आसमान से जमकर बरसी आफत की बर्फ, बारिश के साथ बज्रपात का अलर्ट

हल्की व मध्यम गति की बारिश के साथ ही कुछ इलाकों में ओलावृष्टि होने से लोगों की समस्या बढ़ा दी है, मौसम विभाग की तरह आगे भी आमसान में बादल छाए रहने और ठंड की संभावना व्यक्त की गई है।

By: Vinod Nigam

Updated: 03 Jan 2020, 06:47 PM IST

कानपुर। घंटे दर घंटे पारा कम ज्यादा हो रहा है। 25 से लेकर 31 दिसबंर तक सूरज के दर्शन नहीं हुए। बर्फीली पहाड़ों से आ रही हवाओं ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में लिया। जिससे पूरी तरह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। 1 जनवरी को न्यूनत तापमान में बढ़ा और सूरज के दर्शन हुए और अगले दिन शाम को तेज बारिश के साथ आमसान से जमकर ओले गिरे। जिससे किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बबार्द के साथ ही आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो युवकों की मौत हो गई।

सफेद चादर में ढकीं सड़कें
कानपुर की गुरूवार की शाम जो हुआ, उसने लोगों को चैंका दिया। हवाओं के साथ आसमान से बारिश के साथ बर्फ को गिरता देखकर आमशहरी हैरान तो वहीं किसान रो पडे। सड़क पर नजारा शिमला की तरह था। बारिश के साथ इतने ओले गिरे कि देखते ही देखते सड़कों पर सफेद चादर बिछ गई। जबकि ग्रामीण अंचलों में गेहूं के खेत हरे के बजाए सफेद नजर आए। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो मजदूरों ने दम तोड़ दिया।

100 ग्राम तक के गिरे ओले
बिठूर निवासी रामधीन यादव कहते हैं कि दिन में धूप खिलने के बाद शाम करीब चार बजे मौसम ने पलटी मार दी। अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश ने लोगों घर में दुबके रहने को मजबूर कर दिया। राघवेंद्र कहते हैं बारिश से कई इलाकों में जलभराव हो गया। शहर और दक्षिण के साथ ही नारामऊ, चैबेपुर, बिठूर नरवल आदि जगह ओले गिरे। यहां सड़कों, मैदानों और घर की छतों पर ओलों से सफेद चादर सी बिछ गई। जब ओले गिरना बंद हुए तो हम सभी मौज मस्ती के लिए घरों से बाहर निकल आए। राघवेंद्र बताते हैं कि करीब 50 से 100 ग्राम के ओले गिरे।

इसलिए गिरते हैं ओले
सीएसए के रिटायर्ड मौसम वैज्ञानिक डाॅक्टर अनुरूद्ध दुबे कहते हैं कि नदियों, समुद्र आदि का पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है, जिससे बादल बनते हैं। यही बादल समय-समय पर बरसते हैं। जब आसमान में करीब 3 किलोमीटर ऊपर तापमान शून्य से कई डिग्री कम हो जाता है, तो वहां मौजूद पानी की छोटी-छोटी बूंदें जमने लगती हैं। जमी हुई बूंदों पर धीरे-धीरे और पानी जमने लगता है जो बर्फ के गोल टुकड़ों का रूप ले लेते हैं। इन टुकड़ों का वजन अधिक हो जाता है तो नीचे गिरने लगते हैं। ये बड़े बर्फ के टुकड़े नीचे आते आते छोटा रूप ले लेते हैं, जिन्हें ओला कहा जाता है।

इस वजह से हो रही बारिश
सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डाॅक्टर नौशाद खान ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश हो रही है। साइक्लोनिक हवाएं भूमध्य सागर, काला सागर और कैस्पियन सागर से आकर हिमालयी शृंखला से टकराती हैं। इसके बाद हवाओं के साथ इनका असर मैदानी इलाकों में आता है। डाॅक्टर नौशाद खान ने बताया कि चार से पांच जनवरी तक बारिश का अनुमान है। डाॅक्टर खान ने बताया कि बारिश व ओलावृष्टि के चलते शुक्रवार को अधिकतम तापमान 20.4 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियए दर्ज किया गया। आर्दृता 93.71 प्रतिशत रही। जबकि हवा की गति 4.3 किमी प्रतिघंटे के तहत चल रही हैं।

फसलों को हुआ नुकसान
डाॅक्टर खान ने बताया कि ओले गिरने से सरसों, गेहूं, आलू जैसी कई फसलों का नुकसान हुआ है। कई किसानों की सरसों इस समय खेतों में कटी पड़ी हुई है। ओले गिरने से सरसों की फली झड़ गई। वहीं गेहूं की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। वहीं फसल नुकसान की जांच के लिए भी जिलाप्रशासन ने टीमें बना दी हैं। जांच के बाद किसानों की फसल बर्बादी का आकलन के बाद सरकार मुआवजा देगी।

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