कैसे कटेंगे २१ दिन, तीन दिन में ही खड़ी हो गई यह मुश्किल

दुकानों पर आटा, दाल और चावल हुआ खत्म
रिफाइंड, तेल और नमक की भी खड़ी हुई कमी

कानपुर। २२ मार्च को जनता कफ्र्यू और फिर २३ से २५ मार्च तक लॉकडाउन ने ऐसी मुश्किल खड़ी कर दी है कि २१ दिन काटना मुश्किल लग रहा है। तीन दिनों में ही बाजार से जरूरी वस्तुओं की कमी खड़ी हो गई है। बुधवार तक बाजार में लगभग ९५ फीसदी दुकानों से आटा, दाल और चावल का स्टॉक खत्म हो चुका है। तीन दिनों के लॉकडाउन के दौरान बाजार में हुई जबरदस्त खरीदारी से जरूरी सामान की कमी पैदा हो गई है।

लॉकडाउन को सराहा पर समस्या से परेशान
प्रधानमंत्री ने देश में २१ दिन के लॉकडाउन यानि एक तरह से कफ्र्यू की घोषणा की है। यह जरूरी भी है। कोरोना के चक्र को तोडऩे के लिए कम से कम इतने दिन तक लोगों को एक दूसरे संपर्क में आने से रोकना सही है। शहर के लोगों ने प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना की है और २१ दिनों के इस संकल्प को पूरा करने का भरोसा भी दिया, लेकिन खड़ी हो रही समस्या से वे परेशान दिखे।

जमाखोरी ने पैदा की किल्लत
२२ मार्च को जनता कफ्र्यू के तुरंत बाद लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही लोगों ने जमाखोरी शुरू कर दी थी। जबकि दुकानों पर माल की आवक नहीं हो पायी। लॉकडाउन से डरे लोगों ने एक साथ तीन गुना माल खरीद लिया। लोगों ने आटा, दाल और चावल मासिक खपत से ज्यादा खरीद लिया। जिससे जरूरी सामान खत्म होने लगा। बुधवार को यह स्थिति हो गई कि दाल, आटा और चावल खरीदने को लोग एक दुकान से दूसरी दुकान पर भटकते दिखे।

तीन घंटे में हुई एक हफ्ते की बिक्री
जमाखोरी का आलम यह रहा कि दुकानों पर जबरदस्त भीड़ उमड़ी। काकादेव में एक प्रोविजन स्टोर के मालिक ने बताया कि लॉकडाउन की संभावना के चलते मंगलवार शाम जैसे ही शाम को छह बजे बाजार खोलने की छूट मिली तो लोग खरीदारी को उमड़ पड़े। आटे के जितने पैकेट एक हफ्ते में बिकते थे उतने नौ बजे तक बिक गए और माल खत्म होने पर ही ग्राहक लौटे। यही हाल दाल और चावल का भी रहा। उसका स्टॉक भी खत्म हो गया।

इन चीजों की भी हुई जमाखोरी
दुकानों से राशन खत्म होने पर लोगों ने खाने पीने का दूसरा विकल्प भी अपनाया और टोस्ट, मैगी, रवा के अलावा नमकीन का भी स्टाक कर लिया। लोग दुकानों से एक साथ दस-दस पैकेट टोस्ट, २० से २५ पैकेट मैगी और पांच किलो रवा के साथ दो से तीन किलो तक नमकीन की भी खरीदारी करते दिखे।

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आलोक पाण्डेय Desk/Reporting
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