शोरूम और गोदामों में खचाखच भरी हैं कारें, पर नजर नहीं आ रहे खरीदार

शोरूम और गोदामों में खचाखच भरी हैं कारें, पर नजर नहीं आ रहे खरीदार

Alok Pandey | Updated: 13 Aug 2019, 11:35:27 AM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

भारी भरकम टैक्स के चलते बिक्री में आयी रिकार्ड गिरावट
हालात न सुधरे तो ऑटोमोबाइल सेक्टर में बढ़ेगी बेरोजगारी

कानपुर। शहर का ऑटोमोबाइल सेक्टर संकट में है। जीएसटी मिलाकर कुल टैक्स इतना ज्यादा है कि खरीदार इसे सुनकर ही बिदक जाता है और कार खरीदने के बारे में सोचता भी नहीं। अगर एक छोटी कार भी खरीदी जाए तो उस पर २८ फीसदी जीएसटी लगेगा और इसके बाद बीमा, रजिस्ट्रेशन आदि मिलाकर पांच लाख की कार पर दो लाख का टैक्स बनेगा। ऐसे में खरीदार पीछे हट जाता है। पिछले २५ सालों में यह सबसे बुरी स्थिति है। बिक्री में आयी ३० फीसदी की गिरावट ने इस सेक्टर की कमर तोड़कर रख दी है।

नौकरी पर आया संकट
कार डीलरों का कहना है कि अगर हालात नियंत्रित करने के लिए जल्द कदम नहीं उठाए गए तो आधे स्टाफ की छंटनी करनी पड़ेगी। जिससे बेरोजगारी और बढ़ेगी। एसबी कार्स के एमडी एचके ओबेराय ने कहा कि आमतौर पर मई से बाजार उठना शुरू हो जाता है और सितंबर तक पूरी मूड में आ जाता है। इस बार अप्रैल से अगस्त तक बाजार गिरता चला जा रहा है। शहर में विभिन्न कार कंपनियों के 22 डीलर हैं। उनके यार्ड में कारें खचाखच भरी हैं। कानपुर के कार डीलरों के पास करीब 7500 कारें डंप खड़ी हैं।

बिक्री नहीं पर खर्चे बरकरार
डीलरों का कहना है कि 25 साल में इतने खराब हालात कभी नहीं आए। गाडिय़ां बिक नहीं रही हैं लेकिन यार्ड में खड़ी कारों के मेंटीनेंस, बीमा, किराये आदि में एक करोड़ रुपए महीना खर्च हो रहे हैं। अब डीलर अपनी जेब से बैंक लोन भरने को मजबूर हैं। अगर ऐसा नहीं किया तो डिफाल्टर हो जाएंगे और आगे कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। इसके सुधार के लिए अभी से उपयुक्त कदम उठाने होंगे नहीं तो आने वाले दिनों में इस सेक्टर में काम कर रहे लोगों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

ट्रांसपोर्टरों भी परेशान
कार या दोपहिया वाहनों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्टील या अन्य सामान का भी होता है। आटोमोबाइल से जुड़े सभी कंपोनेंट्स भी सड़क के जरिए ही आते-जाते हैं। ये सेक्टर प्रभावित है। यूपी मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गांधी ने कहा कि ये चेन रिएक्शन है। 30 से 50 फीसदी तक कारोबार में गिरावट है। यही हाल रहा तो किस्त न देने के केस बढ़ जाएंगे।

बैंक पेनाल्टी वसूलने लगे
डीलरों के पास 90 फीसदी से ज्यादा गाड़ी फाइनेंस पर हैं, जिसका दस प्रतिशत ब्याज डीलर को भरना ही है। बैंक लोन के भुगतान के लिए डीलर को 60 दिन का समय देते हैं। इस अवधि में कंपनी से गाड़ी मंगाकर ग्राहक को बेचना होता है। 60 दिन से ज्यादा होने पर बैंक 6-8 फीसदी पेनाल्टी वसूलने लगते हैं। यही स्थिति खड़ी हो गई है। गाडिय़ां डंप हैं और डीलरों को अपनी जेब से ब्याज व पेनाल्टी भरनी पड़ रही है। डीलरों ने कहा, इस संकट से निकालने को बैंक 60 दिन की अवधि को 90 दिन की कर दें। तब-तक त्योहारी सीजन आ जाएगा कारोबारी डिफाल्टर होने से बचेंगे।

क्या कहते हैं डीलर
खन्ना हुंडई व सम्पुन फोर्ड के एमडी पुनीत खन्ना का कहना है कि 25 साल में पहली बार ऑटोमोबाइल सेक्टर का इतना बुरा हाल देख रहा हूं। कंपनियों ने तो उत्पादन रोककर खर्चों में कटौती कर ली लेकिन डीलर क्या करें। उन्हें तो बैंकों को ब्याज देना है। आरएनजी मोटर्स के एडी अमित गर्ग ने बताया कि पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री कम है। यूपी मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महामंत्री मनीष कटारिया का कहना है कि कानपुर के आसपास करीब 2000 ट्रक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े हैं। लखनऊ में टाटा का प्लांट है। रुद्रपुर में अशोक लीलेंड, महिन्द्रा और बजाज ऑटो का प्लांट है। कारोबार में 30 से 40 फीसदी की कमी आई है।

 

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