10 साल जेल में रहनें के बाद पाकिस्तानी बना जेंटलमैन

Vinod Nigam

Publish: May, 13 2019 09:04:50 PM (IST) | Updated: May, 13 2019 09:04:51 PM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। मंधना पुलिस ने पाकिस्तान नागरिक वकास अहमद उर्फ इब्राहिम खान को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दो माह पहले वो 10 साल की सजा पूरी करने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया। प्रशासन ने उसे पाकिस्तान भेजे जाने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी की। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी उसे मंगलवार यानि 14 मई को बाघा बार्डर पर पाक अधिकारियो को सुपुर्द कर देंगे। इस बीच वकास ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जेल में मैने भारत के बारे में समझा। यहां इंसान और इंसानियत की खुशबू है इसी के कारण गांधी का ये देश महान है। अपनी दस साल की सजा पर वकास ने भगवान श्रीराम की तरह वनवास काटने जैसा बताया। कहा, वो फिर भारत आएगा।

2005 में आया था भारत
वकास अहमद 2005 में दिल्ली में भारत-पाकिस्तान के बीच मैच देखने आया था। इसके बाद वापस नहीं गया। मई 2009 में एटीएस के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने वकास को कानपुर महानगर में मंधना स्थित एक साइबर कैफे से दबोचा था। उसके पास से भारत का नक्शा, कई गोपनीय दस्तावेज और सेना के मूवमेंट से जुड़े कागजात मिले थे। कोर्ट ने वकास अहमद को 10 साल की सजा सुनाई थी। 12 फरवरी को सजा पूरी करने के बाद जेल से रिहा हुआ वकास बिठूर थाने में पुलिस की निगरानी में रह रहा था।

इसके कारण हुई सजा
अदालत में मुकदमे के दौरान अभियोग पक्ष इस बात को साबित नहीं कर सका कि वकास वास्तव में जासूस है अथवा नहीं, लेकिन उसपर वीजा अधिनियमों के उल्लंघन के आरोप कोर्ट में साबित हो गए। क्योंकि वीजा अवधि बीतने के वो भारत छोड़ने के बजाए कानपुर में रहने लगा। विदेश मंत्रायल के एलआयू की सूचना पर कानपुर पुलिस ने वकास को मंधना से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने बिना वीजा के रहनें के आरोप में वकास को सजा सुनाई थी।

दो माह तक बिठूर में रहा वकास
पाकिस्तानी नागरिक वकास अहमद उर्फ इब्राहिम खान को दो माह तक बिठूर थाने में पुलिस की निगरानी में रखा गया था। वह थाने के परिसर में बनी पुलिस बैरक के एक कमरे में रहता था। पुलिस वालों के साथ खाता-पीता था। जरूरत पर थाने के कामकाज में मदद भी करता था। वकास के मुताबिक जेल की चहारदीवारी के बीच 10 साल गुजारे, लेकिन यहां (थाने में) आजादी है। वकास ने कहा कि उसे पुलिस ने जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। पर मै यहां मैच देखनें के लिए आया था। फिर भी कानपुर की कोर्ट ने मुझे जासूसी के मामले में निर्दोष बताया। जिसके कारण दस साल की सजा काटने के बाद भी मैं उदास नहीं बल्कि खुश हूं।

इस पाकिस्तानी पर भी लगा था आरोप
आपको बता दे कि इस तरह का और एक मामला है जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक इदरीस अपने पिता की मौत पर भारत आया था, लेकिन वापस नहीं गया । जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। पर उसके खिलाफ भी कोई अभियोग सिद्ध नहीं हुआ था तो उसे निगरानी में पिछले बीस साल से रखा गया है। मामले पर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी क्षेत्र संजीव सुमन का कहना है की अब पकिस्तान से दस्तावेज आ गए है और पकिस्तान उसे वापस लेने को तैयार हो गया है। 14 तारीख यानी मंगलवार के दिन वकास को बाघा बार्डर ले जाया जाएगा जंहा से उसे अपने वतन वापस भेज दिया जाएगा।

पाक भी दिखाए बड़ा दिल
समाजसेवी सौरभ श्रीवास्तव कहते हैं निश्चित तौर पर भारत पाक सम्बन्धों के लिए आवश्यक है कि ऐसे कैदी जिनपर जासूसी के आरोप साबित नहीं हुए, उन्हें अपने स्वदेश वापसी का रास्ता दिखाया जाए। जिस तरह अब वकास पर जासूसी का आरोप साबित ना होने पर वापस अपने वतन भेजा जा रहा है वैसे ही पकिस्तान को भी चाहिए कि भारत के ऐसे कई कैदी है जो पकिस्तान की जेल में बंद हैं। पकिस्तान को भी बड़ा दिल दिखाना चाहिए। हमारे ऐसे कैदी जिनपर जासूसी का आरोप सिद्ध न होने के बाद भी पकिस्तान की जेलों में बंद है उनकी रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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