दासी की सामाधी की सुरक्षा करती हैं गंगा

8 साल की उम्र में उस कन्या ने अपनी जिंदगी बिठूर में बैरीघाट स्थित मां सीता व लवकुश के मन्दिर की सेवा में अर्पित कर दिया था।

By: Abhishek Gupta

Published: 16 Jun 2016, 08:38 PM IST

विनोद निगम
कानपुर.
8 साल की उम्र में उस कन्या ने अपनी जिंदगी बिठूर में बैरीघाट स्थित मां सीता व लवकुश के मन्दिर की सेवा में अर्पित कर दिया था। वह बिठूर के सिंहपुर में 1870 में पैदा हुई थी| जानकारों की मानें तो 100 बरस उसने मां सीता की दासी बनकर जिए| उसने 25 दिसंबर 1970 को जिंदा समाधि ली थी| अब उनकी समाधी की सुरक्षा स्वयं मां गंगा करती हैं। बारी स्थित मन्दिर और समाधि को कभी भी गंगा की बाढ़ का पानी छूता तक नहीं है। जबकि आसपास बाढ़ का मंजर भयावह हो जाता है।


वह पहली महिला थी जिसने कानपुर में जिंदा समाधी ली| 40 साल तक बिठूर में लव कुश मंदिर में रही फिर बैरीघाट आकर जहां मां सीता ने लव और कुश का कर्णछेदन कराया था उस मंदिर की भक्कतन बन गई| वह 1960 में राम की जन्म स्थली गई थी और वहीं से मंदिर का बिगुल फूका था| 92 साल तक वह घर में नहीं सोई, मां सीता के मंदिर के बाहर सोती थी| दिन में एक बार भोजन करती थी| उससे मिलने के लिए इंदिरा गांधी भी आ चुकी हैं| जिस महिला की संतान नहीं होती थी वह भक्कतन के दर पर आती थी, उसके आर्शीवाद से उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती थी| जहानाबाद के पूर्व विधायक स्व कासिन हसन भी भक्कतन के दर पर माथा टेकने के लिए आए थे, उसकी क्रपा से उन्हें भी संतान सुख की प्राप्ति हुई थी|

भोर पहर चढ़े मिलते हैं ताजे फूल, रहस्य

भक्कतन के पर पोते प्रकाश शुक्ला ने बताया कि दादी की समाधी को लिए 46 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी सुबह चार बजे गुलाब के फूल मंदिर में बिराजी मां सीता और लव कुश की मूर्ति पर चढ़े मिलते हैं, कई टीमें आईं, लेकिन पता नहीं लगा पाईं| शुक्ला के मुताबिक दादी आज भी मंदिर की रखवाली करती थीं| गंगा में बाढ़ आई थी, सभी के घर डूब गए थे, लेकिन गंगा का पानी समाधी के ऊपर से नहीं गुजरा। मंदिर और समाधि बच गए थे। आज भी सैकड़ों लोग मन्नत मांगने के लिए समाधि स्थल पर आते हैं|

वह 36 घाट 80 मंदिरों की रखवाली करती

प्रकाश शुक्ला ने बताया कि गंगा के किनारे स्थित बारीघाट के आसपास 36 घाट और छोट़े-बड़े मिलाकर 80 मंदिर हैं| इन मंदिरों पर घाटों में मां सीता और उनके बेटे लव और कुश की कई निशानियां मौजूद हैं| बैरीघाट के तट पर लव और कुश गंगा स्नान करने के लिए आते थे| मान्यता है कि अगर कोई भी व्यक्ति इन घाटों पर स्नान ध्यान कर ले तो उसके पास दुख दरिद्र कभी पास नहीं आता| शुक्ला के मुताबिक यह घाट देख रेख के अभाव के चलते क्षतिग्रस्त हो गए हैं| भाजपा विधायक सलिल बिश्नोई, सपा विधायक सतीश निगम शहर के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने इन घाटों का जीर्णौद्वार कराने की कई बार बात कही, लेकिन वह सब हवा हवाई साबित हुई|
Abhishek Gupta
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