लाॅकडाउन में कारीगर व नाई हो गए मालामाल, सैलून की दुकानें खुलने की आहट से निराश

छोटे कारीगरों ने लाॅकडाउन के वक्त कमाई का निकाला तोड़, घर‘-घर जाकर लोगों के बाल कटिंग के साथ कर रहे सेविंग, एक दिन में कमाई एक हजार के पार।

By: Vinod Nigam

Published: 16 May 2020, 08:15 AM IST

कानपुर। कोरोना वायरस के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में लाॅकडाउन का ऐलान किया था। जिसके चलते सैलून की दुकानों में ताले जड़ गए। पर गुमटी व सड़क के किनारे एक कुर्सी पर सेविंग करने वाले नाई व कारीगरों ने लाॅकडाउन के बीच आमदनी का जुगाड निकाल लिया था। मोबाइल में व्हट्सएप ग्रुप बनाकर वह सीधे ग्राहकों से जुड़ गए और एक दिन में डेढ़ से दो हजार रूपए कमा रहे हैं। पर 18 मई के बाद चैथे लाॅकडाउन में सैलून की दुकानें खुलने की चर्चा से छोटे उस्ताज निराश हैं।

छोटे उस्तादों ने की अच्छी कमाई
लाॅकडाउन के चलते कानपुर जनपद में करीब तीन हजार से ज्यादा सैलून की दुकनें पिछले 24 मार्च के बाद से बंद हैं। बड़े सैलून की मालिक, कारीगर व नाई पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं तो वहीं सैलून के ऐसे कारीगर भी हैं जिन्होंने लाॅकडाउन के वक्त खूब पैसा कमाया। होम डिलेवरी के जरिए वह ग्राहकों के सिर से बाल और सेविंग कर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

बना लिया व्हट्सएप ग्रुप
काकादेव में गुमटी में सैलून की दुकान चलाने जावेद बताते हैं कि हमारे पास कोचिंड मंडी के छात्र कटिंग व सेविंग के लिए आते थे। लाॅकडाउन के बाद गुमटी पर ताला जड़ गया तो छात्रों ने जावेद सैलूनवाले के नाम व्हट्सएप् ग्रुप बना दिया। व्हट्सएप ग्रुप में करीब पांच सौ लोग जुड़ गए। इसके बाद लोग फोन के जरिए व व्हट्सएप में मैजेस भेजकर मुझे अपने-अपने घरों में सेविंग के लिए बुलाने लगे। काम बढ़ा तो मैंने इलाके के 24 से ज्यादा कारीगरों को अपने साथ जोड़ लिया और बेरोजगारी के दौर में सबने अच्छा पैसा कमाया।

सावधानी और सर्तकता के साथ सेविंग
जावेद बताते हैं कि हतसभी 24 बंदे मुंह में माॅस्क और हाथों ग्लप्स पहनने के साथ ही औजारों को पहले घर में सेनेटाइज करते हैं और फिर ग्राहक के घर जाकर वहां भी उन्हें दोबारा गर्म पानी से धुलते हैं। इसके बाद ही बाल की कटिंग और सेविंग करते हैं। कटिंग व सेविंग के दौरान पूरी सावधानी बरतते हैं। जावेद ने बताते हैं कि वह दिन मे ंदो बार स्नान करते हैं। कटिंग के दौरान इस्तेमाल कपड़े भी धुलते हैं।

10 से 12 ग्राहक मिल जाते हैं
जवेद बताते हैं कि सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक हमलोग काम करते हैं। भोजन करने के बाद 4 बजे फिर से औजार लेकर ग्राहकों के घर की तरफ कदम बढ़ा देते हैं। जावेद बताते हैं कि एक कटिंग, सेविंग के बदले 100 से 150 रूपए मिल जाते हैं। दिनभर में 10 से 10 ग्राहकों की सेविंग करते हैं। हमारी अन्य साथी कारीगर भी अच्छे कमाई कर रहे हैं। जावेद लाॅकडाउप खुलने के प्रश्न पर कहते हैं कि इससे हमें काोई फर्क नहीं पड़ेगा। गुमटी भी खोलेंगे और होमडिलेवरी की सुविधा भी आगे भी देते रहेंगे।

 

ज्मापूंजी से दे रहे वेतन
चिड़ियाघर के पास बिलास सैलून के नाम से दुकान चलाने वाले बिलाल खान कहते हैं कि हमारे पास आधा दर्जन सैलून की दुकानें हैं। अधिकतर कारीगर दूसरे शहरों के हैं। एकाएक लाॅकडाउन लगने से वह अपने घरों को नहीं जा पाए। वहीं सैलून की दुकानों में तालेबंदी का आदेश आ गया। सभी कारीगरों को वेतन दे रहे हैं। आर्यनगर स्थित एक बड़ी सैलून शाॅप पर काम करने वाले कारीबर विजय ने बताया कि वह महोबा के मूल निवासी हैं। पिछले दस वर्षो से इसी सैलून में वेतन पर नहीं कमीशन पर काम कर रहे थे। इसी कमाई से परिवार चलता था। काम बंद होने से भोजन तो दूर बच्चों का दूध, रोज हाथ धोने के लिए साबुन, चाय से लेकर सब्जी पर भी आफत हो गया।

वेंटीलेटर पर कारोबार
नवाबगंज में दुकान चलाने वाले अशरफ कहते हैं सैलून तो बंद है। लेकिन मकान किराया व बिजली बिल का मीटर लगातार चालू है। एसी सुविधा रहने से बिजली बिल ज्यादा आता है। वहीं, महीनों की जमा पूंजी खर्च करना मजबूरी हो गई। दुकान में पड़े कई महंगे क्रीम खराब हो रहे हैं। ऐसे में सरकार को 18 मई के बाद सैलून की दुकान खोने जाने का आदेश दे देना चाहिए। जिससे वेंटीनेटर पर चल रहे इस कारोबार में फिर से नई जान आ जाए।

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Vinod Nigam
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