IIT - के प्रोफेसर कोर्ट के फैसले से खुश, SC-ST अयोग के पास पहुंचा पीड़ित

IIT - के प्रोफेसर कोर्ट के फैसले से खुश, SC-ST अयोग के पास पहुंचा पीड़ित

Vinod Nigam | Publish: Apr, 02 2018 03:26:32 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

दलित प्रोफेसर ने उत्पीड़न के लगाए थे आरोप, जांच के बाद संस्थान के चार प्रोफेसर पाए गए दोषी

कानपुर। सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट कानून में बदलाव के फैसले के बाद पूरे देश में प्रदर्शनों का दौर जारी है, तो वहीं कानपुर आईआईटी के कुछ प्रोफेसर गदगद हैं। क्योंकि इस फैसले के बाद उन पर कार्रवाई नहीं हो सकती, लेकिन पीड़ित प्रोफेसर पीछे हटने को तैयार नहीं है और इसी के चलते उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत एससी-एसटी आयोग से कर दी है। मामला संज्ञान में आते ही आयोग ने आईआईटी के निदेशक को 10 अप्रेल तक नोटिस देकर जवाब मांगा है। मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि नोटिस का जवाब जल्द दे दिया जाएगा। संस्थान की जांच में चार प्रोफेसर दोषी पाए गए थे, जिन पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
आईआईटी के दलित प्रोफेसर ने डॉ सुब्रमण्यम सडरेला ने जनवरी माह में चार वरिष्ठ प्रोफेसरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए निदेशक मणीद्र अग्रवाल से शिकायत की थी कि उन्हें जाति ***** कमेंट्स पास किये जाते हैं। इसके साथ ही उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है । मानसिक प्रताड़ित किया जाता था। शिकायत के बाद निदेशक मणींद्र अग्रवाल ने इसकी जांच के लिए एकेटीयू के कुपपति समेत तीन को नियुक्त किया था। एकेटीयू के प्रो. विनय पाठक ने आईआईटी के प्रोफेसरों के बयान के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट को संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल को सौंप दी गई थी। मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिल गई है। इस मामले में चारों प्रोफेसर दोषी पाए गए है। इसी के बाद कार्रवाई की तरवार लटकते देख आरोपी प्रोफेसरों के पक्ष में संस्थान के अन्य प्रोफेसर आ गए हैं और कार्रवाई के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
एससी-एसटी आयोग ने भेजा नोटिस
दलित प्रोफेसर के उत्पीड़न के मामले का एससी/एसटी आयोग ने संज्ञान लिया है। कमीशन ने एयरो स्पेस विभाग के एचओडी और आईआईटी कानपुर के निदेशक नोटिस भेजा है। 10 अप्रैल तक आयोग के सामने हाजिर होकर जवाब मांगा है। आयोग की नोटिस की भनक जैसे ही दोषी प्रोफेसरों को हुई तो वह हरकत में आए और इसकी दोबारा निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की। मामले पर आईआईटी निदेशक मनिन्द्र अग्रवाल के मुताबिक आयोग को लिखित जवाब भेजा जा चुका है। इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की कमेटी से जांच कराए जाने के लिए एक कॉपी भेजी गई है।
नहीं हुई सुलह, कार्रवाई पर अड़े
इसी बीच फजीहत से बचने और प्रोफेसरों को बचाने के लिए आईआईटी के निदेशक ने बैठक रखी। बैठक में सभी पॉइंट्स पर विस्तार से चर्चा की गई थी। बैठक में चेयरपर्सन आरसी भार्गव ने बातचीत कर दोनों पक्षों में सुलह कराने की बात कही थी लेकिन एक हफ्ते बाद भी दोनों पक्षों में कोई बात नहीं बनी। जब इसकी जानकारी एससी आयोग को हुई तो उसने नोटिस भेजा है। एयरो स्पेस विभाग के असिस्टेंस प्रोफ़ेसर डॉ। सुब्रमण्यम सडरेला ने जनवरी 2018 में ज्वाइन किया था। इसी दौरान जनवरी महीने के अंत में विभाग के चार सीनियर प्रोफेसरों ने डॉ। सुब्रमण्यम पर जाति ***** कमेंट किया था। इसके साथ ही उनका आये दिन मजाक उड़ाया जाने लगा। काफी दिनों तक यह सहने के बाद डॉ। सुब्रमण्यम ने इसकी शिकायत आईआईटी के निदेशक से की थी।
दो खेमों में बंटा संस्थान
दलित प्रोफेसर के उत्पीड़न की शिकायत के बाद संस्थान दो खेमों में बंट गया है। चार आरोपी प्रोफेसरों के पक्ष में कई अन्य लोग खड़े हो गए हैं और मामले को झूठा बताकर उन्हें दोषमुक्त किए जाने की मांग रहे हैं। एक प्रोफेसर ने बताया कि शिकायत करने वाले प्रोफेसर की नजर निदेशक की कुर्सी पर थी और इसी के चलते उन्होंने बेबुनियाद आरोप लगाकर प्रोफेसरों के साथ ही संस्थान को बदनाम किया है। यदि शासन-प्रशासन प्रोफेसरों पर कार्रवाई करता है तो इसके परिणाम बहुत खराब होंगे। एससी-एसटी आयोग की नोटिस पर प्रोफेसर ने कहा कि यदि हमारे समक्ष कोई बात आती है तो उसका जवाब दिया जाएगा।

 

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