फुटपाथ पर लगती ऐसी पाठशाला जहां आकर स्कूल के बच्चे शिक्षक बन जाते

शिक्षक दिवस पर विशेष - नामचीन स्कूलों के बच्चे रोजाना पढ़ाते हैं मलिन स्कूल के नौनिहालों को
मैथाडिस्ट, जयपुरिया, हडर्ड, सीलिंग हाउस जैसे स्कूलों के बच्चों की मासूम कोशिश जारी है

कानपुर। शहर के कैंट स्थित मैथॉडिस्ट स्कूल की बाउंड्री से सटे हुए एक फुटपाथ पर दोपहर बाद एक ऐसी पाठशाला बन जाती है, जहां स्कूली बच्चे ही शिक्षक बन देश के भविष्य को सुधारने की कोशिश में जुट जाते हैं। दोपहर के लगभग ढाई बजे जब गर्मीं अपने चरम पर होती है, तब शहर के वीआईपी कहे जाने वाले स्कूलों के बच्चे ये बच्चे छुट्टी के बाद घर नहीं जाते बल्कि शिक्षा ग्रहण करने के बाद महादान में जुट जाते हैं। महादान यानि शिक्षादान।

४० बच्चों की पाठशाला
इस पाठशाला में लगभग ४० गरीब बच्चे हैं। झोपड़पट्टी में रहने वाले इन बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके मां-बाप के पास पैसे नहीं हैं। इसलिए इन स्कूली बच्चों ने इन्हें शिक्षित करने की जिम्मेदारी उठा ली। यह अपनी ही तरह की अलग पाठशाला है जो फुटपाथ पर हर दिन स्कूल की छुट्टी के बाद सजती है। इन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी आनंदराम जयपुरिया स्कूल के12वीं के छात्र देवांश जायसवाल, सीलिंग हाउस से 12 वीं कर चुके उत्कर्ष मालवीय, मैथाडिस्ट की अनामिका, गुडिय़ा, आंचल और आलिया निभाते हैं। ये बच्चे अपनी मर्जी से मीलों चलकर शिक्षा से वंचित बच्चों के बीच पहुंचते हैं और उन्हें पढ़ाते व निखारते हैं। पढ़ाने वाले बच्चे भी उनके साथ घुल-मिल गए हैं।

अपनी पॉकेटमनी से लाते कापी-किताबें
लालबंगला के देवांश के अनुसार उसके आलवा मैथॉडिस्ट, सर पदमपत, सीलिंग हाउस, स्वराज इंडिया, डीपीएस सहित कई स्कूलों के हाईस्कूल से इंटर तक के बच्चे शिक्षण कार्य कर रहे हैं। बच्चों को ये अपनी पॉकेट मनी से कॉपियां और किताबें भी उपलब्ध कराते हैं। अलग-अलग बच्चों ने मिलकर मिशन कर्तव्य के नाम से यह अनूठी पहल शुरू की है। यह पाठशाला कैंट व जेके मंदिर के पास बस्ती में लगती है। मिशन से जुड़े बच्चे समय मिलने पर पाठशाला में दोपहर 2 बजे से एक से डेढ़ घंटे के लिए पढ़ाने आ जाते हैं।


ये हैं मासूम शिक्षक
आसलीन (सीलिंग हाउस), जान्हवी सिंह, अनामिका (मैथॉडिस्ट), आरती द्विवेदी (हडर्ड), अदिती गुप्ता, अर्थव शुक्ला, श्रेयश सिंह, उत्कर्ष मालवीय, हर्ष सोनकर, आशी, युक्ति, सौरभ (सर पदमपत सिंहानिया), नाव्या मल्होत्रा (स्वराज इंडिया) इसके अलावा अन्य स्कूलों के पलाश, साक्षी खन्ना, प्रज्वल गौर, प्रखर वाजपेयी, गुरुजास सिंह, अरिहंत जैन, सुभि सेठी, वनिका दुबे पढ़ाने का काम करते हैं।

आलोक पाण्डेय
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