मुलायम के करीबी की नहीं हुई गिरफ्तारी, अचानक घर से लापता हो गया पूर्व मंत्री

पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने दर्ज किया था मामला, पूर्व मंत्री के रसूख के चलते बैकफुट पर रही खाकी

By: Vinod Nigam

Published: 23 May 2018, 02:43 PM IST

कानपुर। सजेंडी और रूरा थानाक्षेत्र स्थित सरकारी ठेके से शराब का सेवन करने से 17 लोगों की मौत हो गई, वहीं 25 से ज्यादा ग्रामीणों का हैलट-उर्सला अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस-प्रशासन जागा और समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री रामस्वरूप सिंह, उनके दो पौत्र नीरज, विनय समेत एक दर्जन लोगों पर एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने पूर्व मंत्री के दोनों पौत्रों समेत एक दर्जन आरोपियों को अरेस्ट कर शराब की धारा 60 ए के तहत कार्रवाई कर जेल भेज दिया। पर कानपुर देहात पुलिस पूर्व मंत्री पर हाथ रखने से कतराती रही। जानकारों का कहना है कि सपा के पूर्व मंत्री की पकड़ बसपा, भाजपा व कांग्रेस के कद्दावर नेताओं से है और एक भाजपा नेता का उन्हें संरक्षण भी मिला हुआ था। पर पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी की जानकारी सीएम योगी को हुई तो उन्होंने पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए। इसी के बाद पुलिस ने देरशाम मंत्री के घर पर दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिले। पुलिस चांदनी हॉस्पिटल आई, लेकिन यहां से भी वह लापता हो गए। पूरे मामले पर पुलिस के अफसर इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं।
16 लोगों की हो चुकी है मौत
जहरीली शराब कांड में मौतों का सिलसिला जारी है। मैथा स्टेशन के पास ठेके की शराब पीकर गंभीर हालत में पहुंचे ज्योति प्रसाद ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पलवल, हरियाणा का अलीक गांव निवासी ज्योति प्रसाद मैथा में रेलवे लाइन में काम रहा था। ज्योति के अलावा उसी ठेके से ही शराब पीने वाले दो लोग पहले ही दम तोड़ चुके हैं जबकि एक अन्य वेंटीलेटर पर जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। कानपुर और कानपुर देहात में जहरीली से शराब से मरने वालों की संख्या बढ़कर अब तक 16 हो चुकी है। इनमें नौ कानपुर देहात के हैं। अभी भी जहरीली शराब से प्रभावित करीब डेढ़ दर्जन लोगों का कानपुर में इलाज चल रहा है। एसपी रतनकांत पांडेय ने बताया कि मड़ौली के ठेके की जहरीली शराब पीने से मौतों के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद फरार चल रहे लाइसेंसी संतोष पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। साथ ही पूर्व मंत्री को अरेस्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही उन्हें दबोच कर जेल भेजा जाएगा।
इन धराओं में दर्ज की एफआईआर
कानपुर में जहरीली शराब कांड मामले में पुलिस ने सपा के पूर्व मंत्री राम स्वरूप सिंह गौर के खिलाफ केस दर्ज किया था। कानपुर देहात के रूरा थाने में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है।ये मुकदमा एक पीड़ित परिवार की तरफ से दी गई, तहरीर पर कायम किया गया है। इससे पहले पुलिस ने राम स्वरूप के पौत्र रिश्तेदार विनय सिंह और नीरज सिंह के खिलाफ भी केस दर्ज किया था और विनय सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोपी विनय सिंह पर ही कानपुर क्षेत्र में जहरीली शराब की सप्लाई करने का आरोप है। इसके साथ ही शराब कांड में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है। पीड़ित परिवार के द्वारा दी गई तहरीर के बाद पुलिस ने पूर्व मंत्री राम स्वरूप सिंह गौर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।सपा के पूर्व मंत्री के खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा 304, 328, 272, 273 रजिस्टर्ड किया गया है। जबकि उनके दोनों पौत्रों के खिलाफ धारा 60 ए के मुकदार्म दर्ज किया गया है। इस धारा में उम्रकैद से लेकर मौत तक प्रावधान है।
राम स्परूप का सियासी कॅरियर
राम स्वरूप सिंह गौर साल 2002 से 2007 तक मायावती सरकार में राज्य मंत्री रहे थे। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा और कानपुर देहात से 2007 से 2017 तक विधायक रहे। 2017 में उन्होंने ख्ुद चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि अपने पौत्र नीरज को टिकट दिलवाया। अखिलेश यादव ने नीरज को साइकिल का सिंबल देकर चुनाव के मैदान में उतार दिया। प्रचार के लिए खुद अखिलेश और डिपंल यादव सभा करने के लिए आए, लेकिन मोदी लहर के चलते नीरज चुनाव हार गए। नीरज जिला पंचायत सदस्य है, वहीं पत्नी ब्लॉक प्रमुख। जानकारों का कहना है कि पूर्व मंत्री की पकड़ सपा, बसपा और भाजपा के नेताओं से हैं। इसी के चलते एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने पूर्व मंत्री पर हाथ रखने में कतराती रही। सूत्रों की मानें तो भाजपा के एक कद्दावर विधायक जो पहले बसपा में थे, उनका संरक्षण पूर्व मंत्री को मिला हुआ है।
24 लोगों को किया जा चुका है डिस्चार्ज
हैलटमें कानपुर देहात के चार और पीड़ित भर्ती हुए हैं। उन्हें पेट में जलन, पैरों में दर्द व सिर में चक्कर की शिकायत है। इनमें मड़ौली निवासी विनय कुमार, उमेश, बलराम व पट्टनपुरवा मड़ौली निवासी सलमान हैं। परिजन मंगलवार सुबह इनको लेकर एलएलआर की इमरजेंसी पहुंचे। उधर, हालत में सुधार देखकर सोमवार देर रात 10 जबकि मंगलवार को 14 पीड़ितों को डिस्चार्ज किया गया। एसएसपी अखिलेश कुमार का कहना था कि मामले की कई स्तर पर जांच की जा रही है और दोषियों के ख़लिफ़ गैंगस्टर ऐक्ट जैसी धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य अभियुक्त की लोकल ब्रैंड की शराब का नेटवर्क कानपुर और पड़ोसी ज़िलों में फैला हुआ है। इसमें आबकारी विभाग के कर्मचारियों और पुलिस की मिलीभगत के एंगल से भी जांच की जा रही है.।

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