पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, बीसीए की छात्रा ने फांसी लगाई

पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, बीसीए की छात्रा ने फांसी लगाई

| Updated: 02 Apr 2018, 06:44:08 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

मंगलवार सुबह भी यूनिवर्सिटी चौकी इन्चार्ज ने फोन कर छात्रा को धमकाया जिसके बाद वह फांसी के फंदे पर झूल गयी।

कानपुर. बीते दिनों एक छात्रा शोहदों से परेशान होकर अपने शरीर पर सुसाइड नोट लिखकर पेड़ में फांसी का फंदा डालकर झूल गई थी। बावजूद कानपुर की पुलिस कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करती नजर आई। ऐसा ही एक मामला कल्याणपुर के आदर्शनगर में सामने आया, यहां शोदहे बीसीए की छात्रा के साथ छेड़छेड़ कर रहे थे। छात्रा ने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से की, पर वहां सुनवाई नहीं हुई। इसी के बाद छात्रा अपने परिजनों के साथ थाने पहुंची और एफआईआर दर्ज करवाई, पर पुलिस आरोपियों को अरेस्ट करने के बजाए छात्रा पर कम्प्रोमाइज का दबाव डालने लगे। इसी से आहत होकर उसने सोमवार को अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीओ राजेश पांडेय ने बताया कि मृतका के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। परिजन तहरीर देंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
योगी के राज में फांसी लगा रहीं छात्राएं
यूपी की जनता ने प्रदेश में बदहाल कानून व्यवस्था से आजिज होकर सत्ता भाजपा को सौंप दी। सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ बने और उन्होंने शपथ लेते ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो सेल का गठन किया। कई पुलिस अफसरों के ट्रांसफर किए तो कईयों को निलंबित किया। बावजूद सीएम और उनकी पुलिस पर अपराधी और शोहदे हावी हैं। हालात यह हो गए हैं कि शोहदों से तंग आकर छात्राएं जान दे रही हैं। एक सप्ताह के अंदर तीसरी छात्रा फांसी पर झूली। दातों के चिकित्सक की दिनेश चन्द्रा की बेटी एश्वर्या यूनिवर्सिटी कैम्पस से बीबीए कर रही थी। सोमवार दोपहर वह मा से पढ़ने की बात कहकर ऊपरी मंजिल पर कमरे में गई थी। मा ने उसे खाने के लिए आवाज दी, कोई उत्तर नहीं मिला तो वह खुद बेटी को बुलाने गई तो देखा कि उसका कमरा अंदर से बंद है। खिड़की से झाककर देखा तो बेटी का शव पंखे से दुपट्टे के फंदे से लटक रहा था। सूचना पर परिजन और फिर पुलिस पहुंची। शव को नीचे उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
क्लास के दो छात्र करते थे छेछ़छेड़
चिकित्सक दिनेश चन्द्रा की बेटी एश्वर्या यूनिवर्सिटी कैम्पस से बीबीए कर रही थी। उसी की क्लास के दो स्टूडेंट अनिकेत पाण्डे औऱ अनिकेत तिवारी उसके साथ छेडछाड करते थे। छात्रा के विरोध करने पर उनकी मनमानी और बढ गयी। छात्रा ने जब मामले की शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से की तो करियर का हवाला देकर उसे शान्त करा दिया गया। लेकिन अनिकेत तिवारी औऱ अनिकेत पाण्डे की हरकतें पहले से अधिक परेशान करने लगे। रास्ते में रोक कर उससे छेडछाड करना अश्लील गाने सुना कर साथ चलने की बात कहना रोज की कहानी हो गयी थी। जिससे परेशान हो कर एश्वर्या ने अपने परिजनों के साथ पुलिस से शिकायत की औऱ मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने कहा- कम्प्रोमाइज कर लो
मृतक के पिता ने बताया कि पुलिस ने दो नामजद औऱ चार अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज हुआ। लेकिन पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर बेटी को टार्चर करना शुरू कर दिया। एक तरफ उसे शोहदे धमकाते रहे तो दूसरी तरफ शोहदों के परिजन हम पर दबाव बनाते रहे। इधर सोमवार शाम को पुलिस ने एश्वर्या औऱ उसके पिता को धमकाया और समझौता करने का दबाव बनाया। परिजनों का आरोप है कि मंगलवार सुबह भी यूनिवर्सिटी चौकी इन्चार्ज ने फोन कर छात्रा को धमकाया जिसके बाद वह फांसी के फंदे पर झूल गयी। होनहार छात्रा के सुसाइड करने के बाद लोगों में पुलिस के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला। मौके पर फारेन्सिक विभाग की टीम ने पहुंच कर साक्ष्यों का संकलन किया।इस दौरान तकरीबन छह घंटे तक युवती का शव फांसी पर लटकता रहा। वहीं पुलिस के अधिकारी मामले की जांच के बाद कार्रवाई की बात कहते रहे।
मां ने कहा, शोहदों से ज्यादा पुलिस कसूरवार
मृतका की मां ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि बेटी की हत्या में जितना दोषी शोहदा है, उसने ही पुलिसवाले हैं। यदि पुलिस समय पर आरोपी को अरेस्ट कर लेती तो आज मेरी बेटी जिंदा होती। होनहार छात्रा के पिता ने कहा कि बेटी पढ़ने में अव्वल थी। लेकिन इस गलत मानसिकता वाले समाज के चलते उसने दुनिया छोड़ दी। मृतका के पिता ने कहा कि हमारे देश के सिस्टम में इतनी बड़बड़ी है कि उसे ठीक करने के लिए पूरे सौ वर्ष लग जाएंगे। कहते हैं, बेटी ने शनिवार को हमसे कहा था कि पापा पुलिस न्याय नहीं कर रही। पैसे लेकर दरोगा बिक गया है और आरोपियों को बचाने के लिए मुझ पर दबाव मना रहा है। बेवश पिता कहते हैं कि बेटी ने सुसाइड नहीं किया, बल्कि उसे खाकी ने मारा है।

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