इन गांव के लोग आदिवासियों की तरह जीवन करते हैं व्यतीत, जान हथेली पर रख पहुंचते हैं मंजिल, फिर इस अफसर ने...

गांव के ग्रामीणों की दशा यह है कि गांव से बाहर पैर निकालने के लिए लोगों को सोचना पड़ जाता है।

कानपुर देहात-आदिवासियों की तरह का जीवन व्यतीत करने वाले इन गांवों का जीवन भी बड़ा अदभुत है। एक तरफ लोग धरती से चांद पर पहुंच गए लेकिन इन गांव को लोग संसाधनों के अभाव में अपने गांव से दूसरे गांव नहीं पहुंच पाते हैं। इसके लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यहां तक कि नौनिहाल बच्चों का जीवन भी उसी रीढ़ पर चल रहा हैं। बारिश के मौसम में तो जिंदगी और मौत के बीच सांसे थमी रहती हैं। दरअसल आपको बता दें कि कई दशकों पूर्व बसे कानपुर देहात के संदलपुर ब्लाक के संदना व नैपलापुर गांव के हालात ही कुछ ऐसे है। दोनों गांव के बीच से सेंगुर नदी गुजरी है। दोनों गांव के ग्रामीणों की दशा यह है कि गांव से बाहर पैर निकालने के लिए लोगों को सोचना पड़ जाता है। क्योंकि इन गांव के ग्रामीणों की संदलपुर बाजार पड़ती है। वहां तक जाने के लिए नदी पार करना होता है, इसके लिए नाव का सहारा लेना होता है।

यहां तक कि बारिश के दिनों में जब नदी में उफान आता है तो गांव के किनारे तक पानी पहुंचता है। ऐसे हालातों में लोग जान हथेली पर रखकर नाव से नदी पार करते हैं। नन्हे मुन्ने बच्चे भी उसी खतरनाक खेल खेलकर मंजिल तक पहुंचते हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से लेकर आने वाले विधायक सांसद तक गुहार लगाई लेकिन वर्षों गुजर गए कोई निष्कर्ष नहीं निकला। हाल ही में ग्रामीणों ने इस समस्या से वर्तमान इटावा सांसद रामशंकर कठेरिया को अवगत कराया। जिसके बाद उपजिलाधिकारी आरसी यादव ने संदना व नैपलापुर गांव के बीच पड़ने वाली सेेंगुर नदी पर गांव वासियों व क्षेत्र वासियों के द्वारा की गई पुल की मांग को लेकर निरीक्षण किया। साथ ही लोगों को आश्वासन दिया कि आपकी मांग को सांसद जी तक पहुंचाया जाएगा और इसके लिए जल्द ही धन स्वीकृत कराकर इस पर कार्य किया जाएगा।

Arvind Kumar Verma
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