योगी सरकार के आदेशों को ताक पर रख करता है ये काम, ग्रामीण बोले जिम्मेदार भी उदासीन

Arvind Kumar Verma

Publish: Jan, 11 2019 11:48:39 PM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर देहात-उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राशन घोटाला व राशन वितरण में भ्रष्टाचार को रोकने की कवायद जमीनी स्तर पर फेल होती नजर आ रही है। ऐसा ही एक मामला जनपद की तहसील अकबरपुर क्षेत्र के एक गांव में देखने को मिला, जहां राशन डीलर की दबंगई के चलते गांव के प्रधान समेत ग्रामीणों को राशन नहीं मिल पा रहा है। कोटेदार ग्रामीणों को वितरित होने वाले राशन की कालाबाजारी करने में लगा हुआ है। खास बात यह है कि ग्रामीणों के द्वारा कई बार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बेबस ग्रामीण कोटेदार की जांच और कार्यवाही के इंतजार में अधिकारियों से आस लगाए बैठे हैं।

 

ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद नही हुई कार्रवाई

दरअसल तहसील अकबरपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत भंवरपुर का मामला है। बताया गया कि इस गांव का कोटेदार ग्रामीणों को वितरित होने वाले सरकारी राशन की कालाबाजारी कर धन उगाही करने में लगा हुआ है। कोटेदार की दबंगई और धांधली के चलते इस पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला पूर्ति अधिकारी से लेकर जिले के जिला अधिकारी तक शिकायत की, लेकिन मामला सिफर रहा। जिले के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायत पर गांव में जाकर मामले की जांच करना भी मुनासिब नहीं समझा। बेवस ग्रामीण जिले के अधिकारियों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन इन बेबस ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं आया।

 

कोटेदार करता है दबंगई

वहीं ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के कोटेदार हकीम खां पर आरोप लगाते हुए बताया कि कोटेदार की दबंगई के आगे हम लोगों की एक नहीं चलती है। कोटेदार कोई न कोई बहाना बनाकर हम लोगों को बिना राशन दिए ही टहला देता है। अगर कोई ग्रामीण अपने की हक की बात करने लगे तो कोटेदार की दबंगई के आगे उसे भी नतमस्तक होना पड़ता है और बिना राशन के ही वापस लौटना पड़ता है। यह सिलसिला करीब 4 महीने से बदस्तूर जारी है, लेकिन कई शिकायतों के बावजूद भी जिले का कोई अधिकारी कोटेदार की जांच करने आज तक नहीं आये। इसके चलते मिलने वाले सरकारी राशन की कालाबाजारी कर गांव का कोटेदार धन कमाने में लगा हुआ है।

 

ग्रामीणो ने शासन व प्रशासन से अपील की है कि मौजूदा कोटेदार की दुकान निरस्त की जाए और पुनः खुली बैठक के द्वारा गांव के किसी अन्य व्यक्ति को दुकान आवंटित की जाए। ताकि हम लोगों को सुचारू रूप से राशन मिल सके। इस पूरे मामले को लेकर जब क्षेत्र के क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक आरती अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने जांच का हवाला देकर अपनी बात समाप्त कर दी।

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