रा, मोजर बेयर, अमर रेमेडीज, सुप्रीम टैक्स मार्ट, सेमटल कलर, हिंदुस्तान डोर ओ लीवर, सर्वलक्ष्मी पेपर और हनुंग टॉयज को डीलिस्ट यानी से सूची से बाहर कर दिया है। अब कोई भी व्यक्ति उपर्युक्त कंपनियों के शेयरों की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकता है। इस फैसले से उपर्युक्त कंपनियों के निवेशकों के करीब 350 करोड़़ रुपए डूब गए हैं।

बैंक कर लेंगे वसूली, निवेशक रह जाएंगे खाली हाथ
डीलिस्ट हुई कंपनियों में अब कोई भी निवेशक ट्रेडिंग (शेयरों की खरीद-बिक्री) नहीं कर पाएगा। चुकनू सिक्योरिटीज लिमिटेज के एमडी संजीव अग्रवाल के अनुसार जिन निवेशकों ने इनके शेयरों में पैसा लगाया है वह वापस मिलना मुश्किल है। क्योंकि इनसे रिकवरी के दौरान पहले बैंकों को पैसा दिया जाएगा और उसके बाद अगर पैसा बचा तो ही निवेशकों के हिस्से में आ सकता है, लेकिन पैसा बचना संभव नहीं है, क्योंकि बैंकों की देनदारी ही इनती ज्यादा है कि रिकवरी से पूरी भरपाई नहीं हो पाएगी।

बजाज को पछाडक़र आगे आयी थी एलएमएल
सूची से बाहर हुई कानपुर की लोहिया मशीन्स लिमिटेड (एलएमएल) ने अपने दौर में देश की सबसे बड़ी ऑटो मोबाइल कंपनी बजाज को पछाडक़र उसकी जगह पर कब्जा किया था। उस दौर में बजाज का नाम चलता था। उसके स्कूटरों की महीनों पहले एडवांस बुकिंग होती थी। तब कानपुर से खड़े हुए एलएमएल स्कूटर के उद्योग ने बजाज जैसे दिग्गज कारोबारी घराने की बादशाहत को न सिर्फ चुनौती दी बल्कि उस बादशाहत पर कब्जा भी किया था। अपने स्टाइल, पिकअप, कलर और स्पीड के दम पर एलएमएल देश की पहली ऐसी कंपनी थी, जिसने बजाज स्कूटर का अस्तित्व ही खतरे में डाल दिया था।

१० लाख से शुरू होकर देश में छा गया एलएमएल
एलएमएल का जन्म 19 नवम्बर 1972 को हुआ था। केवल 10 लाख की पूंजी के साथ फैक्टरी में स्कूटर उत्पादन इकाई लगाई गई। नए डिजायन और स्टाइल के एलएमएल स्कूटर देखते ही देखते देशभर में छा गए। 1983 में लोहिया मशीन्स का नाम देश की शीर्ष 10 कंपनियों में शामिल हो गया। उसी साल एलएमएल को देश के सबसे लोकप्रिय ब्रांड का दर्जा दिया गया।

१० संस्थानों का 350 करोड़ बकाया
एलएमएल पर कर्मचारियों, बैंकों और अन्य 10 वित्तीय संस्थानों का करीब 350 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें 105 करोड़ मूलधन और शेष ब्याज है। दिवालिया होने के बाद बैंकिंग दिवालिया कोड के तहत एलएमएल का मामला एनसीएलटी गया था। एनसीएलटी ने मामले के समाधान के लिए 24 फरवरी 2018 तक का समय निर्धारित किया था लेकिन कोई हल नहीं निकला।

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