हर महीने अधिकारी और कोटेदार मिलकर गरीबों के राशन पर डाल रहे हैं ‘डाका’

हर महीने अधिकारी और कोटेदार मिलकर गरीबों के राशन पर डाल रहे हैं ‘डाका’

Alok Pandey | Publish: Sep, 19 2018 01:14:15 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

शहर में गरीबों के राशन को विभाग के अधिकारी ही हड़पने को तैयार हैं. इस पूरे खेल में आपूर्ति विभाग के कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं. पता चला है कि गोदाम से राशन उठाने पर प्रति कुंतल 5 किलो के हिसाब से कमीशन तय है.

कानपुर। शहर में गरीबों के राशन को विभाग के अधिकारी ही हड़पने को तैयार हैं. इस पूरे खेल में आपूर्ति विभाग के कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं. पता चला है कि गोदाम से राशन उठाने पर प्रति कुंतल 5 किलो के हिसाब से कमीशन तय है. हर कोटेदार को लगभग 1,000 रुपए तक हर महीने देना पड़ता है. जिले में लगभग 816 राशन की दुकानें हैं. 1,000 रुपए प्रति कोटेदार के हिसाब से यह डकैती 8 लाख 16 हजार रुपए हर महीने की है, जिसे जिम्मेदार अधिकारियों के बीच बराबर बांट लिया जाता है.

ऐसे किया हिसाब
हर महीने की 5 तारीख को राशन वितरण किया जाता है. कोटेदार को राशन गोदामों से हर महीने कोटे के मुताबिक राशन मिलता है. एक बोरी गेंहू और चावल की बोरी में नियम के अनुसार 50 किलो राशन होता है, लेकिन कोटेदारों को प्रति कुंतल 5 किलो ज्यादा राशन के पैसे देने पड़ते हैं. ऐसे में कोटेदार इस नुकसान को पूरा करने के लिए राशन वितरण में खेल करता है, जिससे लाभार्थी को पूरा राशन नहीं मिल पाता है.

ऐसा बताया कर्मचारी ने
आपूर्ति विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि इस कमीशनबाजी के खेल की जानकारी ऊपर तक पहुंचा दी गई है. राशन घोटाले की जांच में आपूर्ति विभाग के कई सप्लाई इंस्पेक्टर और अधिकारी एसटीएफ के राडार पर आ गए हैं. ऐसे में सप्लाई इंस्पेक्टर जांच में कोई भी सहयोग नहीं कर रहे हैं.

पुलिसिया जांच हुई और भी मुश्‍किल
वहीं यूआईडीएआई ने भी घोटाले में पकड़े गए 17 आधार कार्डों की जानकारी देने से मना कर दिया है. ऐसे में पुलिस की जांच अब और मुश्किल हो गई है. वहीं मामले में अभी तक कानपुर से न तो किसी कोटेदार से रिकवरी की गई और न ही कोई कोटेदार पुलिस के हाथ आया है.

एक भी मामले में कार्रवाई
आपूर्ति विभाग में खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी का यह कोई नया मामला नहीं है. अप्रैल-2012 में कलक्टरगंज थाना क्षेत्र में 200 कुंतल चावल पकड़ा गया था. जिसमें रातों रात चावल की जगह सिंघाड़ा भर दिया गया था. इसी प्रकार दूसरा मामला एक फरवरी 2018 में पोखरपुर स्थित लक्ष्मी मित्तल फूड में सामने आया था, जिसमें 652 बोरी गेंहू, 200 कुंतल सरकारी चावल पकड़ा गया था. मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन बाद में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. हाल ही में सरसौल में एक कोटेदार की दुकान पर डीएम ने छापेमारी कर कालाबाजारी पकड़ी थी लेकिन लेकिन विभाग ने उसके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की.

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned