रेमडेसिविर इंजेक्शन को ब्लैक करने वाला कोरोना पॉजिटिव निकला, संपर्क में आए पुलिसकर्मियों में दहशत

Remdesivir इंजेक्शन काे ब्लैक में बेचने की काेशिश कर रहे थे तस्कर तभी ग्राहक बनकर पहुंची थी एसटीएफ। गिरफ्तार करके थाने में लाकर की थी लंबी पूछताछ अब एक आरोपी निकल गया पॉजिटिव

By: shivmani tyagi

Updated: 16 Apr 2021, 08:42 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

कानपुर Kanpur एसटीएफ STF ने 265 रेमडेसिविर Remdesivir इंजेक्शन के साथ जिन तीन तस्करों को गिरफ्तार किया था उनमें से एक की रिपाेर्ट अब कोरोना पॉजिटिव आई है। इस रिपाेर्ट के बाद तीनाें आराेपियाें के संपर्क में आए पुलिसकर्मियों में दहशत का माहौल है। संपर्क में सभी पुलिसकर्मियाें का अब मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।

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दरअसल मिलिट्री इंटेलीजेंस की लखनऊ यूनिट को यह सूचना मिली थी कि कोलकत्ता से रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप कानपुर लाइ जा रही है। इस सूचना के पर एसटीएफ ने बाबूपुरवा थाना पुलिस टीम के साथ मिलकर तस्करों को दबोचने का प्लान बनाया। सूचना थी कि, इंजेक्शन की खेप नौबस्ता खाड़ेपुर का रहने वाला मोहन सोनी रिसीव करेगा। फिल्मी अंदाज में एसटीएफ के दारोगा और सिपाही ग्राहक बनकर मोहन सोनी से इंजेक्शन लेने गए। इनके बीच डील तय हाे गई और इस तरह एसटीएफ व बाबूवुरवा पुलिस ने मोहन सोनी, सचिन कुमार और प्रशांत शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया।

अब सभी पुलिसकर्मी दहशत में
एसटीएफ गिरफ्तार तीनाे आराेपियाें को बाबूपुरवा कोतवाली ले गई थी। काेतवाली पुलिसकर्मियों ने उससे पूछताछ की थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने इनके खिलाफ धोखाधड़ी, स्टॉक में हेराफेरी, महामारी अधिनियम, औषधि अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया था। शुक्रवार को तीनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था जहां से इन्हे जे भेज दिया गया था। जेल पहुंचने के बाद जेल प्रशासन ने तीनाें का मेडिकल चेकअप कराया तो एक की रिपाेर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। प्रशांत शुक्ला नाम के आरोपी की रिपाेर्ट कोरोना पॉजिटिव आते ही बाबूपुरवा कोतवाली के पुलिसकर्मी दहशत में आ गए। इस घटना के बाद अब संपर्क में आने वाले सभी पुलिस कर्मियों का कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है।

जानिए क्या है रेमडेसिविर इंजेक्शन जिसकी हाे रही ब्लैकिंग
रेमडेसिविर इंजेक्शन कोरोना के गंभीर राेगियाें काे दिया जाता है। कोरोना काल में इस इंजेक्शन काे जिंदगी देने वाला इंजेक्शन नाम भी मिला है। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से इस इंजेक्शन की मार्केट में मांग बढ़ गई है। यही कारण है कि यह ब्लैक किया जा रहा है। इस इंजेक्शन की कीमत करीब 5400 रुपए है लेकिन ब्लैक मार्केटिंग करने वाले मुनाफाखोर इस इंजेक्शन को 20 से 50 हजार में बेचने की काेशिश कर रहे थे।

कोलकत्ता से लाई गई थी खेप

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले पकड़ा गया एक आरोपी मोहन सोनी फार्मा कंपनी में जॉब करता है। मोहन सोनी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि तीन वर्ष पहले पश्चिम बंगाल में रहने वाले अपूर्वा मुखर्जी को 86 हजार रुपए उधार दिए थे लेकिन वह पैसा नहीं लाैटा पा रहे थे। जब दबाव दिया ताे उसने रेमडेसिविर इंजेक्शन देने की बात कही। मोहन सोनी को पता था कि इस इंजेक्शन की मांग है बाजार में महंगे दामाें में बिक सका है। इसी आधार पर उसने इंजेक्शन ले लिए।

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