रोटा वायरस का संक्रमण शिशुओं के लिए है जानलेवा, चपेट में हैं कई देश, स्वास्थ्य विभाग ने किए इंतजाम

रोटा वायरस का संक्रमण शिशुओं के लिए है जानलेवा, चपेट में हैं कई देश, स्वास्थ्य विभाग ने किए इंतजाम

Arvind Kumar Verma | Publish: Sep, 06 2018 06:51:02 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

रोटा वायरस से बच्चों में खतरनाक संक्रमण होता है सरकारी अस्पतालों में आने वाले करीब 32 लाख बच्चों में से 78 हजार बच्चों की मौत हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिये ठोस कदम उठाये हैंं।

कानपुर देहात-भारत में प्रतिवर्ष दस्त के प्रभाव से ग्रसित होकर सरकारी अस्पतालों में आने वाले करीब 32 लाख बच्चों में से 78 हजार बच्चों की मौत हो रही हैं। जिसमें रोटा वायरस के चलते दस्त रोग से ग्रसित होने और मौत की आगोश में सो जाने की संख्या अधिक होती हैं। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को रोटा वायरस से बचाने का प्रयास शुरू कर दिया हैं। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण के माध्यम से 0 से 1 वर्ष तक के बच्चों को रोटा वायरस वैक्सीन की 5-5 बूंदे पिलाने की कवायद शुरू कर दी हैं। इसी के चलते यूपी के जनपद कानपुर देहात के सभी सरकारी अस्पतालों में 0 से 1 वर्ष के बच्चो को रोटा वायरस वैक्सीन पिलाई जायेगी। जिसकी तैयारियां कानपुर देहात के स्वास्थ्य विभाग ने पूरी कर ली हैं।

 

अब बच्चों में किया जाएगा ये टीकाकरण

कानपुर देहात में 0 से 1 वर्ष तक के बच्चों को रोटा वायरस के कारण होने वाले दस्त रोग और इसके प्रभाव से हो रही मौतों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब ठोस कदम उठाया है। इसके अंतर्गत जनपद के समस्त सीएचसी, पीएचसी, उपकेन्द्रो सहित जिला अस्पतालों में 0 से 1 वर्ष के बच्चों को रोटा वायरस वैक्सीन पिलाई जायेगी। जिसकी तैयारियां स्वास्थ्य विभाग ने पूरी कर ली हैं। कानपुर देहात के मुख्य चिकित्सा अधिकारी हीरा सिंह ने बताया कि शिशुओं को होने वाले रोगों में दस्त रोग आम रोग की तरह होते हैं लेकिन अज्ञानतावश कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो जाते हैं। दस्त रोग अधिकतर रोटा वायरस के कारण होते हैं। जिनकी संख्या अन्य दस्त रोग से ग्रसित बच्चों की संख्या के सापेक्ष 40 प्रतिशत होती हैं। दस्त रोग में पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी एवं नमक की कमी हाने के कारण शिशुओं की मृत्युु हो जाती हैं।

 

इसकी वजह से होती है शिशुओं की मौत

भारत के सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिवर्ष ऐसे दस्त से ग्रसित बच्चे इलाज के लिए आते हैं, जिनमें से लगभग 78 हजार बच्चों की मौत हो जाती हैं, इनमें भी करीब 59 हजार बच्चों की मृत्यु 1 से दो वर्षो के बच्चों की होती हैं। रोटा वायरस की वजह से होने वाले दस्त वर्ष में किसी भी माह मे हो सकता हैं लेकिन सर्दियों के मौसम में इसका प्रभाव सबसे अधिक होता हैं। भारत ही नहीं रोटा वायरस का प्रभाव विश्व में करीब 95 देर्शो में फैला हैं, जिसके चलते इन देशों ने भी रोटा वायरस वैक्सीन का प्रयोग करना शुरू कर दिया हैं, जिसमें जन्म से 1 वर्ष के बच्चों को टीकाकरण के माध्यम से रोटा वायरस वैक्सीन की 5-5 बूंदे बच्चों को पिलाईं जाती हैं। इसी के चलते भारत में भी इस वैक्सीन की बूंदे जन्म से 1 वर्ष बच्चों को पिलाने का तैयारी शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में यूपी के सभी सरकारी अस्पतालों में रोटा वायरस वैक्सीन की बूंदे बच्चों को पिलाई जायेगी।

 

मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि यह रोग संक्रमित हैं, जो दूषित पानी, दूषित खाने एवं गन्दे हाथों के सम्पर्क में आने से फैलता हैं। इसी के चलते रोटा वायरस वैक्सीन का पूरे कानपुर देहात में टीकाकरण किया जायेगा। साथ ही इसकों नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया हैं।

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