चाकू-छुरी के बाद अब ऑनलाइन पिस्टल की भी बिक्री

-विकास दुबे फैंस क्लब फेसबुक पेज पर कर रहा ऑफर
-व्हाट्सएप पर होती है पिस्टल की नुमाइश, ऑनलाइन होता है पेमेंट
-पुलिस प्रशासन ने फेसबुक को भेजा नोटिस, पेज नहीं हुआ बंद

By: Hariom Dwivedi

Published: 21 Feb 2021, 02:05 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. रामपुर की चाकू-छुरी की ऑनलाइन बिक्री पुरानी बात हो गयी। अब ऑनलाइन पिस्टल और कट्टे की हो रही है। हथियार की नुमाइश और पेमेंट भी ऑनलाइन ही होता है। यह अनैतिक काम काम हो रहा है विकास दुबे क्लब फेसबुक पेज के जरिए। देशी रिवाल्वर की कीमत 12 से 15 हजार तक होती है। सौदा पटने के बाद पेमेंट गूगल-पे या फिर फोन-पे पर किया जाता है। इस संबंध में कानपुर के एसपी ग्रामीण का कहना है कि इस अवैध कारोबार पर पुलिस की नजर है। फेसबुक को विकास दुबे के एडमिन की पहचान की कोशिश की जा रही है। संबंधित पेज को बंद करने के लिए फेसबुक को भी लिखा गया है। लेकिन, अभी फेसबुक की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए रिमाइंडर भी भेजा गया है।

पेज पर गैर कानूनी कारोबार की पोस्ट
बिकरू कांड में शामिल कुख्यात अपराधी विकास दुबे के नाम पर फेसबुक पर एक दर्जन से ज्यादा पेज संचालित हैं। इनमें से कई पर आपत्तिजनक तथ्य पोस्ट किए जा रहे हैं। इन्हीं में से विकास दुबे फैंस क्लब फेसबुक पेज पर ऑनलाइन पिस्टल खरीदने का ऑफर किया जा रहा है। इस देशी कट्टे या फिर पिस्टल की कीमत 15 हजार रुपए तक होती है। पिस्टल की बिक्री के लिए पेज पर एक वाट्सअप नंबर भी दिया गया है। इस नंबर पर मैसेज करने वालों को पिस्टल के फोटो भेजे जाते हैं और कीमत भी बताई जाती है। सौदा पटने पर गूगल-पे या फोन-पे पर भुगतान लिया जाता है। इसी तरह के एक मैसेज पर लिखा गया है किसी भाई को सामान चाहिए तो मेरे नंबर पर व्हाट्सएप मैसेज करें। टाइम पास करने वाले कृपया मैसेज न करें। कानपुर आ कर लेने वाले हैंड टू हैंड सामान ले सकते हैं।

पुलिस की नजर फेसबुक पेज पर
विकास दुबे से संबंधित पेज पर आपत्तिजनक पोस्ट के अलावा विकास दुबे और अमर दुबे को हीरो की तरह पेश किया जा रहा है। कानपुर के एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि इस तरह के 14 पेज पुलिस की निगरानी में हैं। मामले की जांच जारी है। जो नंबर दिए गए हैं उनकी भी पड़ताल की जा रही है। विकास दुबे से संबंधित पेजों को बंद करने के लिए फेसबुक को भी लिखा गया था। लेकिन, अभी तक फेसबुक ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया है। एक बार फिर ईमेल के जरिए फेसबुक को रिमाइंडर भेजा गया है।

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