कैंसर है या होने वाला है यह बताएगी आपके मुंह की लार

आईआईटी ने तैयार की माइक्रोचिप जो एक बूंद से ही बता देगी रिपोर्ट
कैंसर के खतरे को किया जा सकेगा कम, शुरूआत में ही पता चलेगा

कानपुर। कैंसर का पता लगाने के लिए अब महंगी जांच या बायोप्सी की जरूरत लगभग खत्म हो जाएगी। केवल मुंह की लार से ही कैंसर का पता लग जाएगा। इतना ही नहीं अगर किसी को कैंसर नहीं है और आगे होने की संभावना है तो भी इस तकनीक से पता लग जाएगा। जिससे शुरूआत मेें ही इलाज के जरिए शरीर में कैंसर फैलने से रोका जा सकेगा। कैंसर के खतरे को कम करने में यह तकनीक बेहद कारगर साबित होगी।

देश में चिंताजनक स्थिति
पहले ही अपेक्षा आज के दौर में कैंसर का विस्तार बढ़ गया है। भारत में यह स्थिति ङ्क्षचताजनक है, क्योंकि दुनिया भर के मुख कैंसर के सभी मामलों में एक तिहाई मरीज भारत के हैं। देश में सभी तरह के कैंसर में एक तिहाई हिस्सा भी मुख कैंसर का है। एक अनुमान के मुताबिक देश में तंबाकू सेवन से रोज 2500 लोगों की मौत हो रही है। इस समय देश में कैंसर पीडि़तों की अनुमानित संख्या 25 लाख है।

लार के रंग से पकड़ेंगे कैंसर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने एक ऐसी माइक्रो चिप बनाई है जो ग्लूकोमीटर में लगने वाली स्ट्रिप की तरह काम करेगी। इसमें लार की एक बूंद डालते ही पता चल जाएगा कि आपको कैंसर है या नहीं। चिप पर एक बूंद डालते ही लार का रंग बदल जाएगा। इससे डॉक्टर यह पता लगा लेंगे कि भविष्य में आपको कैंसर है या हो सकता है। इतना ही नहीं, अगर आप कैंसर का इलाज करा चुके हैं तो शरीर में कोई वायरस सक्रिय तो नहीं है।

देश में इस तरह का पहला शोध
विशेषज्ञों ने लार में उस प्रोटीन का पता लगा लिया है जो कैंसर का कारण बनता है। इनका दावा है कि देश में इस तरह का शोध अभी तक नहीं हुआ है। जांच में अगर प्रोटीन का स्तर बढ़ा मिलता है तो यह संभावना लगाई जा सकती है कि कैंसर संभव है। अगर मुंह का कैंसर संभव है तो प्रोटीन लेवल अधिक बढ़ा मिलेगा। अभी इस चिप का प्रयोग माउथ कैंसर की स्क्रीनिंग में किया जाएगा। वैसे इससे ब्रेस्ट कैंसर, गाल ब्लेडर, चेस्ट और प्रॉस्टेट कैंसर की संभावना का भी पता लगाया जा सकता है, लेकिन इस पर शोध होना बाकी है।

परीक्षण में आए चौंकाने वाले नतीजे
जेके कैंसर संस्थान के डॉ. जीतेन्द्र वर्मा और आईआईटी की डॉ. प्रेरणा और ने एक साल के लंबे शोध के बाद विशेष चिप बनाने में सफलता हासिल की है। चिप का परीक्षण भी किया गया है। इसके तहत कैंसर अस्पताल में आने वाले 20 से 45 की उम्र के 200 मरीजों की लार का नमूना लिया गया। इसके नतीजे चौंकाने वाले मिले। करीब 50 फीसदी मरीज कैंसर के पहले पायदान पर थे। इनका इलाज जल्दी शुरू होने से कैंसर वहीं पर रुक गया।

तीन श्रेणियों में हुआ शोध
कैंसर की पहचान के लिए हुए शोध के दौरान मरीजों की तीन श्रेणियां बनाई गईं। एक तो जिन्हें कैंसर नहीं था। दूसरे ऐसे लोग जिन्हें कैंसर था और तीसरे ऐसे जिनका इलाज पूरा हो चुका था। डॉ. प्रेरणा के मुताबिक कैंसर कारक विशेष तरह के प्रोटीन की मौजूदगी से बीमारी का समय से पता चल गया। ऐसे लोग जो पान मसाला या गुटखा और बीड़ी-सिगरेट पी रहे हैं उनमें प्रोटीन का स्तर काफी बढ़ा मिला है। इससे यह पता लग सकता है कि ऐसे लोग कैंसर के प्रति हाई रिस्क जोन में हैं।

बायोप्सी की जरूरत नहीं
आईआईटी की इस चिप इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीजों को बायोप्सी नहीं करानी पड़ेगी। डिवाइस बिल्कुल वैसी होगी जैसे ब्लड शुगर की जांच की जाती है। डॉ. जीतेन्द्र वर्मा के मुताबिक अक्सर कुछ लोगों के मुंह में कैंसर जैसे पैच दिखते हैं मगर बायोप्सी के बाद रिपोर्ट निगेटिव आती है। ऐसे लोगों को राहत मिल सकेगी।

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आलोक पाण्डेय
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