गाय, गंगा और मैनचेस्टर के दिन नहीं बहुरे, एमीटेक फैक्ट्री नीलाम होने जा रही प्रधानमंत्री जी


26 को लगाई जाएगी बोली, 100 से ज्यादा मजूदरों से छिन जाएगी रोटी

By: Vinod Nigam

Published: 10 Feb 2018, 11:18 AM IST

कानपुर, बतौर गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी अपनी शंखदान रैली के दौरान 2013 में कानपुर आए थे। इस दौरान उन्होंने हजारों लोगों की मौजूदगी में बदहाल कानपुर के आंसू पोछने के साथ ही गाय, गंगा और मैनचेस्टर को ढर्रे पर लाने का वादा किया था। पर पौने चार साल गुजर जाने के बाद हालात पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए है। नोटबंदी के दौरान जेके कॉटन मिल बंद हुई तो लाल इमली ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा छोटी-बड़ी दो सौ से ज्यादा फैक्ट्रियों में ताले पड़ गए। अब रनिया स्थित एमीटेक टेक्सटाइल्स लिमिटेड इंड्रस्ट्री भी आगामी 26 फरवरी को नीलाम हो जाएगी और उसमें काम करने वाले सौ से ज्यादा मजूदर और इतने ही कर्मचारी बेराजगार हो जाएंगे। वहीं गाय आसरा नहीं मिलने के चलते सड़कों में धमाचौकड़ी लगा रही हैं तो गंगा का जल पहले से ज्यादा प्रदूषित हो गया है। मजदूर नेता अक्षय प्रजापति कहते हैं कि नगर सांसद कभी दिखते नहीं। सीएम योगी और उनके मंत्री सतीश महाना इन्वेस्टर्स मीट’ के जरिए देशभर के उद्यमियों को प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए जुबानी मेहनत कर रही हैं, पर जो फैक्ट्रियां चल रही हैं, वह बंद होंने की कगार पर खड़ी हैं। ऐसे में इनकी दोहरी नीति का आम मजदूर कैसे विश्वास करे।
तीनों का नहीं हुआ उद्धार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार चुनावी सभा के लिए कानपुर आए और गाय, गंगा और मैनचेस्टर को चमकाने के सपने दिखाए। पर पौने चार साल बीत गए, न गंगा का जल साफ हुआ और न ही गाय को अपना घर मिला। कांग्रेस के पूर्व सांसद राजाराम पाल कहते हैं कि भाजपा के नेता पहले कहते थे कि यूपी में हमारी सरकार नहीं है, इसी के चलते कानपुर का विकास हम नहीं करा पा रहे हैं। लेकिन अब तो दिल्ली, लखनऊ और कानपुर में भाजपा की सरकार है। दस माह योगी सरकार को गुजर गए, पर हालात जैसे पहले थे उससे भी सूबे के खराब हो गए हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि नोटबंदी कर शहर के हजारों युवाओं को पीएम मोदी ने बेरोजगार बना दिया। अब जानकारी मिली है कि रनिया की शान और यूपी की सबसे बड़ी पोलिएस्टर यार्न फैक्ट्री नीलाम होने जा रही है। पूर्व सांसद ने बताया कि हम यहां से दो बार सांसद चुने गए। इसी फैक्ट्री के मजदूरों ने हमें बताया कि योगी सरकार 45 करोड़ रुपए की फैक्ट्री महज 13 करोड़ में नीलाम करने जा रही है। अपनी फैक्ट्री बचाने के लिए उद्यमी, मजदूर, कर्मचारी बैंक और शासन से मदद के लिए चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सिस्टम के आगे बेबस हैं।
1992 में रखी गई थी एमीटेक टेक्सटाइल्स की नींव
