प्रचंड ठंड के साथ ही तेज बारिश ने ढाया कहर, बज्रपात-ओलावृष्टि से जान-माल का नुकसान

सुबह आसमान था साफ और सूरज ने दिए थे दर्शन, शाम को अचानक हुई तेज बारिश, मौसम विभाग ने 3 व 4 जनवरी को भारी बारिश की संभावना व्यक्त की।

By: Vinod Nigam

Published: 03 Jan 2020, 09:47 AM IST

कानपुर। पर्वतीय इलाकों में हो रही बर्फबारी का असर पूरे उत्तर भारत मे देखने को मिल रहा है। गुरूवार की सुबह से सूरज निकलनें से लोगों को राहत की सांस ली। लेकिन शाम होते-होते अचानक मौसम ने करवट बदला और तेज हवाओं के साथ तेज बारिश ने शहर, गांव मोहल्लों को लबालब भर दिया तो आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। साथ ही ओले गिरने से खेतों पर खड़ी फसले बड़े पैनाने पर बर्बाद हो गई हैं।

दो की मौत
31 दिसंबर को जहां पारा लुड़कर जीेरा डिग्री पर पहुंच गया था तो वहीं 2 जनवरी को आसमान में दूर-दूर तक बादल, कोहर व बर्फ नजर नहीं आ रही थी। सुबह सूरज ने दर्शन दिए और लोगों ने सूरज की गर्मी से अपने को गर्म किया। अचानक शाम को बादल छा गए और बिजली चमकी और बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान आकाशीय बिजली गिरने से कलक्टरगंज सीपीसी गोदाम में कार्य करने वाले मजदूर विमलेश की मौत हो गई तो वहीं कुछ दूरी पर पेड़ के नीचे खड़े मनीष नाम के युवक पर बिजली गिरी और उसकी भी मौत हो गई।

कई इलाकों में गिरे ओले
सीएसए के मौसम विभाग ने गुरुवार को बारिश का अनुमान जाहिर किया था। शाम होते ही पहले बूंदाबांदी फिर बारिश शुरू हो गई। थोड़ी देर में ही ओले गिरने लगे। इससे लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ा। सड़क किनारे रहने वालों की दुश्वारियां बढ़ गईं। इस दौरान बरिश और आकाशीय बिजली गिरने के साथ ही ओलावृष्टि भी हुई। कानपुर में दक्षिण क्षेत्र, नारामऊ, चैबेपुर, बिठूर आदि जगह ओले गिरे। जिससे खेतों पर खड़ी फसलों को जबरदस्त नुकसान हुआ है।

फसलों को नुकसान
सीएसए मौसम विभाग के प्रभारी डॉक्टर नौशाद खान का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण सिस्टम बन गया है। साइक्लोनिक हवाएं भूमध्य सागर, काला सागर और कैस्पियन सागर से आकर हिमालयी शृंखला से टकराती हैं। इसके बाद हवाओं के साथ इनका असर मैदानी इलाकों में आता है। डाॅक्टर नौशाद खान ने बताया कि चार जनवरी तक बारिश का अनुमान है। जिन क्षेत्रों में ओले पड़े हैं, वहां फूल रही फसलों को नुकसान हो सकता है। इस समय सरसों की फसल भी फूल रही है। इसके साथ ही दलहनी और आलू की फसल को भी नुकसान हो सकता है। बारिश से गेहूं और जौ की फसल को फायदे की उम्मीद है।

31 का दिन सबसे सर्द
बतादें 31 दिसंबर 2019 को लुढ़ककर पारा शून्य पहुंच गया है। 1971 के बाद दिसंबर माह में अबतक की सबसे ठंडी रात होने के साथ न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचकर रिकार्ड बन गया। हालांकि शहर का तापमान वर्ष 2003 में माइनस में भी पहुंच चुका है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के पास उपलब्ध अबतक के रिकार्ड में दिसंबर में पहले कभी न्यूनतम तापमान इतना नहीं दर्ज किया गया है। 1971 से तापमान का रिकार्ड बताता है कि इस साल का दिसंबर माह सबसे ठंडा रहा है।

ऐसे बदलता रहा तामपान
सीएसए के मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 29 दिसंबर को अधिकतम पारा 10.4 और न्यूनतम 4.6, 28 दिसंबर को अधिकतम पारा 12.6 और न्यूनतम 2.0, 27 दसंबर को अधिकत 12.2, और न्यूनत 5.4, 26 दिसंबर को अधिकतम 11.4 और न्यूनतम 7.6, 25 दिसंबर को अधिकतम 16.4 और न्यूनतम 4.6, 24 दिसंबर को अधिकतम 15.6 और न्यनूतम 5.8, 23 दिसंबर को अधिकतम पारा 17.4 और न्यनूतम पारा 6.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिक डाॅक्टर खान बताते हैं कि अभी पारा फिर से लुड़केगा और ठंड पढ़ने की प्रबल संभावना है। साथ ही अब लोगों को कोहरे से भी जुझना पड़ सकता है।

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