हैलट में तड़प-तड़पकर मरीज का निकला दम, डॉक्टरों ने बचने को बनाया बहाना

बोले अस्पताल आने पर ब्रॉड डेड था, परिजनों ने सीएम पोर्टल पर की शिकायत
परिजनों का दावा, मरने से पहले साढ़े तीन घंटे तक स्ट्रेचर पर तड़पता रहा मरीज

कानपुर। कोरोना के मरीजों के लिए भगवान का रूप बने हैलट कोविड-१९ हॉस्पिटल के डॉक्टरों को पता नहीं क्या हुआ कि इलाज के लिए तड़पते एक मरीज को डॉक्टरों ने हाथ नहीं लगाया और तीन घंटे तक मरीज ने स्ट्रेचर पर ही दम तोड़ दिया। इस मामले में डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मरीज के परिजनों ने सीएम पोर्टल पर शिकायत की तो डॉक्टरों ने बचाव में हैलट प्रशासन सामने आ गया। तत्काल इस मामले पर सफाई देते हुए हैलट के कोविड हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी ने कहा कि मरीज ब्रॉड डेड आया था जबकि परिजनों का आरोप है कि साढ़े तीन घंटे तक स्ट्रेचर पर तड़पता रहा।

गंभीर हालत में लाया गया था अस्पताल
नौबस्ता के खाड़ेपुर निवासी 35 वर्षीय सोनू अवस्थी को बुखार और सांस लेने में तकलीफ थी। सोमवार सुबह 8.30 बजे 108 एंबुलेंस से परिवार वाले हैलट अस्पताल लेकर आए। छोटे भाई रवि अवस्थी का आरोप है कि हैलट इमरजेंसी में डॉक्टरों ने देखने के बाद कोरोना का संदेह जताते हुए कोविड-19 हॉस्पिटल की फ्लू ओपीडी भेज दिया। उन्हें स्ट्रेचर से सवा नौ बजे मेटरिनिटी विंग के बाहर स्थित शेड में लेकर पहुंचे। वहां से कई बार डॉक्टरों के पास जाकर भाई को देखने की गुहार लगाई पर कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। ऐसे में उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। परिजन दौड़ते-भटकते रहे पर सोनू को इलाज नहीं मिला। 3 घंटे तक तड़पने के बाद उसकी सांसें थम गईं। मौत के बाद जब परिजनों ने नाराजगी जताई तो डॉक्टर 11.55 बजे सोनू को देखने आए और बोले, जान नहीं बची है।

वायरल वीडियों ने डॉक्टरों का झूठ पकड़ा
मरीज की मौत के बाद चीख-चीखकर बिलख रहे परिजनों का करुण क्रंदन देख सभी के दिल दहल गए। परिजनों ने वीडियो वायरल कर डॉक्टरों के दावे की पोल खोल दी। मरीज के परिजनों का आरोप है कि उसे तीन दिन से बुखार था। सुबह सांस लेने में दिक्कत के बाद भी वह खुद चलकर एंबुलेंस में बैठे थे। स्ट्रेचर पर पड़ा वह घंटों तड़पता रहा। समय से इलाज नहीं मिलने से जान चली गई। इसका वीडियो गवाह है। साथ ही हैलट इमरजेंसी के सीसीटीवी कैमरे, एंबुलेंस चालक एवं इमरजेंसी के डॉक्टर भी गवाह हैं।

हैलट प्रशासन ने दिया जवाब
हैलट कोविड-१९ हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. सौरभ अग्रवाल का कहना है कि परिजनों के आारोप बेबुनियाद हैं। हैलट कोविड में मरीज ब्रॉड डेड आया था। डॉक्टरों ने देखते ही मृत घोषित कर दिया। उसका नमूना कोरोना जांच के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने पर ही कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार कराया जाएगा।

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आलोक पाण्डेय
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