एमीटेक टेक्सटाइल्स में काम करने वाले केमिकल इंजीनियर रोहित निवासी कल्याणपुर ने बताया कि नोटबंदी के दौरान जेके कॉटन में ताला पड़ गया। हमने रनिया स्थित एमीटेक टेक्सटाइल्स ज्वाइन कर ली। पर अब कुछ दिन के बाद इसमें भी ताला जड़ जाएगा। हमारी तरह सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। एमीटेक टेक्सटाइल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनिल पांडे ने बताया कि इसकी नींव हमने 1992 में रखी थी। एक लाख वर्गफुट में फैली फैक्ट्री में पोलिएस्टर फिलामेंट यार्न बनता है। कपड़े के सभी फैब्रिक इसी यार्न से तैयार होते हैं। पांडये ने बताया कि हर महीने तीन हजार टन की मांग अकेले यूपी में है लेकिन तैयार होता है सिर्फ 700 टन। 400 टन की क्षमता के साथ एमीटेक यूपी की सबसे बड़ी इकाई है। कंपनी का टर्नओवर करीब 60 करोड़ रुपए है। पांडेय के मुताबिक वर्ष 2013 तक कंपनी अच्छे से चल रही थी। उसी साल रनिया में टेक्सटाइल कंपनी ने अपना विस्तार किया। दस बीघा निजी जमीन लेकर फैक्ट्री डाली और आज हम यूपी में नंबर की दो की हैसियत में उत्पादन करते हैं।
26 को होगी नीलामी
बैंक ऑफ इंडिया ने 14 करोड़ रुपए लोन और 10 करोड़ वर्किंग कैपिटल लिमिट की मंजूरी दी। वर्ष 2014 में बैंक ने इसी लोन को संशोधित कर 11.78 करोड़ और 10 करोड़ वर्किंग कैपिटल के साथ मंजूर किया। बैंक अपने मूलधन 11.78 करोड़ के एवज में उद्यमी से 13.10 करोड़ रुपए ले चुका है। इस वजह से कंपनी की वर्किंग कैपिटल खत्म हो गई और पूंजी न होने से संकट खड़ा हो गया। सख्त शर्तों की वजह से वर्ष 2015 में एकाउंट एनपीए हो गया। अनिल पांडेय ने मोरेटेरियम बढ़ाने का आवेदन किया। कॉस्ट ऑफ बिल्डिंग प्रोजेक्ट बढ़ाने का आवेदन दिया। फिर रीहैबिलेशन के 6 आवेदन दिए लेकिन बैंक ने सारे आवेदन खारिज कर दिए। इसी के साथ कंपनी को नीलामी के लिए रख दिया जबकि ये मामला डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में चल रहा है। फैक्ट्री की कीमत करीब 45 करोड़ रुपए है जिसे बैंक 13 करोड़ में बेचने जा रहा है। 26 फरवरी को नीलामी है। फैक्ट्री आज भी चल रही है जिसमें 100 लोग काम कर रहे हैं। 100 टन प्रति माह का उत्पादन हो रहा है।
इतनी मदद से फैक्ट्री दौड़ पड़ेगी
एमीटेक टेक्सटाइल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनिल पांडेय के मुताबिक मेरी फैक्ट्री इस समय संकट में है। 27 साल का साफ-सुथरा रिकॉर्ड है। न तो एक पैसे की टैक्स चोरी की, न 27 साल में एक पैसे का भी बैंक में डिफॉल्ट हुआ। 100 लोगों क? रोजगार ?? दे रहा हूं। फैक्ट्री बचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहा हूं। निवेशक भी लाने का प्रयास कर रहा हूं लेकिन उससे पहले ही बैंक मेरी फैक्ट्री को नीलाम कर रहा है। मैं यूपी के सीएम से भी मिलने का समय मांगा है और मदद की गुहार लगाई है। अपने क्षेत्रीय सांसद भोले सिंह के पास भी गया था और कपड़ा मंत्रायल के जरिए मदद दिलाए जाने की मांग की थी, पर वहां से मुझे मायूशी हाथ लगी। अनिल पांडेय के मुताबिक औद्योगिक नीति और आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक इंडस्ट्री को सिक यूनिट घोषित किया जाए। इस संबंध में यूपी सरकार में भी स्पष्ट प्रावधान हैं। नियमों के मुताबिक बैंक 5 करोड़ की वर्किंग कैपिटल दे और बकाया रकम को बिना ब्याज के किस्त बनाकर कंपनी से ले। केवल इतनी मदद से ही फैक्ट्री दौड़ पड़ेगी।

Vinod Nigam
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